मधुश्रावणी: लाल पियर सासुर सं ऐले हन साड़ी, गौरी हम पूजब हे...

जागरणसंवाददाता,सुपौल।सावनमहीनेकीकृष्णपक्षचतुर्थीसेआरंभहोकरशुक्लपक्षकीतृतीयातिथिकोसंपन्नहोनेवालापर्वमधुश्रावणीआजयानीबुधवारकोटेमीकेसाथसंपन्नहोजाएगा।यहमिथिलांचलकाएकअनोखात्योहारहै।अखंडसुहागकेलिएइसेनवविवाहिताएंपूरीनियम-निष्ठाकेसाथकरतीहैं।इसपर्वमेंपंडितभीमहिलाहोतीहैंऔरकथावाचनकीजिम्मेदारीभीमहिलाकेजिम्मेहीरहतीहै।पर्वकोलेकरमिथिलाकेआंगनोंमेंलालपियरसासुरसंऐलेहनसाड़ी,गौरीहमपूजबहे,गौरीहमपूजब,विषहरहमपूजब,लालपियर...जैसेगीतवातावरणमेंमधुरताघोलरहेहैं।

नागदेवताकीपूजासेदांपत्यजीवनकीआयुहोतीहैलंबी

ऐसेतोमिथिलाचंलमेंहरदिनपर्व-त्योहारहोतेहैंलेकिनसावनसेइसकायहसिलसिलातेजहोजाताहै।इसमेंमधुश्रावणीकामहत्वपूर्णस्थानहै।इसत्योहारकोनवविवाहिताएंकाफीआस्थाऔरउल्लासकेसाथमनातीहैं।मिथिलांचलमेंनवविवाहिताओंद्वारायहव्रतअपनेसुहागकीरक्षाकीकामनाकेसाथकियाजाताहै।मान्यताहैकिसावनमेंनागदेवताकीपूजाकरनेसेसुखमयदांपत्यजीवनकीआयुलंबीहोतीहै।नागपंचमीसेशुरूहुआयहपर्व15दिनोंतकचलताहै।

15दिनोंतकसुनाईजातीहैकथा

इसपर्वमेंगौरी-शंकरकीपूजाकेसाथविषहरीवनागिनकीपूजाहोतीहै।गौरीऔरविषहरीकेश्रृंगारकेलिएतरह-तरहकेफूल-पत्तेतोड़ेजातेहैं।बासीफूलोंसेदेवीकाश्रृंगारकियाजाताहै।इनदिनोंनवविवाहिताससुरालसेआएहुएकपड़े-गहनेपहनतीहैंससुरालकाहीभोजनग्रहणकरतीहैं।मधुश्रावणीशुरूहोनेकेएकदिनपूर्वनवविवाहिताओंकेससुरालसेसारीसामग्रीभेजदीजातीहै।पूजाकेपहलादिनऔरअंतिमदिनविस्तारसेपूजाहोतीहै।ऐसानहींकिअन्यदिनश्रद्धा-भक्तिमेंकमीनजरआतीहै।जमीनपरसुंदरतरीकेसेअरिपन(रंगोली)बनाकरपूजाकीजातीहै।पूजाकेबादकथासुनाईजातीहै,जिसमेंशंकर-पार्वतीकेचरित्रकेमाध्यमसेपति-पत्नीकेबीचहोनेवालीबातेंनोक-झोंक,रुठना-मनाना,प्यार-मनुहारआदिकीकथासुनाईजातीहै।

टेमीकेसाथआजसंपन्नहोगीपूजा

व्रतीमनीषा,रेखा,मीमांशा,रजनीआदिबतातीहैंकिटेमीकेसाथइसपर्वकासमापनहोताहै।व्रतियांआजससुरालसेआएवस्त्र-आभूषणधारणकरपूजाकरेंगी।पूजाकेबादखीरऔरमेहंदीबांटीजाएगी।इसकेबादससुरालसेआईखाद्यसामग्रीसेभोजकाआयोजनहोगा,जिसमेंमुख्यरूपसेसुहागिनेंआमंत्रितहोंगी।बहरहाल,नवविवाहिताओंकीटोलीकोपावनिछिएअनोखा,बलमजीधोखानहिंदेबएयौ...गुनगुनातेहुएफूललोढ़तेग्रामीणक्षेत्रोंमेंदेखाजासकताहै।