'परंपरा की ध्वज वाहक हैं होली गायन की पुस्तकें'

संवादसहयोगी,चम्पावत:चंदवंशीयराजाओंकीराजधानीरहीचम्पावतकोसांस्कृतिकविरासतकाउद्गमस्थलकहाजाताहै।कुमाऊंकीउत्पत्तिकेसाथहीयहांपर्वोऔरसंस्कृतिकीनींवपड़ी।भलेहीवर्तमानमेंसांस्कृतिकसमागमकाकारवांथमगयाहो,परंतुयहांलोकपरंपराओंकोआजभीसंजीवनीमिलरहीहै।फाल्गुनकेमाहमेंऋतुराजबसंतकेआगमनकेमौकेपरहोनेवालीहोलीकाअंदाजहीनिरालाहै।मनमेंउल्लासऔरतरंगकीनईऊर्जापैदाहोजातीहै।

कालीकुमाऊंकेलोगोंकेपोर-पोरमेंहोलीरचीऔरबसीहै।बड़ेबुर्जुगोंकोजहांखड़ीहोलीकेसाथहीसैकड़ोंबैठकीहोलियांकंठस्थहैं।वहीं,नईपीढ़ीकैसेटऔरकिताबोंकेजरिएयहपरंपराआगेबढ़ारहीहै।इनमेंहोलीपुस्तकोंकाअलगवजूदहै।संकलनकर्ताओंनेइनकिताबोंमेंपुरानीहोलियोंकोविशेषरुपसेसंग्रहितकियाहै।जिसमेंश्रृंगार,भक्ति,वियोग,हंसी,ठिठोली,छेड़छाड़केरसोंसेहोलियांलबरेजहैं।होलीपर्वकेचलतेइनकिताबोंकीबिक्रीकाभीग्राफइनदिनोंबढ़गयाहै।रंगकर्मीरमेशपुनेठाद्वारासंग्रहित'फागुनकीफुहार'में85खड़ीहोलियांहैंऔरइसकामूल्य30रुपएहै।शिवराजभंडारीऔरमदनसिंहअध्यापकद्वारारचित'खड़ीहोलीसंग्रह'भीखूबबिकरहाहै।इसमें40होलियांहैंऔरइसकामूल्य12रुपएहै।इसकेअलावा'छायीरैतलमलदेश'नामकपुस्तककेरचयिताकुलदीपउप्रेतीहैं।150रुपएकीइसकिताबमेंसैकड़ोंवेदांतीहोलियोंकेसाथहीबैठकीहोलीकाभीसंग्रहहै।इसकेअलावाविनोदबंसलद्वारालिखितहोलीसरगम,रमेशपुनेठाकीबैठकीहोलीकीकिताबेंभीखूबबिकरहीहैं।बहरहाल,चम्पावतजनपदमेंहोलीकीविरासतकोआगेबढ़ानेमेंपुस्तकोंकायोगदानभीकमनहींहै।==========

आधादर्जनपुस्तकोंकीखासीडिमांड

वर्तमानमेंचम्पावतमेंआधादर्जनपुस्तकोंकीखासीडिमांडहै।'राजाबलिकेद्वारमचीहोली'पुस्तककासंकलनमदनसिंहमहरनेकियाहै।जिसमेंलालसिंहमहरऔरराजेंद्रगहतोड़ीसहयोगीहैं।इसपुस्तकमें81खड़ीहोलीसंग्रहितहैं।इसकामूल्य40रुपएहै।इसपुस्तककीखासबातयहहैकिइसमेंहोलियोंकोप्रतिदिनगायनकेहिसाबसेसंग्रहितकियागयाहै।