तालिबान के तरफदार: तालिबान की तारीफ और तरफदारी करने वाले सभ्य समाज के हितैषी नहीं कहे जा सकते

काबुलपरकब्जाजमानेकेबादतालिबाननेताओंनेअपनीपहलीप्रेसकांफ्रेंसमेंभलेहीयहजतानेकीकोशिशकीहोकिवेबदलगएहैं,लेकिनउनपरयकीननहींकियाजासकता।इसकाप्रमाणखुदअफगानिस्तानकेवेतमामलोगहैं,जोउनकेभयसेदेशछोड़नेकेलिएबेकरारहैं।जोअफगानीदेशछोड़करजानेमेंसक्षमनहीं,वेतालिबानकेखिलाफअपनीआवाजबुलंदकररहेहैं।सबसेज्यादादहशतजदावहांकीमहिलाएंहैंऔरइसकाकारणयहीहैकितालिबाननेउनपरसख्तकिस्मकीपाबंदियांलगानीशुरूकरदीहैं।तालिबाननेताकथनीऔरकरनीमेंअंतरदिखानेकेसाथजिसतरहपुरानेतौर-तरीकोंपरचलतेदिखरहेहैं,उससेयहीलगताहैकिवेसुधरनेकास्वांगभरकररहेहैंऔरउनकाइरादादुनियाकीआंखोंमेंधूलझोंकनाहै।तालिबानकीहरकतेंयहभीबयानकरतीहैंकिवेउसीधार्मिककट्टरताऔरकबीलाईमानसिकतासेग्रस्तहैं,जिससेदोदशकपहलेतबथे,जबअफगानिस्तानकीसत्तापरकाबिजथे।जबतालिबानकेतेवरोंसेकरीब-करीबपूरीदुनियासशंकितहैऔरकईदेशसाफतौरपरयहकहरहेहैंकिउनपरआसानीसेभरोसानहींकियाजासकता,तबयहहैरानऔरपरेशानकरनेवालीबातहैकिभारतमेंकुछलोगउनपरफिदाहुएजारहेहैं।

पहलेसंभलसेसमाजवादीपार्टीकेसांसदशफीकुर्रहमानबर्कनेअफगानिस्तानपरतालिबानकेकब्जेकीतुलनाभारतकेस्वाधीनतासंग्रामसेकरदी।फिरमुस्लिमपर्सनललाबोर्डकेप्रवक्तामौलानासज्जादनोमानीनेनकेवलतालिबानकीजीतपरखुशीजताई,बल्किभारतीयमुसलमानोंकीओरसेउन्हेंसलामभीभेजदिया।यहमहजएकबेहूदाबयानहीनहीं,भारतीयमुसलमानोंकोअसहजकरनेवालीओछीहरकतहै।इसकीजितनीभीकड़ीनिंदाकीजाए,कमहै,क्योंकितालिबानसदियोंपुरानीउसविचारधाराकाप्रतिनिधित्वकरतेहैं,जिसकाआजकेयुगमेंकहींकोईस्थाननहींहोसकता।तालिबानकीतरफदारीकरनेवालेबेतुकेबयानयहीसंकेतकरतेहैंकिभारतमेंभीकुछलोगउसीतालिबानीसोचसेग्रस्तहैं,जोअफगानिस्तानकेसाथ-साथपूरीदुनियाकेलिएखतराबनगईहै।तालिबानकीतारीफऔरतरफदारीकरनेवालेसभ्यसमाजकेहितैषीनहींकहेजासकते।इसमेंकोईसंदेहनहींकिऐसेलोगउससड़ी-गलीव्यवस्थाकेहिमायतीहैं,जिसमेंमहिलाओंकेलिएकोईसम्माननहींऔरजोसभ्यसमाजकेलिएकिसीनरकसेकमनहीं।यहसमझनाकठिनहैकिऐसेलोगयहक्योंनहींदेखपारहेहैंकिअफगानिस्तानकेआमलोगऔरखासकरमहिलाएंकिसतरहखौफकेसायेमेंहैं?