सूरजी की मौत के बाद पीछे छूट गई लक्ष्मीबथान की बदहाली

गावा(गिरिडीह):सूरजीसड़कपरपैदाहोतेहीमौतकीगोदमेंसोगईबच्चीतोअबइसदुनियामेंनहींहैपरंतुउसकेबादपीछेछूटगईहैवहपांचकिलोमीटरलंबीउबड़खाबड़सड़कवलक्ष्मीबथानगांवकीबदहाली।लक्ष्मीबथानकीबदहालीकेकिस्सेबयांकरतेखत्मनहींहोरहेहैं।कोईएकसमस्याहोतोउसेबयांकियाजाएपरंतुयहांतोकदम-कदमपरसमस्याओंकाअंबारलगाहुआहै।गांवमेंजिदगीगुजारनेकेलिएसरकारीस्तरपरमिलनेवालीतमाममूलभूतसुविधाओंमेंसेएकभीसुविधाएंयहांकेलोगोंकोमयस्सरनहींहै।गांवमेंबिजली,पानी,शिक्षा,सड़क,सिचाई,चिकित्साजैसीएकभीसुविधाएंबहालनहींहैं।गांवमेंग्रामीणोंकीओरसेनिर्मितएकमात्रमिट्टीकाकुआंहै।लक्ष्मीबथानजिलामुख्यालयसेलगभग100किलोमीटर,तिसरीप्रखंडमुख्यालयसे25किमीएवंगावांप्रखंडसेआठकिलोमीटरदूरहैजोएकपहाड़ीपरबसाहुआहै।

-25परिवारोंकेलिएएककुआं:गांवमें25परिवारहैंजिसमेंकुल200से250लोगरहतेहैं।पानीभीबड़ीमशक्कतसेमिलतीहैक्योंकिकुएंकीहालतदयनीयहै।पानीमानोंपातालमेंचलागयाहो।ग्रामीणकहतेहैंकिकुएंमेंपानीकीइतनीकिल्लतहैकिपानीखत्महोजाताहैतोघंटोंइंतजारकरकेकुएंमेंपानीजुटनेकाइंतजारवेकरतेहैं।बतायाजाताहैकिपानीपीनेलायकभीनहींहै,लेकिनमजबूरीमेंग्रामीणइसीकोपीकरगुजाराकरतेहैं।ग्रामीणबुधनहांसदानेबतायाकियहकुआंबहुतपुरानाहैऔरइसेपूर्वजोंनेखुदसेबनवायाथा।वहींकान्हूटुडूनेबतायाकिजेठबैशाखजैसेमहीनेमेंतोकुआंभीसूखजाताहैतोगांवसेदूरलगभगतीनकिमीभंडेश्वरपहाड़जहांएकझरनामेंपानीआताहै,उसीजगहसेमाथेपरडेगचीलेकरजातेहैंऔरभरकरपानीलातेहैं।

-लकड़ीबेचकरकरतेहैंगुजरबसर:लक्ष्मीबथानकेग्रामीणोंनेबतायाकिहमारेपासकिसीभीतरहकारोजगारनहींहैऔरसरकारकीचलाईजारहीकिसीभीयोजनाकेबारेमेंउन्हेंपतानहींहै।मनरेगाक्याहोताहैपतानहींहैताकिहमलोगोंकोरोजगारमिलसके।ऐसीकोईव्यवस्थानहींहैजिसकीवजहसेअपनेभरण-पोषणऔरपेटकेलिएसूखीलकड़ीकाटकरमाथापरलेकर10-15किलोमीटरदूरगावां,माल्डाआदिबाजारमेंघूमकरबेचतेहैं।इससेहमलोगोंको80से100रुपयेतकमिलताहै।फिरउसीसेगुजाराकरतेहैं।हमलोगोंकाव्यवसायहीलकड़ीबेचनाहैक्योंकिऔरकोईरोजगारकासाधननहींहै।