रुद्रावर्त में गोमती नदी में समां जाते हैं बेलपत्र

सीतापुर:अट्ठासीहजारऋषियोंकीतपोस्थलीनैमिषारण्यमेंगोमतीनदीतटपररुद्रावर्ततीर्थअद्भुतस्थलहै।इसतीर्थमेंपरआस्थाकेसाथहीविज्ञानभीहरकिसीकोप्रभावितकरताहै।इसस्थलपरगोमतीनदीमेंबेलपत्रवफलसमाजातेहैं।इसघटनाकोश्रद्धालुआस्थातोवैज्ञानिकइसेगोमतीकीखासियतमानतेहैं।पिछलेकुछसमयसेयहस्थलश्रद्धालुओंकाध्यानअपनीओरखींचरहाहै।आस्थाऔरविज्ञानकेइसअनूठेसंगमपरदेशकेविभिन्नहिस्सोंसेश्रद्धालुआनेलगेहैं।उप्रसरकारनेइसतीर्थकेविकासकेलिएकाफीप्रयासकिएहैं।

रुद्रावर्तकापौराणिकमहत्व

नैमिषारण्यसेपांचकिमीकीदूरीपरगोमतीनदीकेतटपररुद्रावर्तधामहै।मान्यताहैकियहभगवानशिवकाअनूठास्थलहै।बतातेहैंकिगोमतीनदीकेअंदरभगवानशिवकायहअलगहीस्वरूपहै।इसस्थलपरभक्तभगवानशिवकाश्रद्धाभावसेध्यानकरनदीमेंबेलपत्र,दूध,धतूरावफलआदिअर्पितकरतेहैं।मान्यताहैकिमनसेअर्पितबेलपत्रवफलसीधेजलमेंजाकरभगवानशिवकोप्राप्तहोजाताहै।यहीनहीं,अगरभक्तपांचफलअर्पितकरतेहैंतोएकयादोफलप्रसादकेरूपमेंऊपरआजातेहैं।शेषजलमेंसमाजातेहैं।क्याकहतेहैंवैज्ञानिक

वैज्ञानिकोंकीमानेंतोवैज्ञानिकमायनोंमेंयहगोमतीनदीकीखासियतहै।यहनदीकईबारअपनारास्ताबदलनेकेलिएभीजानीजातीहै।दरअसल,गोमतीमैदानसेनिकलीहुईनदीहै।बारिशकेमौसमकोछोड़दियाजाएतोइसमेंभूजलहीअधिकआताहै।कईसहयोगीनदियांभीइसेरी-चार्जकरतीहैं।वैज्ञानिकबतातेहैंकिइसस्थलकेनजदीकभीकईस्त्रोतहैं,जहांसेपानीकेबुलबुलेनिकलाकरतेहैं।हवाकेइसीदबावकेसंपर्कमेंआनेकेबादबेलपत्रजलकेअंदरसमाजातेहैं।

रुद्रावर्तकाहुआविकास

रुद्रावर्तमेंश्रद्धालुओंकेरुझानकोध्यानमेंरखतेहुएमुख्यमंत्रीयोगीआदित्यनाथनेनैमिषारण्यकेविकासकेलिएकीघोषणाओंमेंइसस्थलकोभीतरजीहदीहै।रुद्रावर्तमेंभीकाफीकामहुएहैं।