साफ-सुथरा चिंतन ही जीवन को बनाता सुखी

संवादसहयोगी,डुमरी:आजकेयुगमेंएकबंदरमहावीरकाभीहोनाचाहिए।येबातेंआचार्यप्रसन्नसागरजीमहाराजनेशुक्रवारकोपारसनाथजीनेंद्रमहाअर्चनामहोत्सवमेंकही।कहाकिछोटासातूकितनेबड़ेअरमानहैतेरे।मिट्टीकातूसोनेकेसबसामानहैतेरे।मिट्टीकीकायामिट्टीमेंजिसदिनसमाजाएगीनसोनाकामआएगानचांदीकामआएगी।गांधीजीकेतीनबंदरोंकेबारेमेंतुमनेसुनाहोगा।गांधीजीकेतीनबंदरजगजाहिरहैं।गांधीजीसारेदेशकोतीनबंदरोंकेप्रतीकस्वरूपसंदेशदेकरगएहै।बुरामतदेखो,बुरामतसुनोऔरबुरामतकहो।येतीनबंदरगांधीजीकेहै्रं।लेकिनभगवानमहावीरनेइनमेंएकबंदरऔरजोड़ाहै,बुरामतसोचो।मैंसमझताहूंगांधीजीसेएकभूलहोगई।गांधीजीभीतोआखिरइंसानहीथे।इंसानसेभूलहोनास्वभाविकहै।ऐसातोकभीनहींहोताकिजिदगीमेंकभीकोईगिरेहीन।जोचलतेहैं।वहगिरतेभीहैं।जीवनमेंगिरतेभीहैं,उठतेभीहैं।हारतेभीहैंऔरजीततेभीहैं।लेकिनशाननतोगिरनेमेंहैनहारनेमेंहैबल्किशानगिरकरतुरंतउठखड़ेहोनेमेंहै।गलतीहोनेपरउसेस्वीकारकरलेनेऔरसुधारलेनेमेंहै।यहमहत्वपूर्णसंदेशहै।आजइंसानकीसोचबिगड़गईहै।हरसमयवहदूसरोंकेविषयमेंअशुभहीसोचताहै।इससेदूसरोंकाअशुभतोनहींहोतापरस्वयंकाबुराजरूरहोताहै।आदमीकाबुरादेखना,बुरासुननाऔरबुराकहनाउसकेबुरेसोचनेपरटिकाहै।आदमीअपनेविचारोंऔरभावनाओंसेदरिद्रहोगयाहै।दूसरोंकेप्रतिउदारविचारजीवनसमृद्धिकेप्रतीकहोतेहैं।आजकेपरिवेशमेंचौथेबंदरकाहोनाबहुतजरूरीहोगयाहै।जोहमेशासावधानरखेऔरकहेअपनाचितनअपनीसोचसाफसुथरावहअच्छारखें,क्योंकिसाफ-सुथराचितनहीजीवनकोसुखीवस्वच्छबनाताहै.