सांस्कृतिक क्षरण का दुष्परिणाम हैं दुष्कर्म, घटनाओं को रोकने के लिए लोगों की मानसिकता में लाना होगा परिवर्तन

[निरंजनकुमार]।हाथरसमेंएकयुवतीकेसाथहुईजघन्यहिंसासेजनमानसकाउद्वेलितहोनास्वाभाविकहै।उसकेसाथदुष्कर्मकीपुष्टिनकरनेवालीफोरेंसिकजांचकोलेकरसवालहैं।सचजोभीहो,यहएककड़वीहकीकतहैकिबीतेएक-डेढ़दशकसेदेशमेंदुष्कर्मकेमामलेबढ़तेजारहेहैं।इनदिनोंभीदेशकेविभिन्नहिस्सोंसेदुष्कर्मकेमामलेसामनेआरहेहैं।स्त्रियोंकेसाथहिंसा,जिसकीचरमपरिणतिदुष्कर्मकेरूपमेंहोतीहै,मुख्यरूपसेसामाजिक,मनोवैज्ञानिकऔरसांस्कृतिकक्षरणसेजुड़ीहुईहै।क्षरणकीइनपरिस्थितियोंसेपूरादेशग्रसितहोरहाहै।इसलिएदुष्कर्मजैसीघटनाएंकेवलएकक्षेत्रयावर्गतकसीमितनहीं।वास्तवमेंअपनीकमजोरआर्थिक-सामाजिकस्थितिकेकारणनिम्नवर्गयाजातिकीस्त्रियांइसकीसबसेअधिकशिकारहोतीहैं।

देशकेलगभगसभीहिस्सोंसेदुष्कर्मयायौनउत्पीड़नकीघटनाएंसुननेमेंआतीरहीहैं।ऐसेमेंदेशकीआधीआबादीकीइसखतरनाकसमस्याकेसमाधानकेलिएइनघटनाओंकेपीछेकेसमाजशास्त्रऔरमनोविज्ञानकोसमझनाजरूरीहै।समाज-मनोविज्ञानियोंकेअनुसारस्त्रियोंकेसाथहिंसा-दुष्कर्मकीसबसेबड़ीवजहपुरुषवर्चस्ववादीसोचहै,जिसमेंस्त्रियोंकोहेयदृष्टिसेदेखनेकेसाथहीउन्हेंउपभोगकीवस्तुमानाजाताहै।इसीलिएकईबाररंजिशमेंभीऔरतोंकोनिशानाबनायाजाताहै।

सामाजिकदबावऔरडरकमहोनेसेभीपाशविकप्रवृत्तिहैबढ़ी

यहस्थितिकेवलएकमजहब,जाति,वर्गऔरक्षेत्रतकसीमितनहींहै।दुष्कर्मकेलिएएकअन्यस्थितिजोजिम्मेदारहै,वहहैसामुदायिकताकीभावनाकाउत्तरोत्तरकमहोतेजाना।एकसमयहमारासमाज,मोहल्लेऔरगांव-कस्बेएकविस्तृतपरिवारकीतरहहोतेथे,जहांलोगअपनेसुख-दुखसाझाकरलियाकरतेथे।मूल्यहीनभौतिकतावादीआधुनिकता,अनियंत्रितनगरीकरण,एकाकीपन,चरमवैयक्तिकताऔरआगेबढ़नेकीहोड़नेसामूहिकताकीइसभावनाकोकमजोरकियाहै।लोगोंमेंसामाजिकदबावऔरडरकमहोनेसेभीपाशविकप्रवृत्तिबढ़ीहै।