पाकिस्तान से आया खत, पर वो नहीं लौटे

संवादसूत्र,¨तदवारी(बांदा):करीब50दिनगुजरचुकेहैं।पत्नीकीआंखेगांवकेगलियारोंकोताकरहीहैं।अखबारोंकीसुर्खियांपढ़ते-पढ़तेबूढ़ेबापकीआंखेभीपथरागईहैं।मांकेकानअपनेलाडलेकेलौटनेकीखबरसुननेकेलिएलालायितहैं।लेकिनवहनहींलौटाउसकाखतआगया।¨तदवारीथानाक्षेत्रकेजसईपुरगांवकानजाराकुछऐसाहीहै।पाकिस्तानआर्मीकीगिरफ्तमेंआएमछुआरोंकेपरिवारोंमेंमातमसानजाराहै।हरघरऔरदिलोंमेंअरमानयहीहैंकिनएवर्षमेंउनकेआनेकीखुशियांलौटेंगी।सोचहैकिइसबारगुजरातनहींभेजेंगे।

नौनवंबरकोजसईपुरगांवकेदेवीशरण,ओमप्रकाश,बाबू,चंद्रप्रकाश,विक्रम,महेंद्र,रज्जू,राजू,पप्पू,अखिलेश,अमितसहितकुल14मछुआरोंकोपाकिस्तानसेनानेगिरफ्तारकरलियाथा।घटनातबघटीजबवहअपनेठेकेदारकेकहनेपरओखातटसेनावमेंसवारहोकरमछलीपकड़नेकेलिएसमुद्रगएथे।लेकिनसमुद्रीरास्ताभूलजानेपरपाकिस्तानसेनानेसभीकोगिरफ्तारकरलियाथा।यहमछुआरेनौनवंबरकोहीअपनेगांवसेगुजरातकेलिएरवानाहुएथे।अगलेहीदिनमछुआरोंकेपरिजनोंकोघटनाकीजानकारीहुई।जिससेइलाकेमेंहड़कंपमचगयाथा।तबसेपीड़ितपरिवारकीआंखेंअपनोंकेआनेकीचाहमेंपथरागईहैं।वहकैसेहोंगे,इसकीभीकोईजानकारीनहींमिलपारहीथी।गुरुवारकोअचानकएककेबादएकरामचंद्र,भवानीदीन,ओमप्रकाशसमेतचारलोगोंकेखतआतेहीघरमेंखुशियांछागईहैं।सभीकेपत्रोंमेंलिखाहैकिहमसभीअच्छीतरहरहरहेहैं।आपलोगभीप्रेमसेरहना,घरखर्चकेलिएएकदूसरेकासहयोगलेलेना।इसचिट्ठीकेबादपरिजनअपनेआंसूनहींरोकसके।रो-रोकपरिवारकेलोगसिर्फईश्वरसेवापसीकीफरियादकररहेहैं।

मछुआराअमितकीकमाईसेपूरेघरकाखर्चचलताथा।छोटाभाईमामूलीमजदूरीकरताहै।बूढ़ेमां-बापभीअमितकेभरोसेरहतेथे।उनकेपरिजनोंकाकहनाहैकिचिट्ठीसेउनकेकुशलसेमनखुशजरूरहुआहै,लेकिनपाकिस्तानमेंकैदकानामसेमनसिहरउठताहै।ओमप्रकाशकीपत्नीऊषाकाकहनाहैकिएकदिनपहलेपाकिस्ताननेकुछमछुआरोंकोछोड़ाथा।लेकिनइनमेंजसईपुरकेलोगनहींथे।हरदिनलोगोंसेपाकिस्तानकोलेकरखबरकीजानकारीलेतीरहतीहूं।रमाबाईकाकहनाहैकिउनकेजानेकेबादपरिवारिकपरेशानियांबढ़गईहैं।किसीप्रकारसमयगुजररहाहै।सुमित्राकाकहनाहैकिहरदिनसिर्फअबआनेकीराहदेखरहेहैं।टीवीमेंयदिपाकिस्तानकीखबरचलीतोनजरगड़जातीहै।सभादेवीकाकहनाहैकिघरकीआर्थिकस्थितिबेहददयनीयहै।लेकिनदर्दकिससेकहें।चंदाबाईकेआंसूरुकनेकानामनहींलेरहेहैं।