Lok Sabha Polls 2019: ढिबरी युग में जी रहे धोबघट गांव के लोग

बरही(हजारीबाग),[प्रमोदविश्वकर्मा]।चुनावसिरपरहै।वोटकेलिएप्रत्याशीमैदानमेंहैं।विकासकेवायदेकिएजारहेहैं।लेकिन,हजारीबागलोकसभाक्षेत्रमेंएकऐसागांवहै,जहांविकासकीएककिरणभीनहींपहुंचीहै।गांवजानेकेलिएपगडंडीऔरकच्चीसंकीर्णपहाडिय़ोंबीचगुजरतामार्गहीएकमात्रविकल्पहै। हमबातकररहेहैंबरहीकेरानीचुआंपंचायतअंतर्गतधोबघट,नरसिंहवा,परतातरी,पिंडवावगिद्धाटोलाकी।

यहबरहीप्रखंडमुख्यालयसेमहज25किलोमीटरदूरीपरहै।यहांकेग्रामीणआजादीकेसातदशकबादभीमूलभूतसुविधाओंकेलिएतरसरहेहैं।जहां70घर,करीबपांचसौकीआबादीहैएवंकरीब225मतदाताहैं।सड़क,पेयजल,स्वास्थ्यवबिजलीजैसीबुनियादीआवश्यकताओंसेवंचितहैं।शिक्षाकीभीहालतअच्छीनहींहै।आदिवासीएवंघटवारजातिबाहुल्यक्षेत्रहै।

सिर्फवोटकेदिनोंमेंकुछनेताओंकाआगमनहोताहै।पहाड़परगांवटोलातकपहुंचनेकेलिएपैदलयादोपहियावाहनहीसहाराहै।कईबारमरीजसमयपरअस्पतालतकनहींपहुंचपातेहैं।रास्तेमेंहीदमतोड़देतेहैं।ग्रामीणोंकाकहनाहैकिगांवमेंनातोअपनीबेटीकीकोईशादीकरनाचाहताहैऔरनाहीइसगांवकीलड़कीसेविवाहकरनाचाहताहै।

गांवमेंमोबाइलटावरभीनहींपकड़ताहै,इससेसूचनाकेआदान-प्रदानमेंकाफीपरेशानीहोतीहै।रोजगारकापहलेहीटोटाहै।लोगमात्रकृषिपरआश्रितहैं।बारिशनहींहुईतोपलायनकरनेयादूसरेगांवोंमेंजाकरमजदूरीकरनेकेलिएविवशहोतेहैं।उक्तपांचगांवटोलाकीइतनीबड़ीआबादीकेबीचमात्रतीनकुआंऔरदोचापाकलहै,जोगर्मीशुरूहोतेहीहांफनेलगाहै।

ग्रामीणकरीबआधाकिमीदूरनदीकेसोतवउसकेचुआंकेपानीपरनिर्भरहैं।यहांकेग्रामीणमतदानकेलिएकुटमावजीतपुरस्थितमतदानकेंद्रकरीबआठसे10किमीदूरीतयकरपहुंचतेहैं।राशनकेलिएभीलंबीदूरीतयकरजविप्रदुकानपहुंचनापड़ताहै।

नहींबनपाईसड़क

सड़कविकासकापैमानासमझाजाताहै।सड़कयहांकेविकासअवरुद्धहोनेकीसबसेबड़ीवजहहै।करीब10किलोमीटरतोसड़कहीनहींहै।बमुश्किलदोपहियाऔरट्रैक्टरचलताहै,वोभीचालकअपनीजानजोखिममेंडालकरचलातेहैं।थोड़ीसीचूकपरवाहनसैकड़ोंफीटनीचेखाईमेंगिरसकतीहै।

मरीजकोखाटपरलादकरकिसीप्रकारपगडंडीकेसहारेनीचेकुटमागांवतकलायाजाताहै।सड़ककार्यसबसेपहले1977मेंपूर्वमुखियाप्रह्लादसिंहकेअथकप्रयाससेशुरूकरायागयाथा।उसकेबादकोईपहलनहींहुई।जानकारीकेअनुसारसड़कबनानेकेलिएवनविभागकीएनओसीकीजरूरतहै।

ढिबरीयुगमेंजीतेहैंलोग

आजभलेहीदेशडिजिटलइंडियाकीओरअग्रसरहै,लेकिनयहांकेग्रामीणआजभीलालटेनऔरढिबरीयुगमेंजीरहेहैं।इनगांवोंमेंबिजलीबहालनहींहोसकीहै।राजीवगांधीविद्युतीकरणयोजनाकेतहतबिजलीपहुंचानेकाप्रयासकियागयाथा।किन्तुअधूरारहा।अबआलमयहहैकिआंधी-तूफानकीवजहसेकईपोल-तारगिरचुकेहैं।बिजलीनहींरहनेसेयहांकेलोगसरकारकीयोजनाओंसेकोसोंदूरहैं।

यहांमहजदोचापाकलवतीनकुआंहै।इसकाजलस्तरनीचेचलागयाहै।गर्मीमेंसूखजाताहै।लोगनालेवचुआंकागंदापानीपीनेकोमजबूरहैं।गर्मीकेदिनोंमेंलोगकरीबआधेकिलोमीटरदूरसेपानीलाकरअपनीप्यासबुझातेहैं।

महजएकविद्यालय

यहांमहजएकसरकारीविद्यालयहै।इसमेंप्राइमरीअध्यापकसमेतमात्रतीनशिक्षकहैं।प्रधानाध्यापकमनोजकुमारनेजागरणप्रतिनिधिकोबतायाकिविद्यालयमेंबच्चोंकीसंख्या204है।पहलेयहप्राथमिकविद्यालयथा,बादमेंउत्क्रमितमध्यविद्यालयकियागया।उनकेप्रयाससेदोमंजिलाभवनबनपाया।सड़कअभावमेंएमडीएमसामग्रीयहांतकलानेमेंदोगुनाकिरायादेनापड़ताहै।शिक्षकहोनेकेनातेमनोजकुमारकायहांकेलोगोंसेकाफीलगावहै।

स्वास्थ्यकीसमस्या

यहांकेलोगोंकीतबियतखराबहोतीतोघरेलूउपचारयाग्रामीणचिकित्सकोंकासहारालेतेहैं।यहांउपस्वास्थ्यकेंद्रहै।रातमेंअचानककिसीकीतबियतबिगड़जातीहैतोउनकाएकमात्रसहाराभगवानहीहोतेहैं।