पिता की बीमारी से मिला सबक, बांट रहे योग का ज्ञान

गोंडा:जिसउम्रमेंजीवनमेंअनेकसपनेहोतेहैं,उम्मीदेंबढ़तीहैं।कुछभीकरगुजरनेकेजज्बेकासंचारहोताहै,उसमें17वर्षीयसुधांशुद्विवेदीकोएकऐसासबकमिला,जिससेउसकीजिदगीकेरास्तेअलगहोगए।इंटरमीडिएटपासकरकेवहनिकलेहीथेकिपिताप्रेमशंकरद्विवेदीबीमारपड़गए।वहब्लडप्रेशरकीसमस्यासेग्रसितथे।काफीइलाजकराया।बादमेंलोगोंनेयोगकीसलाहदी।योगसेउन्हेंआराममिलातोसुधांशुकीभीसोचबदलगई।भविष्यमेंडॉक्टरबननेकाहसीनख्वाबदेखनेवालेसुधांशुबसइसीकेबादयोगकाज्ञानबांटनेमेंलगगए।आजउनकीपहचानयोगगुरुकेतौरपरहोतीहै।

शहरकेबड़गांवनिवासीदुग्धविकासविभागमेंकार्यरतप्रेमशंकरद्विवेदीकेदोबेटेहैं।एकबेटावैज्ञानिकहै।दूसरेनंबरकेसुधांशुकोवहडॉक्टरबनानाचाहरहेथे।मांप्रमिलाकीभीइच्छाथीकिबेटेकीकोईसरकारीनौकरीलगजाए।लेकिन,पिताकीबीमारीकेबादउसकीदिशाबदलजाएगी,यहकिसीनेसोचाभीनहींहोगा।योगकीपढ़ाईदेवसंस्कृतिविश्वविद्यालयहरिद्धारसेकरनेकेबादउन्होंनेपतंजलियोगपीठकेमाध्यमसेलोगोंकोसेहतकामंत्रदेनेकाकामशुरूकियाहै।इनसेट

-शहरहोयागांव,हरजगहकैंपलगाकरलोगोंकोयोगकाज्ञानबांटरहेहैं।अबतकवह192पांचदिवसीयनिश्शुल्कयोगशिविरलगाचुकेहैं।500सेअधिकस्कूलोंमेंशिविरलगाचुकेहैं।एकलाख18हजारलोगोंकोजानकारीदेनेकेसाथहीइनदिनोंवहपुलिसअफसरोंवकर्मियोंकोसेहतमंदहोनेकाराजबतारहेहैं।इनसेट

22वर्षकीआयुपूरीकरचुकेसुधांशुकीअलगपहचानहै।वहसुबह-सबेरेबाइकसेनिकलपड़तेहैं।अगरकहींपरकोईकार्यक्रमतयहैतोवहांपर,अन्यथाजहांभीलोगमिलगए,वहींपरयोगकीक्लासशुरूकरदेतेहैं।इनसेट

स्वस्थरहनेकेलिएयोगकाबड़ामहत्वहै।योगकेप्रचारप्रसारमेंसुधांशुकाप्रयाससराहनीयहै।वहयोगकेजरिएलोगोंकोसेहतकेप्रतिजागरूककररहेहैं।

-डॉ.सतीशकुमार,अपरनिदेशकस्वास्थ्यदेवीपाटनमंडल