पर्यावरण के लिए ऐसा जुनून कि शरीर भी कर दिया दान

सुनीलजांगड़ा,कैथल:पर्यावरणबचानेकेलिएसरकारऔरआमनागरिकभीमिलकरकामकररहेहैं।ढांडनिवासीसंस्कृतअध्यापकराकेशकुमारकोकैथलकाट्री-मैनकहाजाताहै।इससमयसंगरौलीकेराजकीयस्कूलमेंकार्यरतहैं।राकेशकुमारकरीब22सालोंसेसार्वजनिकस्थानोंपरपौधेलगारहेहैं।हरसालकरीब700पौधेलगातेहैंऔरदूसरोंकोबांटतेहैं।

उन्होंनेबतायाकिसंस्कारमेंलकड़ीनाजलानीपड़े,इसलिएउन्होंनेअपनाऔरअपनीपत्नीऋतुकाशरीरचंडीगढ़पीजीआइमेंदानकरनेकेलिएफार्मभराहुआहै।

वेअपनेघरकीछतऔरआंगनमेंहीपौधेतैयारकरतेहैंऔरकरीबदोघंटेपौधोंकीदेखभालमेंलगातेहैं।बसस्टैंड,रेलवेस्टेशन,स्कूल,कॉलेज,मंदिर,अस्पतालऔरगलियोंमेंहरवर्षपौधेलगारहेहैं।

बच्चोंसेलगवातेहैंपौधे

राकेशकुमारनेबतायाकिवेस्कूलमेंगर्मियोंकीछुट्टियोंमेंबच्चोंकोबीजसेपौधेतैयारकरनेकाहोमवर्कदेतेहैं।पहलेउन्हेंबीजसेपौधातैयारकरनेकीविधिबतातेहैं।स्कूलमेंबच्चोंकेअभिभावकोंवग्रामीणोंकोनिशुल्कपौधेवितरितकरतेहैं।समय-समयपरछात्रोंकीसहायतासेपर्यावरणबचानेऔरपौधेलगानेकोलेकरजागरूकतारैलीभीनिकालतेहैं।कुछपौधेवेसरकारीनर्सरीसेलेतेहैंऔरकुछघरमेंहीतैयारकरतेहैं।

इसघटनासेबनायाअभियान

राकेशकुमारनेबतायाकिकरीब22सालपहलेउन्होंनेफानोंमेंआगलगीदेखीऔरउसआगसेफानोंकेसाथआस-पासकेपौधेभीजलरहेथे।धुंएसेपर्यावरणभीदूषितहोरहाथा।उसीदिनसेउन्होंनेपर्यावरणकोबचानेऔरअधिकसेअधिकपौधेलगानेकानिश्चयकरलियाथा।