पेड़-पौधों को देते रहे जीवन, खुद हक-अधिकारों से रहे दूर

गोंडा:वनक्षेत्रोंमेंपेड़-पौधेलगाकरउनकीदेखभालकरनेवालेमजदूरोंकेपरिवारोंकोवनटांगियाकहतेहैं।मनकापुरटिकरीरेंजमेंपांचवनटांगियागांवबसेथे।2014मेंइनमेंसे

महेशपुरगांवकोसिर्फराजस्वगांवकादर्जादियागयाथा।मौजूदासमयमेंमनीपुर,रामगढ़,बुटानीवअशरफाबादगांवमेंवनटांगियापरिवारवर्षोंसेआबादहैं।इनमेंकुल122परिवारआजभीमजदूरीकरकेफूसकीझोपड़ीमेंकिसीतरहजीवन-यापनकरतेहैं।राजस्वगांवनहोनेकेकारणचारोंगांवोंमेंविकास,रहन-सहनआदिकाबजटशासन-स्तरसेआवंटितनहींहोताहै।ऐसेमेंइनगांवोंमेंबिजली,पानी,सड़क,चिकित्सा,शिक्षाआदिसुविधानहींमिलपातीहै।अबदेशकीआजादीके70सालबादवनटांगियागांवबुटानी,अशरफाबाद,मनीपुर,रामगढ़राजस्वगांवघोषितहोगएहैं।ऐसेमेंइनगांवोंमेंविकासकीरोशनीपहुंचेगीऔरनागिरकबननेकेसाथहीवोटकाअधिकारभीप्राप्तहोगा।सरकारीयोजनाओंसेआच्छादितहोनेकेकारणशिक्षा,चिकित्सा,कृषि,आवास,बिजलीवअन्यविकासहोंगे।ग्रामीणोंकोआधारकार्ड,राशनकार्ड,जॉबकार्ड,वोटरआइडीकार्ड,बैंकपास-बुक,विधवा,वृद्धापेंशनआदिसरकारीयोजनाओंकालाभमिलसकेगा।वनक्षेत्रकेसभीगांवसमाजकीमुख्यधारासेजुड़जाएंगे।

ग्रामीणोंकेबोल

-मनीपुरकेसंतरामनेबतायाकिउनकेबाप-दादापिछलीदोपीढि़योंसेवनसंरक्षणकाकामकरतेचलेआरहेहैं,लेकिनदेशदुनियासेअलग-थलगपड़ेथे।वनक्षेत्रमेंमजदूरीकरकिसीतरहजीवन-यापनकरतेरहे।मनीपुरकेहीरामबहोरनेबतायाकिविगतवर्षोंसेजंगलमेंरहकरमेहनतमजदूरीकररहेहैं।सरकारीसुविधाकेनामपरकुछभीनहींमिलरहाहै।बुटानीगांवनिवासीबालेदीननेबतायाकिछहपरिवारकेसाथजंगलमेंकामकरकेपिछलेकईसालोंसेदिनकाटरहेहैं।उनसभीकोकोईसुविधानहींमिलरही।तीनपीढ़ीबीतनेकोहै।अशरफाबादगांवनिवासीरामफेरनेबतायाकि70परिवारोंकामजराहै।यहांएकसरकारीनलकेअलावाकुछनहींहै।बरसातमेंफूसकेमकानसेनिकलनामुश्किलहोजाताहै।अबसरकारकीकृपासेहमलोगोंभीसभीप्रकारकीसुविधाएंपासकेंगे।