शक्ति रूपेण संस्थिता: जंगेश्वर मंदिर, पलवल

शिवपुरीमोहल्लास्थितजंगेश्वरमंदिरकेप्रतिलोगोंकीअपारआस्थाहै।काफीप्राचीनहोनेकेकारणयहांसुबह-शामश्रद्धालुओंतांतालगारहताहै।सोमवार,मंगलवारऔरशनिवारकोभीमंदिरमेंपांवरखनेकीभीजगहनहींमिलती।मंदिरमेंसुबहशाम-पूजाअर्चनावआरतीहोतीहै।नवरात्रमेंमंदिरमेंमत्थाटेकनेकेबादहीश्रद्धालुव्रतकाशुभारंभकरतेहैं।मंदिरमेंशहरकेकईअन्यमोहल्लोंसेभीलोगदर्शनोंकेलिएआतेहैं।

जंगेश्वरमंदिरपलवलकाइतिहासपुरानाहै।सदियोंपूर्वयहांशिवमंदिरस्थापितथा।किवदंतीकेअनुसारमुगलकालमेंविधर्मियोंनेइसमंदिरकोतोड़दियाथा।अंग्रेजोंकेशासनकालमेंवीर¨हदुओंनेयहांफिरसेमंदिरकोस्थापितकरनेकेलिएसंघर्षकिया।इसपरदोसंप्रदायोंकेबीचजबरदस्तजंगहुई,बतायाजाताहैकितबइसस्थलकीगहरीखुदाईकरनेकाफैसलाहुआ।खुदाईमेंदूधकीधारनिकलीऔरफिरगंगाजल।इसपरदूसरेपक्षकेलोगमानगएकियहांमंदिरहुआकरताथा।इसतरह1802मेंयहांफिरसेमंदिरकीस्थापनाकाकामशुरूहुआ।चूंकिमंदिरकेलिएजंगलड़ीगई,इसीलिएमंदिरकानामजंगेश्वरमंदिरपड़ा।बतायाजाताहैकिखुदाईमेंशिव¨लगभीनिकलाऔरवहीशिव¨लगआजभीमंदिरमेंस्थापितहै।इसपरफावड़ेकेनिशानभीबताएजातेहैं।मंदिरमेंभगवानशिवपरिवारकेअलावाप्रभुरामवसीता,राधा-कृष्ण,लक्ष्मीनारायणऔरअन्यदेवी-देवताओंकीप्रतिमाएंहैं।

जंगेश्वरमंदिरकीस्थापत्यकलाअन्यमंदिरोंकीतरहहीहै।इसकेशुरूआतीनिर्माणमेंकखैयाकिस्मकीईंटोंवचूनेकाप्रयोगकियागयाहै,जबकिबादमेंबड़ीईंटोंवसीमेंटकाप्रयोगहुआ।मंदिरकामुख्यद्वारपूर्वकीतरफहै,जबकिअन्यदोदरवाजेपश्चिमवदक्षिणदिशाकीतरफभीखुलतेहैं।मंदिरमेंसुबहनित्यआरतीवपूजाअर्चनाहोतीहै।दिनमेंभीभजनवकीर्तनहोतेरहतेहैं।नवरात्रमेंमातारानीकीकथातथासमय-समयपररामकथा,शिवपुराणकथा,अखंडरामायणपाठवमाताकेजागरणहोतेरहतेहैं।बाहरसेआनेवालेश्रद्धालुओंकेठहरनेऔरखाने-पीनेकाभीइंतजामहोताहै।

ऐसेपहुंचेमंदिर

जंगेश्वरमंदिरपलवलशहरमेंशिवपुरीमोहल्लामेंस्थितहै।राष्ट्रीयराजमार्गसेओल्डजीटीरोडसेकमेटीचौकपहुंचकरऔरमुख्यबाजारसेहोतेहुएऔरबसअड्डाचौकसेमीनारगेटजानेवालेमार्गपरजाकरभीइसमंदिरतकश्रद्धालुपहुंचसकतेहैं।

जंगेश्वरमंदिरऐतिहासिकहैऔरइसकीलोगोंमेंबड़ीमान्यताहै।ऐसीमान्यताहैकिजोलोगव्रतरखकरसच्चेमनसेअराधनाकरतेहैं,भगवानउनकीमनोकामनापूरीकरतेहैं।

-राजेंद्रीदेवी,श्रद्धालु।

नवरात्रमेंसुबह-शामभक्तोंकीभीड़लगीरहतीहै।इसलिएप्रतिदिनसफाईकाविशेषध्यानरखाजाताहै।श्रद्धालुओंकेलिएनियमितकथावआरतीकाविशेषइंतजामकियाजाताहै।

-रामकुमार,पुजारी।