पर्यावरण बचाने को महाराष्ट्र से हिमालय तक 'मोगली सफर'

जगदीपशुक्ल,बाराबंकी:

पेड़ोंकेअंधाधुंधकटानसेपर्यावरणपरमंडरातामुंबईकेमैत्राकुलकेसिद्धार्थरागिणीमहेशगणाईकेलंबेसफरकीप्रेरणाबनगई।महज23वर्षकीउम्रमेंमहाराष्ट्रकेसह्याद्रीसेहिमालयतकपदयात्राकेमाध्यमसेलोगोंकोजागरूककरनेकासंकल्पलेलिया।करीब55दिनपहलेमुंबईसेशुरूहुईउनकीपदयात्रामध्यप्रदेशऔरप्रदेशकेविभिन्नजिलोंसेहोतेहुएबाराबंकीपहुंचचुकीहै।इसदौरानवहपर्यावरणकामहत्वबतातेहुएलोगोंको'एकपौधाइंसानियतकेनाम'रोपनेकेलिएप्रेरितभीकररहेहैं।इसयात्राकानामउन्होंने'मोगलीसफर'रखाहै।अपनीयात्राकोमोगलीसेप्रेरितबतातेहुएकहाकिउसकाचरित्रजंगलऔरलोगोंकोजोड़ताहै।इसलिएमेरेकार्योंकोदेखतेहुएलोगमुझेमोगलीनामसेपुकारनेभीलगेहैं।पर्यावरणसंरक्षणकोकियाप्रेरित

सिद्धार्थनेबुधवारकोअसेनीमोड़केपाससेअपनीयात्राकीशुरुआतकी।उन्होंनेमोहम्मदपुरतीर्थमेंमुकेशअवस्थी,लालपुरमोड़परएकरेस्टोरेंटमेंअरुणत्रिपाठीऔरकोटवासड़कमेंएमएलसाहूसेपर्यावरणसंरक्षणकोलेकरचर्चाकरतेहुएएकपौधारोपनेकासंकल्पदिलाया।वहबतातेहैंकिप्रतिदिनऔसतन35सेचालीसकिलोमीटरकीयात्राकरलेतेहैं।वहअपनी55दिनकीयात्रामें26स्थानोंपरपौधेरोपचुकेहैं।महोबाजिलेसेप्रदेशमेंप्रवेशकरनेवालेसिद्धार्थनेअयोध्या,बस्तीऔरनेपालमेंहिमालयकीचोटियोंतकजानेकीबातकहतेहैं।टूटामिथक,बहुतप्यारकरतेहैंयूपीवाले

वनस्पतिविज्ञानसेबीएससीकेअंतिमवर्षकेछात्रसिद्धार्थबतातेहैंकिजबमैंनेयात्राशुरूकीतोलोगोंनेयूपीकेलोगोंकेप्रतिनकारात्मकबातेंबतातेहुएउनसेसावधानरहनेकीसलाहदीथी।लेकिन,यात्राकेदौरानयूपीमेंमुझेसर्वाधिकप्यारमिलरहाहै।लोगोंनेजोबातेंबताईंथींवहगलतसाबितहुईहै।इसलिएमैंकहनाचाहूंगाकहीसुनीबातोंपरयकीनकरनेकेबजायहकीकतसेरूबरूहोनाचाहिए।प्लास्टिककोना

वहबतातेहैंकिसफरकेदौरानप्लास्टिककाउपयोगनहींकररहेहैं।खाने-पीनेकासामानभीबर्तन,पत्तल,दोनेमेंहीस्वीकारकरतेहैं।उनकाकहनाहैकिप्लास्टिकनेपर्यावरणकोबड़ानुकसानपहुंचायाहै।इसलिएइसकेप्रयोगसेबचनाचाहिए।पेड़नकाटनेपड़ेंइसलिएवहपर्चेआदिकेबजायमौखिकप्रचारहीकरतेहैं।