पृथ्वी पर हैं तीन रत्न, जल-अन्न व सुभाषित

जागरणसंवाददाता,औरैया:जलमानवजीवनकासर्वाधिकमहत्वपूर्णअंगहै।कहाजाताहैकि'पृथिव्यांत्रीणिरत्नानिजलम्अन्नम्सुभाषितम्।मूढ़ै:पाषाणखण्डेषुरत्नसंज्ञाविधीयते।'इसकातात्पर्यपृथ्वीपरतीनहीरत्नहैंजल,अन्नवसुभाषित।अज्ञानतावशलोगपत्थरकेटुकड़ोंकोरत्नोंकीसंज्ञादेतेहैं।यहविचारजनताइंटरकॉलेजअजीतमलकेसंस्कृतप्रवक्ताडॉ.शशिशेखरनेमिश्रव्यक्तकी।उनकामाननाहैकिपर्यावरणसंरक्षणकेलिएजलकीप्रत्येकबूंदकासदुपयोगअत्यंतआवश्यकहै।वर्तमानसमयमेंहमारेविभिन्नउपकरणोंमेंअनावश्यकरूपसेजलकीबर्बादीहोतीहैहमेंहमयदिकेवलइसीबर्बादीकोरोकलेऔरउसजलकाप्रयोगविभिन्नपौधोंकोसींचनेमेंकरें।इससेएकस्वस्थपर्यावरणकानिर्माणहोगा।उदाहरणस्वरूपआरओमेंजलशोधनप्रक्रियामेंएकबड़ाहिस्साव्यर्थबहादियाजाताहै।इसेयदिहमबाल्टियोंमेंभरकररखलेंतोइससेहमलोगनकेवलफलऔरसब्जियांधोसकतेहैं।बल्किउसकेपश्चातइसजलकोअपनेपौधोंमेंभीडालसकतेहैं।जिससेवेनिरंतरहरे-भरेरहतेहैं।यहदेखागयाहैकिघरकेऊपररखीपानीकीटंकीसेनिकलनेवालाअतिरिक्तपानीपाइपसेहोकरबड़ीमात्रामेंबर्बादहोताहै।इसेहमपौधोंतकपहुंचादेंतोमात्रइतनेजलसेभीहमअपनेवातावरणकोहरा-भरारखसकतेहैं।डॉ.मिश्रनेअपनेविद्यालयकेशिक्षकआवासमेंरहतेहुएइनविचारोंकोकार्यरूपमेंभीपरिणतकियाहै।उनकेआवासपरनगरपंचायतकीपाइपलाइनसेजलापूर्तिहोतीहै।उन्होंनेअपनीपानीकीटंकीसेअतिरिक्तबहाववालेपाइपसेपौधोंतकपानीपहुंचानेकीव्यवस्थाकररखीहै।जिसकेकारणउनकेआंगनमेंअनेकप्रकारकेवृक्षएवंपौधेशोभायमानहोतेहैं।इनमेंप्रमुखरूपसेअमरूद,पांकर,शहतूत,गुड़हल,करीपत्ता,रातकीरानी,मालती,चमेली,नींबूआदिप्रमुखहैं।छोटेपौधोंमेंभीतुलसी,मोगरा,गुलाब,क्रोटन,नागफनी(स्नेकप्लांट)प्रमुखरूपसेविद्यमानहैं।घरकेअंदरभीआरओकेव्यर्थजलकाउपयोगपौधोंकोसींचनेएवंफलोंवसब्जियोंकोधुलनेमेंकियाजाताहै।इसप्रकारजलसंसाधनकासमुचितउपयोगकरतेहुएडॉ.मिश्रपर्यावरणसंरक्षणमेंभीअपनायोगदानदेरहेहैं।वहअपनेछात्रोंकोभीसदैवजलसंरक्षणकेलिएप्रेरितकरतेरहतेहैं।समयसमयपरविभिन्नप्रकारकीप्रतियोगिताओंकेआयोजनद्वाराभीछात्रोंएवंछात्राओंकेमध्यजागरूकताफैलानेकासततप्रयासकरतेरहतेहैं।