समानता के आधार पुरुष - श्रीरामानुजाचार्य का अमृत संदेश

श्रीरामानुजाचार्यकाअमृतसंदेश-स्वाधीनतातबऔरअधिकसार्थकहोजातीहै,जबवहउसपरंपराकेवटवृक्षकीछायाकेनीचेपुष्पित-पल्लवितहोतीहै,जहांसभीनागरिकसमानहों।वैसेभीहमारेसभीप्राचीनधर्मग्रंथसमानताकोसवरेपरिमानतेहैं।श्रीमद्भगवद्गीता(5.18)मेंभगवानश्रीकृष्णकहतेहैं:

विद्याविनयसम्पन्नेब्राह्मणोगविहस्तिनी।

शुनिचैवश्वपाकेचपंडिता:ससमदर्शिन:।।

अर्थातएकविद्वानअपनेदिव्यज्ञानकीआंखोंसेब्राह्मण,चांडाल,गाय,हाथीवकुत्तेकेआंतरिकआत्माकोसमानरूपसेदेखताहै।समानताकोईनईअवधारणानहींहै।नईअवधारणातोअसमानताहै,जोऋषियोंवसमाजसुधारकोंकेप्रयासोंकेबावजूदबार-बारअपनाकुरूपसिरउठालेतीहै।क्योंकिहमयहमहसूसनहींकरतेहैंकिजितनीभीअसमानताएंहैं,वेभौतिकशरीरकेस्तरपरहैं।ईश्वरकेदृष्टिकोणसेहमसबबराबरहैं।सभीकेभीतरअवस्थितआत्माएंपरमात्माकाहिस्साहैं।रंग,जाति,पंथयालिंगआधारितयाकोईभीअसमानतासिर्फभौतिकस्तरपरहीहै।दुर्भाग्यसे,सभीप्राणियोंकीएकताकोभूलकरमानवइनअस्थायीमतभेदोंकोमहत्वदेकरविभाजनउत्पन्नकरताहै।जबकिहमेंइससंसाररूपीसागरकोपारकरनेकेलिएकौशलविकासमेंदूसरोंकीमददकरनीहै।

समानताकायहमतलबनहींकिसबलोगएकजैसेहोजाएंगे।इसकामतलबहैकिहरकिसीकोसर्वोच्चस्तरतकअपनेविकासकाभरपूरअवसरमिलेगा।एकझाड़ीकोअच्छीझाड़ीबननेकाअवसरमिलेगा,नकिपेड़बननेका।इसीतरहएकपेड़कोअच्छापेड़बननेकामौकामिलेगा,नकिजंगलबननेका।सदियोंसेमहापुरुषोंनेसमानताकीअवधारणाकोइंसानोंकेदिलोंमेंबसानेकेलिएसंघर्षकियाहै।ऐसेहीमहापुरुषश्रीरामानुजाचार्यस्वामीथे,जिन्होंने11वींशताब्दीमेंविश्वकोसमानताकासंदेशदिया।श्रीरामानुजाचार्यश्रीवैष्णववादकेसबसेमहत्वपूर्णप्रतिपादकहैं।उनकीविरासतसिर्फयहीनहींहैकिउन्होंनेकितनेदिलोंकोछुआहै,बल्किअसलीविरासतयहहैकिवेकितनेआत्माओंमेंबदलावलाए।हमउनकेवंशजहैंऔरउनकीमशालकोआगेबढ़ानेकेलिएधन्यहैं।अपनेजीवनकेलगभगपांचदशकउन्होंनेभगवानकीसेवाकेरूपमेंसभीप्राणियोंकीसेवाकरनेमेंबिताया।ऐसाउन्होंनेसमानताकीअवधारणाकोप्रचारितकरतेहुएकिया।

श्रीरामानुजाचार्यकाजन्मलगभगएकहजारसालपहलेहुआथा,तबसमाजकेमानदंडआजकीतुलनामेंकहींअधिककठोरथे।उससमयमंदिरमेंप्रवेशकरना,मंत्रोंकाजापकरना,वेदसीखनामहिलाओं,निम्नजातियोंऔरदलितोंकेलिएवर्जितथा।शुरुआतमेंव्यवसायोंकेआधारपरजातिकीव्यवस्थाशुरूहुईथी,लेकिनदुर्भाग्यसेइसकापरिणामछुआछूतकीएकसमस्याकेरूपमेंसामनेआया।श्रीरामानुजाचार्यवसंतऋतुकीतरहचुपचापकईफूलोंकोअपनीक्षमतातकखिलनेमेंमददकरनेकेउद्देश्यसेनिकलपड़े।उन्होंनेसभीजातिकेलोगोंकेसाथअपनामंत्रसाझाकिया,जोउन्हें18बार100मीलकीपैदलयात्रकरनेकेबादअपनेगुरुसेप्राप्तहुआथा।वहअपनेमंत्रकोसाझाकरनेकेलिएलोगोंमेंसिर्फएकहीयोग्यतादेखतेथेकिवहव्यक्तिसमर्पितऔरसीखनेकेलिएउत्सुकहो।श्रीरामानुजाचार्यकेसमयमेंमंदिरहीज्ञान,रोजगारऔरसंस्कृतिकेकेंद्रहुआकरतेथे।वेहीविश्वविद्यालय,विक्रयकेंद्रऔरसभास्थलसबथे,किंतुवेसमाजकेएकविशेषवर्गऔरजातिकेनियंत्रणमेंथे।श्रीरामानुजाचार्यनेमंदिरोंमेंशेषजातिकेव्यक्तियोंकोभी50प्रतिशतकामकाजआवंटितकरकेसमावेशिताकोप्रोत्साहितकिया।तभीसेमंदिरोंमेंप्रवेशकेलिएजातिकेआधारपरकोईप्रतिबंधनहींरहगया।हालांकिभारतमेंविदेशीशासनमेंजातिवादकीवापसीफिरसेहुईऔरजातिका‘बांटोऔरराजकरो’कीचालकेरूपमेंउपयोगकियागया।

श्रीरामानुजाचार्यकाजन्मएकब्राह्मणपरिवारमेंहुआथा,लेकिनवेकांचीकेअपनेएकभक्तकाबचाहुआभोजनलेनेकेइच्छुकरहाकरतेथे,जोनिम्नजातिसेथे।स्वामीजीकहाकरतेथेकिअगरआपएकसमानलक्ष्यवालेलोगोंकेसाथआनंदकीअनुभूतिकरतेहैं,तोसामाजिकताकोईबाधानहींहै।उन्होंने‘दिव्यदेशम’कीमहिमाकेबारेमेंतमिलकविसंतोंद्वारागाएगएगीतोंकोवेदोंकेसमानहीमहत्वदिया।इनमेंसेकुछतमिलसंतनिम्नजातिकेथे,लेकिनउन्होंनेउनकेगीतोंकागायनमंदिरोंमेंअनिवार्यकरदियाथा।

वृद्धावस्थामेंश्रीरामानुजाचार्यकावेरीनदीमेंस्नानकेलिएजातेसमयएकब्राह्मणविद्वानदशरधिकासहारालियाकरतेथे,जबकिलौटतेसमयवहनिम्नजातिकेधनुरदासकेकंधेपरझुककरआयाकरतेथे।यहदर्शाताहैकिउन्होंनेहमेशाजन्मकीभौतिकस्थितिकेबजायभक्तिकोअधिकमहत्वदिया।श्रीरामानुजाचार्यनेउनकठिनदिनोंमेंमहिलाओंकेलिएअपनीचिंताजताईऔरउनकेलिएशिक्षाकेमार्गखोले।यहसबउन्होंनेहजारसालपहलेकिया,जबजागरूकतापैदाकरनेकेलिएकोईइंटरनेटमीडियाभीनहींथा।वहआचार्यजीकीव्यापकताहीथीकिउन्होंनेसभीकोशिक्षितकरनेकीआवश्यकतामहसूसकी,ताकिहरजाति,संप्रदाय,लिंगकाव्यक्तिज्ञानकाअनुभवकरसके।श्रीरामानुजाचार्यवहविशालजलाशयहैं,जहांसेसमानताकीपोषकआजकीसभीविचारधाराएंविभिन्नरूपोंमेंनिकलीहैं।

आजविश्वविभाजनऔरअलगाववादसेभराहुआहै।समाजकोविभाजितकरनेलिएअदृश्यदीवारेंबनादीगईहैं।समानतासिर्फनाराबनकररहगयाहै।हमेंयहलगताहैकिश्रीरामानुजाचार्यकीविचारधाराकेउजालेकीआजकेसमयकोअत्यंतआवश्यकताहै।उनकारूपऔरउनकीबातेंसमाजकोप्रेरितकरसकतीहैं।इसप्रेरणाकाअनुभवकरनेकेलिएउनकेजन्मकीसहस्नाब्दीसेबेहतरसमयऔरक्याहोसकताहै!इसलिए‘स्टैच्यूआफइक्वैलिटी’काउदयहुआहै।उनकीप्रतिमाकोअपनेभीतरमहसूसकरनेकेसाथसमानताकीगूंजकाअनुभवकीजिए,ताकिइसकीअनुगूंजसमानताकीतड़पबनजाए,जिसेआपसमानताकीओरलेजानेवालेकार्योमेंपरिणतकरदें।

सहस्नब्दीसमारोह

एचएचत्रिदंडीचिन्नाजीयारस्वामी

श्रीरामानुजाचार्यस्वामीने11वींशताब्दीमेंविश्वकोसमानताकासंदेशदिया।वेश्रीवैष्णववादकेसबसेमहत्वपूर्णप्रतिपादकहैं।उनकीविरासतसिर्फयहीनहींहैकिउन्होंनेकितनेदिलोंकोछुआहै,बल्किअसलीविरासततोयहहैकिवेकितनेआत्माओंमेंबदलावलाए।समानताकेलिएकिएगएश्रीरामानुजाचार्यजीकेमहत्वपूर्णकार्योकोयादकियाजानाआजकहींअधिकप्रासंगिकलगताहै,ताकिहमसबसमानताकीअनुगूंजसेअनुप्राणितहोसकें..

प्रधानमंत्रीकरेंगेभव्यप्रतिमाकाअनावरण

आगामीपांचफरवरीकोप्रधानमंत्रीनरेन्द्रमोदीशमशाबाद,हैदराबाद(तेलंगाना)मेंश्रीरामानुजाचार्यकी216फीटऊंचीभव्यप्रतिमा‘स्टैच्यूआफइक्वैलिटी’काअनावरणकरेंगे।यहबैठीहुईमुद्रामेंदुनियाकीदूसरीसबसेऊंचीप्रतिमाहै।‘पंचधातु’सेनिर्मितइसप्रतिमामेंसोने,चांदी,तांबे,पीतलऔरजस्तेकाउपयोगहुआहै।स्टैच्यूआफइक्वैलिटीकापरिसर45एकड़मेंफैलाहुआहै।परिसरमेंरहस्यवादीअलवारतमिलसंतोंकेसाहित्यमेंउल्लिखित108अलंकृतनक्काशीदारविष्णुमंदिरोंकी108प्रतिकृतियांमौजूदहैं।राष्ट्रपतिरामनाथकोविंद13फरवरीकोइसपरिसरमें120किलोसोनेसेबनेआंतरिककक्षकाअनावरणकरेंगे।आयोजनकेदौरान1035यज्ञआहुतियांदीजाएंगीतथासामूहिकमंत्रजापहोगा।यहसमारोह‘श्रीरामानुजसहस्नब्दीसमारोहम’(1000वींजयंती)केअंगकेरूपमेंआयोजितकियाजाएगा।समारोहकलसे14फरवरीतकचलेगा।उल्लेखनीयहैकिइसविशालपरियोजनाकाशिलान्यास2014मेंकियागयाथा।‘भद्रवेदी’नामक54फीटऊंचीमूलइमारतमेंवैदिकपुस्तकालयएवंअनुसंधानकेंद्र,थिएटरवशैक्षिकगैलरीभीहै।