पढ़ने की ललक जगा अब पढ़ाने की लड़ाई

विवेकदत्त,मथुरा:झुग्गी-झोपड़ियोंमेंरहनेवालेबच्चोंकोपुचकरा,फुसलाया।इनकेमजदूरमाता-पिताकोसमझाया।पेंसिल-प्लेटपकड़ाकरपढ़ना-लिखानासिखाया।इनबच्चोमेंपढ़नेकीललकजगगईहै।मगर,इन्हेंकोईभीशिक्षणसंस्थानशिक्षाकाअधिकारदेनेकोतैयारनहींहै।इनकेआसपासकोईसरकारीस्कूलभीनहींहै।

शिक्षाकाअधिकार(आरटीई)एक्टलागूहुएकरीबआठसालहोगए,लेकिनइसेलागूकरानेकोकिताबठीकसेनहींखुलपाईहै।मालगोदामकेपासझुग्गी-झोपड़ियोंमेंरहनेवाले35बच्चेबस्तालेकरस्कूलजानाचाहतेहैं,लेकिनआर्थिकहालातकदमपीछेखींचलेतेहैं।जस्टिसफॉरचिल्ड्रनकेसंस्थापकसतीशशर्माभिक्षावृत्तिऔरबालश्रममेंलगेदर्जनोंबच्चोंकेजीवनमेंशिक्षाकीअलखजगानेमेंजुटेहैं।कोशिशहैकिउनकेद्वारासंचालितअनौपचारिकस्कूलमेंककहरासीखरहेबच्चोंकाकैसेभीआरटीईकेतहतशहरमेंचलरहेस्कूलोंमेंदाखिलामिलजाए।उन्होंनेडीएमसेलेकरराष्ट्रीयबालअधिकारसंरक्षणआयोगकाद्वारतकखटखटाया।आयोगने29जूनकोसतीशशर्माकेप्रार्थनापत्रकासंज्ञानलेतेहुएउप्रकेमुख्यसचिवकोइनबच्चोंकेदाखिलेऔरपुनर्वासकीकार्रवाईकेनिर्देशदिए।परंतुइसपत्रकोस्थानीयस्तरपरकोईसक्रियतानहींहोपाई।

सतीशशर्माबतातेहैंकिमालगोदामस्थितगोपालनगरकीझुग्गी-झोपड़ियोंमेंरहनेवाले35बच्चोंकोसंस्थाद्वाराअनौपचारिकस्कूलमेंपढ़ायाजारहाहै।इनबच्चोंकासपनास्कूलजानेकाहै।अगरइन्हेंशिक्षाकेमाध्यमसेमुख्यधारासेनहींजोड़ागयातोअसामाजिकतत्वइन्हेंअपराधकीदुनियामेंधकेलसकतेहैं।इनकेस्कूलमेंदाखिलेकेलिएजिलाधिकारीकोदोपत्रदेचुकेहैं।डीएमनेमुख्यविकासअधिकारीकोनियमानुसारकार्रवाईकियेजानेकेनिर्देशदिएहैं,लेकिनअबतककोईठोसकदमनहींउठायागया।

बच्चोंकेव्यवहारमेंबदलाव

आपसमेंसामान्यबातचीतमेंबात-बातपरगालीकाप्रयोगकरनेवालेयेबच्चेअबरोजानासुबहअपनेमाता-पिताकेचरणस्पर्शकरनेकेसाथअपनेशरीरऔरकपड़ोंकीस्वच्छतापरध्यानदेनेलगेहैं।इसबदलावकाकारणस्ट्रीटस्कूलमेंशिक्षाकेसाथदिएजानेवालेसंस्कारहैं।कपड़ोंऔरशरीरकीस्वच्छतामहत्वसमझतेहुएसंस्थाद्वाराइनबच्चोंकोसाबुनऔरशैंपूमुहैयाकरायागया।स्कूलमेंअबसभीबच्चेनहाधोकरधुलेकपड़ेपहनकरआतेहैं।

शास्त्रीबालनिकेतनमेंपढ़रहेहैंदर्जनोंस्ट्रीटचिल्ड्रन

सतीशशर्माकीमुहिममेंसहयोगकाहाथबढ़ातेहुएजनकपुरीस्थितशास्त्रीबालनिकेतनस्कूलकेप्रबंधकश्रीकृष्णशर्मानेकरीबदोदर्जनबच्चोंकोअपनेस्कूलमेंपढ़ानेकीसहर्षस्वीकृतिदी।उनकेस्कूलमेंऐसेदर्जनोंबच्चेपढ़रहेहैं।श्रीकृष्णशर्माअपनेस्तरपरइनकोशिक्षादेरहेहैं।