तब सादगी से लड़े जाते थे चुनाव, अब पानी की तरह बहता है पैसा

सीतापुर:मल्लापुरके89वर्षीयशिवव्रतसिंहने1956मेंपहलामतदानकियाथा।पहलेचुनावमेंइसलिएमतदाननहींकिया,तबवहमतदाताकेरूपमेंपंजीकृतनहींथे।उससमयचुनावोंमेंनेतावकार्यकर्तानाववबैलगाड़ीसेप्रचारकेलिएआतेथे।बाढ़प्रभावितइलाकाहोनेकेकारणमार्गभीनहींथा।यहांतकसंसाधनोंसेपहुंचनाभीबहुतकठिनथा।साइकिलसेभीकार्यकर्ताजनसंपर्ककेलिएपहुंचतेथे।जीप,ट्रैक्टरजैसेसाधनबहुतकमहोतेथे।

प्रचारकेलिएआनेवालेनेतावकार्यकर्तारातहोनेपररुकजातेथे।झुग्गी-झोपड़ीमेंरातबितातेथे,जोकिसाथमेंचटाईवपालिथीनरखतेथे,जिसेबिछाकरआरामकरतेथे।तबईमानदारवसाफ-सुथरीछविकेनेताओंकाबोलबालाथा,जोकिदेशसेवावविकासकेलिएचुनावमैदानमेंउतरतेथे।विभिन्नदलोंकेबीचनेताओंमेंमधुरसंबंधरहतेथे।रास्तेमेंमिलजातेतोगलेलगाकरएक-दूसरेकाहालचालपूछतेथे।घर-घरजाकरवोटमांगतेथे,वहांसम्मानवस्नेहभीमिलताथा।सादगीसेनेताचुनावप्रचारकरतेथे।

लेकिन,आजकीराजनीतिसेयहसबगायबहोचुकाहै।अबतोवैचारिकलड़ाईकीजगहदुश्मनीहोनेलगीहै।बम,हथगोलावगोलियांचलतींहैं।वर्तमानराजनीतिसेनैतिकताखत्महोगईहै।अबतोचुनावोंमेंपानीकीतरहपैसाबहायाजाताहै।प्रलोभनदेकरमतखरीदाजानेलगाहै।करोड़ोंरुपयेखर्चकरनेताओंसेविकासकीउम्मीदकैसेकरसकतेहैं।राजनीतिधनकमानेकाजरियाबनगईहै।इसलिएहरकोईसांसदवविधायकबननाचाहताहै।देशसेवाकीभावनाबचीहीनहींहै।