विलुप्त हो रही काष्ठ कला को संजो रहे पूर्व नौ सैनिक, स्वरोजगार का है बेहतर जरिया

पौड़ी,जेएनएन।पहाड़ोंसेविलुप्तहोरहीकाष्ठकलाकोसंजोनेमेंजुटाएकपूर्वनौसैनिकनईपीढ़ीकेलिएउम्मीदकीकिरणबनकरसामनेआयाहै।इसपूर्वसैनिककीबनाईकलाकृतियांनसिर्फयुवाओंकोआकर्षितकररहीहैं,बल्किउन्हेंकुछनयाकरनेकोभीप्रेरितकररहीहैं।पूर्वसैनिककाकहनाहैकिउनकामुख्यध्येययुवाओंकोपीढ़ियोंसेचलीआरहीइसविधासेपरिचितकरानाहै,जिससेइसेवहभविष्यकाआधारबनासकें।

जिलामुख्यालयपौड़ीस्थितकोटद्वाररोडनिवासीअरविंदमुदगिलवर्ष1994मेंनौसेनासेसेवानिवृत्तहुए।लेकिन,उन्हेंशहरोंमेंबसनागवारानहुआऔरवापसपौड़ीलौटआए।बकौलअरविंद,'मैंनेदेखाकिपहाड़ीक्षेत्रोंकीपहचानरहीकाष्ठकलाधीरे-धीरेदमतोड़रहीहै।जबकि,एकदौरमेंशायदहीकोईघररहाहोगा,जहांकाष्ठनिर्मितवस्तुएंनहों।'

अरविंदबतातेहैंकिकाष्ठकलाउन्हेंबचपनसेहीआकर्षितकरतीरहीहै,लेकिनसेवामेंरहतेअपनेइसशौककोपूरानहींकरपाए।सेवानिवृत्तिकेबादउनकेपासपर्याप्तवक्तथा,सोउन्होंनेअपनेघरमेंहीशोरूमबनाकरसूखीलकड़ीऔरजड़ोंपरकलाकृतियांउकेरनेकाकार्यशुरूकिया।बतायाकिवहअबतकएकहजारसेअधिककलाकृतियांबनाचुकेहैं।इनमेंपहाड़कीसंस्कृतिकोप्रतिबिंबितकरतीवस्तुएं,पेनस्टैंड,जीव-जंतुऔरमानवीयसंवेदनाओंपरआधारितआकृतियांशामिलहैं।

स्वरोजगारकाबेहतरजरिया

अरविंदकहतेहैंकिकोशिशकरोतोपहाड़ीक्षेत्रोंमेंस्वरोजगारकेसाधनोंकीकमीनहींहै।उनकीबनाईकलाकृतियांभीरोजगारकाआधारबनरहीहैं।वहसमय-समयपरविद्यालयोंमेंजाकरबच्चोंकोयहविधासीखनेकेलिएप्रेरितकरतेहैं,जिससेभविष्यकोलेकरनिश्चिंतहोसकें।

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दिल्लीमेंभीलगाचुकेप्रदर्शनी

अरविंदबतातेहैंकिवर्ष2008मेंनईदिल्लीस्थितइंदिरागांधीराष्ट्रीयकलाकेंद्रमेंआयोजितप्रदर्शनीमेंउनकीबनाईआकृतियांभीशामिलकीगईथीं।इन्हेंकाफीसराहनामिली।बतायाकिकाष्ठसेकलाकृतियांबनानेमेंखर्चातोकमआताहीहै,दामभीअच्छेमिलजातेहैं।

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