यह धरती 'अमन' की, सीने में मां भारती, आबोहवा में देशभक्ति

समस्तीपुर।गंगाकापवित्रतटऔरयहांकीमाटीमेंपलते-बढ़तेमांभारतीकेलाल।आबोहवामेंदेशभक्तिकीखुशबूतोदेशकेलिएकुछकरगुजरनेकाजज्बा।यहधरतीहै'अमन'की।उसअमनकी,जिसकीशहादतपरगौरवान्वितसुल्तानपुरकीमिट्टीजयघोषकरतीहै।बहादुरीऔरवीरताकोकोटि-कोटिनमनकरतीहै।

आजमेघगर्जनहोरहा,अंबररोरहा,धराकादामनभीगरहा।लालकीशहादतपरमांभारतीकाकलेजाफटरहा।आजघर-घरअमनकीयादेंहैं,बातेंहैं,कुछकिस्सेभीहैं।

मंगलवारकीरातबजीफोनकीएकघंटीनेमाहौलबदलदियाहै।लोगसदमेमेंहैं।सुधीरसिंहकेपुत्रअमनसिंहकीचीनीसैनिकोंकेसाथहिसकझड़पमेंशहीदहोनेकीसूचनामिलनेकेबादसेहीलोगउनकेघरजमेहैं।सभीकीआंखेंनमहैं।पिताएककिनारेसदमेमेंसुबकरहे।अबतोबसबेटेकोआखिरीबारदेखनेकीलालसा।उन्हेंजोसमझानेजाता,खुदरोपड़ता..।

घरोंमेंनहींजलेचूल्हे,पसरारहासन्नाटा:बुधवारकीशामबड़ीउदासथी।बच्चोंकीभूखगायबथी।घरमेंचूल्हा-चौकाकिसकेलियेकियाजाए।शामरातमेंतब्दीलहोगई,परसुल्तानपुरजगारहा।कहनेकोबहुतकुछहै,परशब्दोंकाअभावहै,इसलिएखामोशीपसरीहै।घरोंसेनिकलतींसिसकियांउसखामोशीकोतोड़तीहैं।देररातलोगोंकेबीचबैठेबेसुधपिताकेपासकोईशब्दनहीं।मातारेणुदेवीकाविलापआहपैदाकरताहै।पत्नीकीवेदनाऔरकराहभावनाओंकोबेधतीहै।बहन-भाईकीसिसकियांभावुककरतीहैं।

हमेंहमाराअमनलौटादीजिए:हमेंहमाराअमनलौटादीजिए।आपसमझतेक्योंनहीं..जाइएपहलेउन्हेंलेआइए..अमनकीपत्नीमीनूकीयेबातेंमाहौलकोगमगीनकरतीहैं।पतिकीशहादतकेबादहरआने-जानेवालोंसेउनकीयहीमांगहोतीहै।हरकिसीसेयहीपूछतीं,क्याअमनआरहे..?एकऐसासवाल,जिसकाजवाबकिसीकेपासनहीं।महजएकवर्षपूर्वउनकीशादीहुईथी।बीतेदिनोंकीयादेंऔरभविष्यकेबीचशून्यकोनिहारतींउनकीआंखेंअथाहपीड़ाकोदर्शारहीं।