पौराणिक हंसकूप की कहानी, पीने लायक नहीं रहा पानी, स्कंद पुराण और रामायण में भी है इसका वर्णन

प्रयागराज,जागरणसंवाददाता।शहरकेगंगापारइलाकेमेंझूंसीक्षेत्रमेंगंगातटपरस्थितहैसदियोंपुरानाहंसकूप।यहकूपकईकाल(युग)कागवाहहै।कभीलोगोंकोशीतलजलप्रदानकरनेवालायहकूपरख-रखावनहोनेसेदुर्दशाकाशिकारहै।सफाईनहींहोनेकीवजहसेकूपकापानीपीनेलायकनहींरहगया।कूपकीसफाईऔरजीर्णोद्धारकरादेनेसेइसकावैभवफिरसेवापसलौटसकताहै।

25सालपहलेतककूपअच्छीदशामेंथा

हंसकूपझूंसीमेंगंगाकेतटपरकैलाशधामकेबगलहै।यहपक्काबनाहैऔरउसमेंगड़ारीभीलगीहै।करीब25सालपहलेतककूपअच्छीदशामेंथा।यहांआनेवालेभक्तोंकेअलावाआसपासकेलोगोंकीप्यासभीइससेबुझतीथी।लेकिन,रख-रखावनहोनेसेअबयहदुर्दशाकाशिकारहोगया।कुएंकीदीवारेंभीखराबहोगईहैं।सफाईनहोनेसेपानीभीदूषितहोगयाहै।दीवारोंपरपौधेभीउगआएहैं।कूपपररस्सीऔरबाल्टीरखीजरूररहतीहैमगर,उसकाइस्तेमालकूपकापूजनकरनेआनेवालेलोगअपनेऊपरजलछिड़कनेकेलिएकरतेहैं।इसकूपकीप्राचीनताऔरऐतिहासिकताकाअनुमानइसीसेलगायाजासकताहैकिइसकावर्णनस्कंदपुराणएवंमहर्षिवाल्मीकिद्वारारचितरामायणमेंभीमिलताहै।

स्वामीकृष्णानंदमहाराजकाकहनाहैकिइसकूपकानिर्माणकिसनेकराया,इसकावर्णननहींमिलताहै।हालांकि,ऐसीमान्यताहैकिभगवानविष्णुद्वाराहंसावतारमेंजबउन्होंनेब्रह्माजीकोवेदोंकाउपदेशदियाथा,तभीइसकूपकाभीनिर्माणहुआ।वहबतातेहैंकिकुछसालपहलेतकवहांपुरातत्वविभागकाबोर्डलगाथापरअबवहबोर्डभीनहींहै।कूपकेजीर्णोद्धारकेलिएकईबारप्रयासकियागयालेकिन,कोईसफलतानहींमिली।