पीपरपांती का भारत माता मेला : लोकतांत्रिक संस्कृति व मूल्यों का अनूठा संगम

खगड़िया।गोगरीजमालपुरबाजारमेंगणतंत्रदिवसकोलेकरबच्चोंसेलेकरसरकारीकार्यालयोंतकमेंप्रयोगकिएजानेवालेतिरंगेबिकनेलगेहैं।लेकिन,गोगरीप्रखंडकेपीपरपांतीगांवकेलोगगणतंत्रदिवसकीतैयारीलगभगएकमाहपहलेसेशुरूकरदेतेहैं।दरअसल,गणतंत्रदिवसकेअवसरयहांकेलोगभारतमातामेलालगाकरआनेवालीपीढ़ीकोगणतंत्रकाव्यापकअर्थपूजापाठ,गीत-संगीत,नृत्य,नाटकआदिकेमाध्यमसेसमझातेहै।उल्लेखनीयहैकि

यहांकेलोगोंनेदेवी-देवताकीतरहभारतमातामंदिरकानिर्माणकरभारतमाताकीपूजा-अर्चनालगभगपचाससालसेकरतेरहेहैं।हरगणतंत्रदिवसपरयहांभारतमाताकीप्रतिमास्थापितकरपूजाकेसाथमेलालगातेहैं।इसमाध्यमसेलोकतंत्रकेअधिकारऔरकर्तव्यकेज्ञानसेअपनेबच्चोंकोलोकतंत्रकेसच्चेसिपाहीकेरूपमेंतैयारकरतेहैं।मेलाकेदौरानआयोजितसांस्कृतिककार्यक्रमवनाटकोंकामंचनभीलोकतंत्रपरआधारितहोतेहैं।जिससेलोगोंकोलोकतंत्रकीमहत्तासमझमेंआसके।कुलमिलाकरपीपरपांतीकाभारतमेलाभारतकेलोकतांत्रिकसंस्कृतिवमूल्योंकाअनूठासंगमहै।जिसमेंजितनाडूबकीलगाओंऔरडूबतेचलेजानेकीइच्छाहोतीहै।

हालांकि,सरकारकीओरसेइसमेलेकोकोईप्रोत्साहननहींमिलताहै।परंतु,मेलेकोलेकरपीपरपांतीहीनहीं,आसपासगांवोंकेलोगोंमेंभीउत्साहरहताहै।ग्रामीणउमेशप्रसादयादवकेअनुसारपीपरपांतीमेंयहमेलाआजादीकेबाददेशमेंलोकतंत्रकीस्थापनाकेसमयसेहीलगतारहाहै।उससमयगांवकेस्वतंत्रतासेनानियोंकेसाथहीबुजुर्गोंद्वारायहमनायाजाताथा।बादमेंभारतमातापूजनवमेलेकीनिरंतरतासेलोगोंमेंजागरूकताआईतथाआजमेलाकास्वरूपभव्यहोनेलगाहै।ग्रामीणोंकेअनुसारपीपरपांतीकेलोगोंकागणतंत्रकेप्रतिअसीमआस्थाकापरिणामहैकिअबलोगइसमेलेमेंबढ़चढ़करहिस्सालेनेलगेहैं।कहतेहैंआसपासजिलेसेभीलोगमेलेमेंपहुंचतेहैं।