मधुश्रावणी में शिव की बेटी विषहारा की होती है पूजा

सहरसा।सावनमेंभगवानशिवकीबेटीकीपूजाकरतीहैंमिथिलाकीनवविवाहिता।मिथिलामेंलोकपर्वमधुश्रावणीकाकाफीमहत्वहै।पर्वकेदौराननवविवाहिताअपनेपतिकेदीर्घायुकीकामनाऔरसंपूर्णपरिवारकेमंगलहेतुसावनमेंमाताविषहराऔरउनकेपूरेपरिवारकापूजनकरतीहैं।15दिनतकचलनेवालायहपूजनोत्सवसावनकृष्णपक्षकेचौठतिथिसेप्रारंभहोकरशुक्लपक्षकेतृतीयातिथिकोसंपन्नहोताहै।ऐसामानाजाताहैकिमाताविषहरादेवाधिदेवशिवकीपुत्रीहैंइसलिए15दिनोंतकशिव-पार्वतीकेसाथहीमाताविषहराकेमिट्टीकेस्वरूपकोपूजाजाताहै।इसदौरानशिव-पार्वतीकेजीवनचरित्रकेसाथहीमाताविषहराकेजन्मऔरमानवजीवनमेंउनकेमहत्वकोकथाकेरूपमेंसुनतेहैं।शिवपरिवारकोआदर्शपरिवारमानाजाताहै।इसलिएनवदंपतिअपनेजीवनकाशुभारंभइन्हीकोसाक्षीमानइन्हीकाअनुसरणकरनेकाप्रणलेकरअपनेगृहस्थजीवनमेंप्रवेशकरतीहैं।इसपूजनकाआयोजनविवाहिताकेमायकेमेंकिएजानेकीपरंपराकेकारणपूजनसामग्रीऔरप्रसादविवाहिताकेससुरालसेभेजाजाताहै।इसपूजाकेदौराननववधुसिर्फससुरालसेभेजीगईवस्तुओंकाउपयोगकरसकतीहैं।--मौनापंचमीकाहैविशेषमहत्व-

नवविवाहिताकेअलावासावनकृष्णपंचमीकोप्रत्येकमिथिलावासीभीकाफीधूमधामसेमनातेहैं।मधुश्रावणीपूजनकरनेवालीकीकठिनपूजाटेमीकेसाथसम्पन्नहोतीहैतोवहींसभीअपने-अपनेआंगनमेंचिकनीमिट्टीसेसातपिडबनाकरसिदूर,पिठार(चावलकाघोल)लगाकरहरीदुर्बाखोंसकररखतेहैं।जिसेशामकोघरकेसभीकमरेमेंसालभरकेलिएसुरक्षितरखाजाताहै।जबतकयेसभीपिडबनकरतैयारहोताहैतबतकइसेबनानेवालीमहिलाएंमौनव्रतमेंरहतीहैं।इसलिएइसेमौनापंचमीकहाजाताहै।इसदिनकुलदेवीगोसाउनिऔरमाताविषहराकोदूध,लाबा(खील),मीठीखीरऔरघोरजाऊर(खट्टीखीर)काभोगलगायाजाताहै।साथहीइसदिनघरकेसभीसदस्यकुछभीखानेसेपहलेनीमकीपत्तियांचबाकरनींबूचूसतेहैं।कहाजाताहैकिऐसाकरनेसेसांपनहींकाटते।