फुटपाथी बच्चों की अंधेरी जिंदगी में शिक्षा का उजियारा बिखेरना चाहती हैं सुपर्णा

राज्यब्यूरो,कोलकाता:दैनिकजागरणअखिलभारतीयहिंदीनिबंधप्रतियोगिताकीमहाविद्यालयश्रेणीमेंद्वितीयपुरस्कारजीतनेवालीबंगालकेदक्षिण24परगनाजिलेकेअजयनगरकीवाशिंदासुपर्णापात्राफुटपाथीबच्चोंकीअंधेरीजिंदगीमेंशिक्षाकाउजियाराबिखेरनाचाहतीहैं।22सालकीसुपर्णानेकहा-'मैंशिक्षिकाबननाचाहतीहूं।इसकेसाथहीसमाजकल्याणकेकामभीकरनाचाहतीहूं।मेराध्यानफुटपाथीबच्चोंपरहोगा,जिन्हेंपढऩे-लिखनेकामौकानहींमिलपाताहै।मैंउन्हेंशिक्षितकरनेकीदिशामेंकामकरूंगी।

पुरस्कारजीतकरकाफीउत्साहितहूं:सुपर्णा

कोलकाताकेमुरलीधरगल्र्सकालेजसेसोशियोलाजी(आनर्स)कररहींसुपर्णानेआगेकहा-'मुझेनिबंधलिखनेकाशौकहै।स्कूलमेंनिबंधप्रतियोगिताओंमेंहिस्सालेतीथी।जबइंटरनेटपरदैनिकजागरणअखिलभारतीयहिंदीनिबंधप्रतियोगिताकेबारेमेंदेखातोऑनलाइनइसमेंहिस्सालिया।मैंनेकोरोनामहामारीसेपूर्ववबादकीस्थितिपरनिबंधलिखाथा।प्रतियागिताकीमहाविद्यालयश्रेणीमेंद्वितीयपुरस्कारजीतकरकाफीउत्साहितहूं।

हिंदी,बांग्लावअंग्रेजीसाहित्यमेंकाफीरुचि

बांग्लाभाषीहोनेकेबावजूदसुपर्णाकीहिंदीमेंकाफीदिलचस्पीहै।वहबांग्लावअंग्रेजीभाषाओंमेंभीलिखतीहैं।लेखनीकेअलावासुपर्णाकोबागवानीवपुस्तकेंपढऩेकाशौकहै।हिंदी,बांग्लावअंग्रेजीसाहित्यमेंकाफीरुचिहै।सुपर्णाकेपरिवारमेंमाता-पितावबड़ेभाईहैं।पितासंजीवपात्रागाड़ीचालकवमांशिखापात्रागृहिणीहैं।