सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच अनवरत संघर्ष, कानून भी जवानों की मदद करने में विफल

ब्रजबिहारी।महिलाएवंबालविकासमंत्रीस्मृतिजुबिनइरानीकेअभिनयऔरनिर्देशनकीउपलब्धियोंसेहमसभीपरिचितहैं।टेलीविजनपरसफलकरियरकेबादराजनीतिमेंभीलगातारकामयाबीकीसीढ़ियांचढ़रहींइरानीअबलेखककेरूपमेंसामनेआईहैं।उनकापहलाउपन्यास'लालसलाम'पाठकोंकेहाथमेंहै।जैसाकिनामसेहीस्पष्टहै,इसउपन्यासकाकथानकनक्सलसमस्यापरकेंद्रितहै।अप्रैल,2010मेंछत्तीसगढ़केदंतेवाड़ामेंनक्सलहमलेमेंसीआरपीएफके76जांबाजोंकेबलिदानसेप्रेरितइसरचनामेंकेंद्रीयमंत्रीनेदेशकेइससबसेपिछड़ेऔरगरीबराज्यमेंधुरवामपंथियोंऔरसुरक्षाबलोंकेबीचचलरहेअनवरतसंघर्षकेबीचमानवीयमूल्योंऔरनैतिकदुविधाओंकोरेखांकितकरनेकाप्रयासकियाहै।यहउपन्यासहमेंयहभीएहसासकराताहैकिकैसेहमारेबहादुरजवानउनपरिस्थितियोंमेंभीकानूनकीरक्षाकेलिएजानन्योछावरकरनेकोतत्पररहतेहैं,जबस्वयंकानूनभीउनकीमददकरनेमेंविफलहोजाताहै।

इसउपन्यासकेनायकहैंभारतीयपुलिससेवा(आइपीएस)केएकआदर्शवादीऔरअतिउत्साहीअधिकारीविक्रमप्रतापसिंह।छत्तीसगढ़केअंबुजामेंवरिष्ठआइपीएसअधिकारीऔरअपनेबचपनकेमित्रदर्शनकुमारएवंउनकेसहयोगियोंकीबारूदीसुरंगमेंमृत्युकीघटनासेविचलितविक्रमकोजबपताचलताहैकिइसकीजांचउसेहीसौंपीगईहैतोउसेलगताहैकिवहजल्दहीअपराधियोंतकपहुंचजाएगाऔरउन्हेंसजाभीदिलवाएगा,लेकिनउसकेबादएक-एककरहत्याओंकाक्रमशुरूहोताहै,जोथमनेकानामनहींलेताहै।दर्शनकुमारऔरउनकेसाथियोंकेबादविक्रमकेसंपर्कमेंआनेवालेनिशानाबनतेहैं।एकमहिलापत्रकारकीलाशउसकेघरसेबाहरपेड़परटंगीमिलतीहै।सुरक्षाकेसख्तघेरेमेंरहनेवालेएकउद्योगपतिकोसुबहटहलतेसमयगोलीसेउड़ादियाजाताहै।उसकेबादरिटायरआइपीएसअधिकारीअपनेघरमेंमृतपाएजातेहैं।

एकमामलेकीजांचशुरूनहींहोतीहैकिदूसरीघटनाघटजातीहै।एसपीविक्रमप्रतापसिंहखुदकोजांचकीएकअंधेरीगुफामेंखड़ापातेहैं।वेअकेलेक्याकरसकतेहैं।उनकीविवशताथानाभवनऔरबुनियादीसंचारएवंपरिवहनसुविधाओंसेमहरूमपुलिसव्यवस्थाकीपोलखोलतीनजरआतीहै।हालांकिसुविधाओंकेअभावकेबादभीवेकर्तव्यपथपरबढ़तेजातेहैं,लेकिनउन्हेंसबसेज्यादानिराशातबहोतीहै,जबउन्हेंपताचलताहैकिपुलिस,प्रशासनऔरउद्योगजगतकेकुछप्रभावशालीलोगोंकानक्सलियोंसेगहरासंबंधहै।दिल्लीविश्वविद्यालयकेअंतरराष्ट्रीयस्तरकेएकविद्वानप्रोफेसरभीइननक्सलियोंकेमददगारहैं।

दरअसल,उपन्यासकोपढ़तेसमयपाठकआसानीसेअनुमानलगासकतेहैंकिकिसप्रोफेसरकीबातहोरहीहै।यहीनहीं,देशकीशीर्षअदालतकेनामचीनवकीलभीपहचानेजासकतेहैं।येप्रोफेसर,वकील,पुलिसएवंप्रशासनिकअधिकारीकैसेगरीबोंकेनामपरअपनी-अपनीदुकानचलारहेहैं,इसकाउपन्यासमेंईमानदारीसेचित्रणकियागयाहै।इसउपन्यासमेंयलगारपरिषदऔरभीमा-कोरेगांवकीगूंजभीसुनाईदेगीकिकैसेइनराष्ट्रविरोधीताकतोंनेप्रजातांत्रिकढंगसेचुनीगईसरकारकोअस्थिरकरनेकेलिएषड्यंत्ररचाथा।

यहउपन्याससहीमायनेमेंएकथ्रिलरहै।पाठकएकबारपढ़नाशुरूकरेगातोखत्मकरनेसेपहलेउठनानहींचाहेगा।दृश्यमाध्यममेंलेखिकाकेअनुभवोंकीछापइसपरस्पष्टरूपसेदेखीजासकतीहै।कहनेकाआशययहहैकिअगरकोईनिर्माता-निर्देशकइसपरफिल्मबनानेकीसोचेतोउसेज्यादापरिश्रमनहींकरनापड़ेगा।नक्सलहिंसाकीघटनाओंकाएकघनीभूतघटनाक्रमउनकाइंतजारकररहाहै।उपन्यासमेंकईसटीकडायलागभीहैं।जैसे,जबएसपीविक्रमप्रतापसिंहमहिलापत्रकारकीहत्याकेबादजांचकरनेपहुंचतेहैंऔरअपनेअधीनस्थअधिकारीसेलाशकेनाखूनसेखूनकेनमूनेकेबारेमेंपूछतेहैंतोउसकाजवाहआताहै,'सर,वोलेवलकाफोरेंसिकटीवीशोमेंहोताहै,अंबुजामेंनहीं।'

हालांकियहउपन्यासअंग्रेजीमेंलिखागयाहै,लेकिनइसकीभाषाकाफीसरलहै।सिर्फएकचीजसमझमेंनहींआईकिइतनातेज-तर्रारआइपीएसअधिकारीविक्रमप्रतापसिंहभलायहकैसेभूलगयाकिअगरउसेकिसीकेमोबाइलकालकारिकार्डप्राप्तकरनाहैतोइसकेलिएमोबाइलकंपनीकोएकमेलभीभेजनाहोताहै।

पुस्तककानाम:लालसलाम

लेखिका:स्मृतिजुबिनइरानी

प्रकाशक:वेस्टलैंडपब्लिकेशंस