रोजगार के लिए गांव छोड़ने पर लोग मजबूर

संतकबीरनगर:गरीबीकेसाथ-साथबेरोजगारीनेयुवाओंकोगांवछोड़करपरदेशीबननेपरमजबूरकरदियाहै।युवापीढ़ीकोअबअपनागांवनहींशहररासआरहाहै,यहांअबउन्हेंकोईरोजगारनहींमिलरहा।अधिकतरगांवोंमेंअबबुजुर्गहीदिखाईदेतेहैं।

बखिरानिवासीमुंशीकेदोबेटेहैं।पहलेपुश्तैनीकामथा,अबउनकेबच्चेपिछलेदससालसेबाहररहकरकामकररहेहैं।जवाहिरकेऊपरदससदस्योंकाभारहै।खेतीकेसीजनमेंआसपासकाममिलजाताहै।तीनबेटेहैं,उनकेसाथकामकरतेथे,अबतीनोंकामकीतलाशमेंबाहरचलेगएहैं।परमात्माशुक्लघरपरपोतेकेसाथरहतेहैं।बेटाबाहरनौकरीकरताहै।यहहालकिसीएकगांवकानहीं,सभीगांवोंकाहै।अब्दुलअजीजपेशेसेबुनकरहैंलेकिनअबयहधंधामंहगाईकेचलतेनाममात्रहीरहगया।वहभीमजदूरीकोविवशहैं।उन्होंनेकहाकिपुश्तैनीधंधाखत्महोनेसेबेकारीबढ़गयी।पूर्वमेंतेली,बुनकर,धुनिया,कुम्हार,लोहारकोगांवमेंहीकाममिलजाताथा।

ग्रामीणोंनेकहाकिमनरेगाकेतहतसरकारलोगोंकोरोजगारदेनेकीबातकहरहीथी,वहभीप्रधानऔरजिम्मेदारअधिकारियोंकेरहमोकरमपरनिर्भरहै।मजदूरीकरनेकेबादभीपैसानहींमिलरहा।इससेअच्छाहैकिबाहरजाकरमेहनतमजदूरीकरकेपरिवारकाभरणपोषणकियाजाय।