Vijayadashami: मेवाड़ में नवमी पर अश्व पूजन व विजयदशमी पर खेजड़ी पूजन की सूर्यवंशी परंपरा

उदयपुर,सुभाषशर्मा।Vijayadashami:आश्विनमाहकीशुक्लपक्षकीनवमीअर्थातनवरात्रिमेंअश्व-गजपूजनकाविधानहै।आश्विननवरात्रिकेदसदिवसीयपर्वमेंक्षत्रियसाधकशक्तिकीउपासनाकरतेहैंवरणक्षेत्रमेंउनकेसहायकअस्त्र-शस्त्रऔरहाथी,घोड़ेकापूजनकरतेहैं।मेवाड़मेंभीइसपरंपराकेसाक्ष्यचित्रोंकेमाध्यमसेप्राप्तहोतेहैं,जिनमेंमहाराणाद्वाराअश्व-गजपूजनराजमहलोंमेसंपन्नकियाजाताथा।वर्तमानमेंअश्वपूजनकासमारोहऐतिहासिकसिटीपैलेसकेमाणकचौकमेंआयोजितहोताहै।देशमेंस्वतंत्रताकेबादबीसवींसदीकेआठवेंदशकतकअश्व-गजपूजनकीपरंपरारहीहै,लेकिनउदयपुरराजमहलमेंअश्वपूजनकीपरंपरालगातारनिभाईजारहीहै।

इसदिनतत्कालीनमेवाड़साम्राज्यकेसभीसरदार,उमरावअपनेपारंपरिकवेशमेंउपस्थितहोतेहैं।राजपरिवारकेवारिशशंभुनिवासपैलेससेबग्गीयाकारमेंसवारहोकरराजशीलवाजमेकेसाथमाणकचौककेदरीखानेतकआतेहैं।उनकेलवाजमेमेंछड़ी,गोटावचंवर,कोतलघोड़े,रिसालाकेघोड़े,पैलेसबैंडवसिक्युरिटीगार्डकीटुकड़ीशामिलहोतीहै।शुभमुहूर्तमेंपुरोहितववेदपाठीब्राह्मणोंद्वारावैदिकमंत्रोचारकेसाथराजपरिवारकामुखियाविषमसंख्यामेंउपस्थित3,5,7,9या11अश्वोंकाएक-एककरसंकल्पकेसाथकास्नानकरानेकेबादवस्त्रधारणकरवाउनकेतिलककरउनकापूजनकरतेहैं।उन्हेंमूंग,चने,गुड़,पुड़ीतथाजवारेखिलानेकेपश्चातअंतमेंउनकीआरतीकरतेहैं।

दशहरापर्ववखेजड़ीपूजा

आश्विनशुक्लदशमीकोमनाएजानेवालेविजयदशमीकेत्योहारसेमेवाड़राज्यकीकईपरंपराएंजुड़ीहुईहैं।इनपरंपराओंमें‘अहिड़ाकीशिकार’,महत्वपूर्णअभियानपरप्रस्थान,महाराणावसरदारोंकेमध्यसंबंधमजबूतकरनेकेलिएराजमहलमेंदावतकाआयोजनकियाजाताथा।इसदिनराजपरिवारकेमुखियासफेदपोशाकवअमरशाहीपगड़ीधारणकरराजमहलपरिसरमेंस्थित‘पिताम्बररायजी’व‘नागणेचीमाता’कीपूजाकरतेथे।उसकेपश्चात‘पागड़ाकीहथणी’सेघोड़ेपरसवारहोकरलवाजमेकेसाथहाथीपोलकेबाहरखेजड़ीवृक्षकापूजनकरतेथे।आजादीकेपूर्वतकइसअवसरपर150तोपोंकीसलामीदीजातीथी,लेकिनबादमेंइन्हें21तोपोंकीसलामीतकसीमितकरदिया।इसत्योहारराजमहलमेंभी‘नाहरोंकादरीखाना’नामकस्थानपरराजपरिवारकादरबारआयोजितहोताहै।