मखाना का उत्पादन तो होगा, तैयार कराने के लिए फिर भटकेंगे किसान

मधुबनी।पंडौलप्रखंडक्षेत्रकेदर्जनोंपोखरोंसेदोमाहबादमखानाकाउत्पादनशुरूहोजाएगा।इसकीचिताउत्पादकोंकोअभीसेहोनेलगीहै।क्योंकिमखानाकोतैयारकरनेकेलिएइन्हेंदूसरेजिलेकीराहपकड़नीहोगी।कारण,जिलेकीएकमात्रमखानाप्रोसेसिगयूनिटशुरूहोनेकेकुछदिनोंबादहीबंदहोगई।अबमखानाउत्पादकपूर्णिया,कटिहार,अररियायादरभंगापरआश्रितहोगएहैं।वहींमछुआसोसाइटीकीआपसीकलहसेप्रखंडमेंमछुआरोंकीहालतभीदयनीयहै।गरीबमछुआरोंकीसुधलेनेवालाकोईनहींदिखरहा।वर्तमानमेंप्रखंडक्षेत्रके165पोखरमेंमछलीपालनकाकामहोरहाहै।पूंजीवसिचाईकेअभावमेंमछुआरोंकीआजीविकापरप्रभावपड़रहाहै।परंपरागतमछुआरोंसबसेअधिकप्रभावितहैं।

ज्ञातहोकिपिछलेदिनोंमुख्यमंत्रीनेवर्चुअलरैलीकेदौरानमिथिलांचलकेविकासकेलिएमखाना,मछलीवमधुबनीपेंटिगकोआधारबतायाथा।मगर,जिनहालातोंसेमछुआरेगुजररहेहैं,मखानावमछलीकेउत्पादनमेंवृद्धिमुश्किलहोगी।जबकिसरकारकीओरसेबहुतसारीयोजनाएंमछुआसोसाइटीयामछुआकिसानकोदियाजारहाहै।मछुआरोंकोजीरापालनपर50प्रतिशतऔरवाहनयोजनाकेतहतदो,तीनवचारपहियावाहनपर90प्रतिशतअनुदानमिलताहै।इनयोजनाओंमेंभीप्रखंडक्षेत्रकेमछुआरेकाफीपीछेहैं।मछुआरोंकेलिएसरकारकीओरसेबीमायोजनाभीहै।इसमेंमृत्युहोनेपरपरिवारकेआश्रितोंकोदोलाखरूपयेकीसहायताराशिदेनेकाप्रावधानहै।वहींघायलहोनेपर20हजाररुपयेकीसहायताराशिदीजातीहै।इसकेसाथहीकईअन्ययोजनाएंआवासऔरतालाबनिर्माणशामिलहैं।इनसभीयोजनाओंकेलिएकिसानोंकोनिबंधनकरानाअनिवार्यहोताहै।लेकिन,जानकारीकाअभावहोनेसेमछुआरेनिबंधननहींकरापातेहैं।

----------------------------वर्तमानमेंप्रखंडकार्यालयमेंमछुआरोंकेपंजीकरणकाकामजारीहै।प्रखंडक्षेत्रकेमछुआरेअपनापंजीकरणकरानेकेबादसभीसरकारीयोजनाओंकालाभलेसकतेहैं।

स्वातिकुमारी,बीएफओपंडौल

पूंजीकेअभावमेंगैरमछुआरोंकेहाथमेंव्यवसायचलाजाताहै।इसकालाभभीगैरमछुआरेहीउठातेहैं।इसकारणमछुआरेआपसमेंहीउलझकररहजातेहैं।

रामसेवकमुखिया,अध्यक्षमत्स्यजीवी

मछलीकेआयातपररोकलगनेसेस्थानीयमछुआरोंकीस्थितिमेंसुधारआएगा।

संजयसहनी,पूर्वअंचलमंत्रीमत्स्यजीवी

मछुआसोसाइटीकेआपसीविवादकेकारणग्रामीणस्तरकेछोटेमछुआरोंकोसरकारीयोजनाओंकालाभनहींमिलपाताहै।इसकारणछोटेमछुआरेमजदूरीकरनेकोमजबूरहैं।

अरुणमुखिया,मछुआरा