माता की चुनरी से सजाया रोजगार का 'दरबार'

बागपत,जेएनएन।मंदिर-मस्जिदकोलेकरभेदभावकीदीवारखड़ीकरनेवालोंकेलिएसबकहैंफातिमा।मजहबइस्लामहै,लेकिनकामकररहींहैंमाताकीचुनरीबनानेका।गृहस्थीकीगाड़ीडगमगाईतोस्वयंसहायतासमूहगठितकरदिया।इसकेजरिएखुदभीस्वाबलंबीबनींऔरदूसरोंकोभीस्वाबलंबनकीराहदिखादी।बहुतखूबफातिमा!'रोजगारधर्म'निभानेकायहप्रयासयकीननकाबिल-ए-तारीफहै।

तिलपनीगांवनिवासीइंटरमीडिएटउत्तीर्ण30वर्षीयफातिमाकानिकाह10वर्षपूर्वमजदूरपेशाइमरानसेहुआथा।शादीकेबादतीनबच्चेहुएतोखर्चबढ़गया।उन्होंनेदोवर्षपूर्व10महिलाओंकोसाथजोड़करराष्ट्रीयआजीविकामिशनमेंरसूलस्वयंसहायतासमूहगठितकिया,जिससे200रुपयेमासिकनिजीबचतकरनेलगीं।मिशनकेखर्चपरसिलाईप्रशिक्षणलेकरकपड़ेसिलनेकाकामशुरूकियालेकिनबातनहींबनी।इसकेबादअक्टूबर-18में10हजाररुपयेकीअल्पपूंजीसेमाताकीचुनरियांसिलनेकाकामशुरूकिया।चुनरियोंकेलिएकपड़ा,धागागोटा-सितारेआदिगाजियाबादकेलोनीसेखरीदकरलातीहैं।उनकीबनाईचुनरियांबाजारमें100से300रुपयेतकबिकतीहैं।फातिमाकहतींहैकिइसकाममेंबड़ासुकूनमिलताहै।नवरात्रमेंचुनरियोंकीमांगभीबढ़ीहै।

बांटरहींरोजगार

फातिमागांवकीशायरा,अंजुम,इमराना,तबस्सुमवरेशमासमेत12महिलाओंसेचुनरीसिलनेकाकामकरातीहैं।इससेउन्हेंभीरोजगारमिलनेलगा।अबफातिमासमेतअन्यसभीमहिलाएंपांच-छहहजाररुपयेमासिककमातीहैं।गत22सितंबरकोउद्यमसमागममेंसांसदडा.सत्यपालसिंहवडीएमशकुंतलागौतमनेफातिमाकेचुनरीस्टालकीसराहनाकीथी।आगेबढ़नेकाभीजज्बा

फातिमादिल्लीविवि.सेबीएद्वितीयवर्ष(व्यक्तिगत)परीक्षाकीतैयारीकररहीहैं।उन्होंनेगांवकी50अन्यमहिलाओंकोभीविभिन्नस्वयंसहायतासमूहोंसेजुड़वाकररोजी-रोटीसेजोड़ाहै।फातिमानेमाताकीचुनरियांबनाकरखुदकेसाथअन्यमहिलाओंकीरोजगारकीराहभीआसानकीहै।महिलाओंकेइसतरहकेप्रयासबड़ेसकारात्मकबदलावलातेहैं।

-ब्रजभूषणसिंह,स्वत:रोजगारउपायुक्तराष्ट्रीयआजीविकामिशन