वित्तरहित प्रोफेसर का खेत उगल रहा सोना, नहीं मिल रहा फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य

मोतिहारी।किसीनेठीकहीकहाहैकिअगरआदमीकेअंदरजुनूनकेसाथपरिश्रमऔरलगनहोतोवहकिसीभीक्षेत्रमेंअपनीकामयाबीकादरवाजाखोलहीलेताहै।आजकलसुरसाकीमुंहकीतरहदेशमेंबेरोजगारीकीसमस्याबनचुकीहै।ऐसेमेंरोजगारकीसमस्याकेबीचहीयुवाओंमेंकिसानीकाक्रेजतेजीसेबढ़रहाहै।एकऐसाहीमिशालपूर्वीचंपारणकेमधुबनप्रखंडक्षेत्रकेगोपालपुरगांवनिवासीप्रो.रामविनोदसिंहपेशकररहेहैं।प्रो.रामविनोदसिंहवित्तरहितभगवानसिंहमहाविद्यालयमेंहिन्दीकेप्रोफेसरहैं।कॉलेजसेदोबारउन्हेंअनुदानमिला।वेअपनेजीवन-यापनकेलिएगेहूंकीखेतीशुरूकरदी।कुछवर्षोंसेवेइसकीखेतीकरतेआरहेहैं।गेहूंकीफसलकाउत्पादनइतनाहोताहैकिअबक्षेत्रकेकिसानइसकीतरकीबसीखनेउनकेपासजारहेंहैं।बतायाकिवे5एकडगेहूंकीखेतीकरतेहैं।सबसेपहलेअपनीखेतकीगहरीजुताईकरातेहैं,फिरउसमेंगेहूंकीबुआईकरातेहैं।जैविकउर्वरककेसाथसाथडीएपी,यूरिया,पोटाश,अंडीखल्ली,जिकगेहूंकीबुआईकेवक्तदेतेहैं।करीबपांचमाहमेंउनकीगेहूंकीफसलतैयारहोजातीहै।बतायाकिप्रतिकठ्ठा1क्विटंलकापैदावारहोताहै।खेतकीदोबारसिचाईकरातेहैं।आगेकहाकिसरकारद्वाराफसलकानिर्धारितन्यूनतमसमर्थनमूल्यनहींमिलपारहाहै,जिससेआने-पौनेदामोंमेंअनाजकोबेचनापड़ताहै।