रेणु जी की रचनाओं में लोक जीवन की व्‍यापक अभिव्‍यक्ति, यथार्थ के साथ धड़कता है ग्रामीण जीवन

जागरणसंवाददाता,औरंगाबाद।फणीश्‍वरनाथरेणुकीजन्मशताब्दीकेआलोकमेंसमकालीनजवाबदेहीपरिवार,बतकहीएवंहिंदीसाहित्यसम्मेलनकेसंयुक्ततत्वावधानमेंस्थानीयशनिवारकोआइएमएहाॅलमेंजयंतीसमारोहकाआयोजनकियागया।इसमें'इस यांत्रिकयुगमेंभीरेणुकीप्रासंगिकता' विषयपरसंगोष्ठीआयोजितकीगई।इससंगोष्ठीकीअध्यक्षतानगरकेप्रसिद्धचिकित्सकडॉ.रामाशीषसिंहनेकी।संचालनकियाप्रो.संजीवरंजनने।

रेणुजीकीहररचनाहैअमर

जयप्रकाशसिंहनेकहाकिरेणुकीरचनाओंमेंरूप,रंग,रस,गंध,ध्वनिएवंस्वादकेसुंदरसंयोजनकासाक्षात्कारहोताहै।डॉ.सुरेंद्रप्रसादमिश्रनेउनकीकहानी'तीसरीकसम'पंचलाइट,लालपानकीबेगमएवंआंचलिकउपन्यास'मैलाआंचल'कासंदर्भदिया।कहाकिआंचलिकताकीमिठाससेलबरेजग्राम्य-बोधसंबंधीतेवररेणुकोगातेहुएगद्यकेलेखककेरूपमेंप्रतिस्थापितकरतेहैं।अपनेसंबोधनमेंप्रो.रामाधारसिंहनेकहाकिफणीश्वरनाथरेणुनेपरिवेशकीखूबियोंएवंखामियोंकोअत्यंतखरेपन,सहजताएवंसरलतासेरेखांकितकियाहै।उनकीरचनाएंआजभीप्रासंगिकहैं।

रेणुजीनेआंचलिकताकोदीसाहित्‍यमेंजगह

बतौरमुख्यवक्ताप्रो.सिद्धेश्‍वरप्रसादसिंहनेकहाकिरेणुकेसाहित्यमेंलोकजीवनकीजोव्यापकअभिव्यक्तिमिलीहै,उसमेंकेवलसामाजिकयथार्थकीहीनहीं,ग्रामीणजीवनकीधड़कनेंभीबोलतीहैं।अध्यक्षीयउद्बोधनमेंडॉरामाशीषसिंहनेरेणुकोएकऐसेकथाकारकेरूपमेंचित्रितकिया,जहां'धूलधानीधूसर'मेंजीवनकीधड़कनेंगहरेतकपैवस्तहैं।उनकेस्पंदनकोसहजहीमहसूसकियाजासकताहै।साहित्यकारडा.हेरंबमिश्र,महाराणाप्रतापसेवासंस्थानकेपूर्वसचिवअनिलकुमारसिंह,केडीपांडेय,शिक्षकउज्जवलरंजन,कविधनंजयजयपुरीएवंलवकुशप्रसादसिंहनेभीसंगोष्ठीकोसंबोधितकिया।इसमौकेपरपुरुषोत्तमपाठक,चक्रपाणिजी,शिक्षकचंदनकुमार,शिक्षकश्रवणकुमारसिंह,बैजनाथसिंहसहितनेअपनीसक्रियसहभागितानिभाई।अंतमेंआगतविद्वानअतिथियोंकेप्रतिकविधनंजयजयपुरीनेआभारव्यक्तकिए।