योग से रोगमुक्त होता है संपूर्ण शरीर

जागरणसंवाददाता,राउरकेला:विश्वयोगदिवस21जूनकोदेश-दुनियामेंमनायाजाएगा।कोरोनासंक्रमणकालकेकारणमानवजीवनकेलिएयोगकीमहत्ताऔरबढ़गईहै।सुंदरगढ़जिलेमेंभीशहरांचलवग्रामांचलमेंरविवारकोमनाएजानेवालेयोगदिवसकोलेकरतैयारियांकीगईहैं।ऐसेमेंआइएजानतेहैंयोगअपनानेवालोंकीराय।योगएवंप्राकृतिकचिकित्सावर्तमानमेंमधुमेह,उच्चरक्तचाप,जोड़ोंकेदर्द,पेटसंबंधितरोगकेउपचारकासबसेअच्छामाध्यमहै।इसेअपनानेवनियमितअभ्यासकरनेवालासंपूर्णशरीरकोरोगमुक्तकरसकताहै।मैंने1971राउरकेलाइस्पातसंयंत्रमेंबतौरजूनियरइंजीनियरकरियरशुरूकियाथा।तबमेरीतबीयतकाफीखराबरहतीथी।हरियाणाभवनमेंतबयोगशिविरलगताथा।साधनानंदमहाराजकेशिष्यरामाशीषमिश्रायोगसिखायाकरतेथे।वहींसेयोगसीखाएवंअपनाया।1972मेंयोगएवंप्राकृतिकचिकित्साकेंद्रकीशुरुआतकी।वहांलोगआकरयोगाभ्यासकरनेलगे।अबतक25हजारसेअधिकलोगस्वास्थ्यलाभकरचुकेहैं।सेवानिवृत्तिकेबादभीमैंनियमितअभ्यासकरताहूंऔर75सालकीउम्रमेंभीनिरोगजीवनव्यतीतकररहाहूं,यहयोगसेहीसंभवहुआहै।

-गोविदरामअग्रवाल,संस्थापक,प्राकृतिकयोगचिकित्साकेन्द्र।पतंजलिअष्टांगयोगसेसंपूर्णशरीरकीचिकित्साहोतीहै।इससेस्थूलशरीर,सूक्ष्मशरीरवकारणशरीरभीस्वस्थहोताहै।योगकोलोगकेवलहाथपैरहिलानाएवंआसनकरनासमझतेहैंपरवास्तवमेंयहयोगसाधनाहै।योगकेदौरानहमअपनेसाथसाथजगतकेकल्याणकीभीकामनाकरतेहैं।योगकोचिकित्साविज्ञाननेभीचिकित्सापद्धतिकेरूपमेंस्वीकारकियाहै।दवासेकेवलएकरोगकाइलाजहोताहैपरयोगसेसंपूर्णशरीरका।मैंखुदअर्थराइटिससेपीड़ितथाजोयोगसेहीठीकहोसका।शांतिकुंजहरिद्वारमेंमिलाप्रशिक्षणभीलाभदायकरहा।

-डॉ.रासबिहारीमहापात्र,पूर्वसंयुक्तनिदेशक,आइजीएच।योगसेशरीरकेसभीप्रकारकेरोगोंकाइलाजसंभवहै।प्राकृतिकचिकित्साभारतीयसंस्कृतिएवंपरंपरासेजुड़ीहुईहै।इसकेनियमितअभ्यासकीआवश्यकताहै।13सालपहलेमुझेविभिन्नशारीरिकपरेशानीथी।मैनेउत्कलयोगएवंप्राकृतिकचिकित्साकेंद्रमेंआकरयोगअभ्यासशुरूकियाऔरकाफीलाभहुआ।सातसालसेखुदयोगकेंद्रमेंप्रशिक्षणदेरहीहूं।केंद्रमेंखासकरमहिलाएंउच्चरक्तचाप,माइग्रेन,जलोदर,जोड़ोंकेदर्दएवंअन्यशिकायतलेकरआतीहैं।नियमितअभ्यासएवंप्राकृतिकचिकित्साउन्हेंलाभहोताहै।हरदिनकेंद्रमें10सेअधिकमहिलाएंआकरअभ्यासकररहीहैं।योगकोअपनाकरहमअपनेकोनिरोगरखसकतेहैं।

-नीतूओझा,योगप्रशिक्षक।