मरने के बाद जन को समर्पित तन से सेवा, जानें-कानपुर में कौन हैं कलियुग के दधीचि

कानपुर,[जागरणस्पेशल]।दानकीपरंपरासदियोंपुरानीहै।कुछलोगअपनेऔरपरिवारकेकल्याणकेलिएअन्न,वस्त्र,द्रव्य,गोऔरभूमिदानकरतेहैं,तोकुछऐसेभीहैंजोमानवकल्याणकेलिएपंचतत्वोंसेबनीकाया(देह)कादानकरनेसेनहींहिचकते।असुरोंसेदेवताओंकीरक्षाकेलिएमहर्षिदधीचिनेदेहदानकरइसपरपंराकीशुरुआतकीथी।उनकीअस्थियों(हड्डी)सेनिर्मितधनुषसेहीदैत्योंकासंहारसंभवहुआथा।शहरमेंभीऐसेकईदधीचिहुएहैं,जोदुनियासेअलविदाकहनेकेबादअपनाशरीरचिकित्साशोधकेलिएदानकरगए।प्रसिद्धसाहित्यकारपद्मश्रीगिरिराजकिशोर,स्वतंत्रतासेनानीकैप्टनलक्ष्मीसहगलऔरमानवतीआर्यजैसीहस्तियांशामिलहैं।इनकीमृतदेहमूकशिक्षककीतरहछात्र-छात्राओंकोगूढ़ज्ञानप्रदानकररहीहैं,ताकिमृतदेहपरकिएगएशोधनवजीवनकाआधारबनसकें।

जीएसवीएममें1991सेशुरूहुईथीदेहदानकेपंजीकरणकीव्यवस्था

जीएसवीएममेडिकलकॉलेजमेंवर्ष1991मेंएनॉटमीविभागनेदेहदानकेलिएपंजीकरणकीव्यवस्थाशुरूकीथी।इच्छाशक्तिकेअभावमेंयहप्रयाससफलनहींहोसका।यहवोदौरथाजबमेडिकलकॉलेजमेंजीआरपीसेमिलेलावारिसशवोंसेकामचलायाजाताथा।पुलिसमैनुअलमेंबदलावकेबादइसमेंपरेशानीहोगीलगी।इसेदेखयुगदधीचिदेहदानअभियानकेप्रमुखमनोजसेंगरनेवर्ष2003मेंजनजागरणकासंकल्पलेकरलोगोंकोजागरूककरनाशुरूकिया।उनकेअथकप्रयाससेवर्ष2006मेंपहलादेहदानहुआ।इसकेबादजागरुकताकेसाथदेहदानियोंकीसंख्याभीबढ़तीरही।शहरसेअबतक226देहदानहोचुकेहैं।इसमें197मृतशरीरजीएसवीएममेडिकलकॉलेजकोमिलेहैं।यहांसेअखिलभारतीयआयुर्विज्ञानसंस्थान(एम्सगोरखपुर),अयोध्याएवंलखनऊमेडिकलकॉलेजोंकोभीदेहभेजीगईहैं।

त्वचासेहड्डीतकअध्ययन

मृतदेहकेहरअंगकाअध्ययनकियाजाताहै।त्वचा,ब्रेन,दिल,गुर्दाकेअलावाअन्यअंगोंकेबारेमेंपढ़ायाजाताहै।केमिकलसेउसेसाफकरअपरवलोअरलिंबसंरक्षितकरतेहैं।देहकीहड्डियां15से20सालतकछात्रोंकीपढ़ाईमेंकामआतीहैं।मेडिकलकॉलेजकीएनॉटमीविभागाध्यक्षप्रो.सुनीतिपांडेयबतातीहैंकिएकमृतदेह20-25छात्रोंकेग्रुपकोदीजातीहै,जोढाईसेतीनमाहतकशारीरिकसंरचनाकाअध्ययनकरतेहैं।

आधुनिकसर्जरीसीखनेमेंउपयोगी

कॉलेजमेंकैडेवरस्किललैबबनाईगईहै।यहांमृतदेहपरपीजीछात्र-छात्राएंएडवांससर्जरीकरनासीखतेहैं।उन्हेंनसों,जोड़ोंऔरकिडनी,लिवरआदिअंगोंकीस्थितिकापताचलताहै।वहींलेप्रोस्कोपिक,घुटनाप्रत्यारोपणएवंमाइक्रोसर्जरीकाअभ्यासभीकरायाजाताहै।सर्जरीकेअभ्याससेनिखारआताहैऔरमरीजपरसर्जरीकेदौरानचूककीगुंजाइशभीनहींरहती।

ऐसेकरेंदेहदानकासंकल्प

देहदानकासंकल्पलेनेकेलिएयुगदधीचिदेहदानअभियानसमय-समयपरजागरुकताकार्यक्रमचलातेहैं।इसमेंदेहदानऔरनेत्रदानकेलिएप्रेरितकियाजाताहै।एकसंकल्पपत्रभरवायाजाताहै।संकल्पलेनेवालेकीमृत्युहोनेपरस्वजनकोअभियानप्रमुखमनोजसेंगरकोदेहदानकीसूचनादेनीहोतीहै।अबतक3000सेज्यादालोगोंनेदेहदानकासंकल्पलियाहै।वहीं750नेत्रदिव्यांगोंकोनेत्रज्योतिमिलचुकीहै।

कानपुरदेहातसेमिलीपहलीदेह

शहरमेंपहलादेहदान2006मेंहुआथा।कानपुरदेहातकेडेरापुरनिवासी21वर्षीयबऊआदीक्षितकीदेहकोमेडिकलरिसर्चकेलिएदियागयाथा।उनकेभाईडॉ.अभिषेकदीक्षितबतातेहैंकिमेडिकलकॉलेजोंकोदेहनहींमिलपातीथीं।इससेछात्र-छात्राओंकोपढऩेऔरसीखनेमेंदिक्कतहोतीथी।नएडॉक्टरोंकाहुनरनिखारनेकेलिएपरिवारनेदेहातकीपहलकीथी।इसीकानतीजाहैकिधीरे-धीरेलोगोंकोजागरुकताबढ़रहीहै।अबसालभरमेंऔसतन30से35देहदानहोजातेहैं।हमारेघरमेंसभीनेदेहदानकासंकल्पलियाहै।

अंतिमसंस्कारकीपरंपराकानिर्वाह

देहदानकेबादअपने-अपनेधर्मकेहिसाबसेअंतिमसंस्कारकीपरंपराकानिर्वहनभीकरायाजाताहै।एनाटॅमीविभागमेंदेहदानसेपहलेपरिजनोंकीइच्छापरउनकेरीति-रिवाजसेअंतिमसंस्कारकरानेकेलिएधर्मगुरुओंकीव्यवस्थाहोतीहै,जोमंत्रोच्चारएवंपूजा-पाठकरातेहैं।हरवर्षमेडिकलकॉलेजमेंदेहदानियोंकेस्वजनोंकोसम्मानितभीकियाजाताहै।

वर्ष        देहदान

(इससालकेआंकड़ेसिर्फफरवरीतककेहैं )