लक्ष्य को लेकर परिश्रम करना ही वैज्ञानिक मनोवृत्ति

सिद्धार्थनगर:किसानइंटरकालेज,उसकाबाजार,सिद्धार्थनगरकेप्रधानाचार्यसंजयकुमारगुप्तानेबतायाकिवैज्ञानिकमनोवृत्तिकाव्यक्तिअनवरतएकलक्ष्यकीदिशामेंगहनपरिश्रमकरताहै।कभीकभीसमयज्यादालगताहै।वहहारताभीहै,लेकिनवहहारजीतकीपरवाहकिएबिनानिरन्तरआगेबढ़ताहै।वहमायूसनहींहोता।उसकीसोचसकारात्मकहोतीहै।कुछलोगअपनेकार्यमेंइतनेतल्लीनरहतेहैंकिमुख्यधारामेंआतेहीनहीं,इन्हेंहमजानहीनहींपाते,क्योंकियेनामकेनहींकामकेशौकीनहोतेहैं।येलोगधार्मिकबातोंकोभीतार्किकताकीकसौटीपरपरखनाचाहतेहैं,इसकाअर्थयेनहींकियेनास्तिकहोतेहैंबल्किइनकाउद्देश्यविचारोंकोवैज्ञानिकआधारदेनाहोताहै।विज्ञानकाअर्थसिर्फविषयज्ञानहीनहींबल्किविशिष्टज्ञानयाविशेषज्ञतासेग्रहणकरतेहैं।वैज्ञानिकमनोवृत्तिकाव्यक्तिहरविषय,मुद्देवतथ्यपरतार्किकतासेसोचताहैऔरसूक्ष्मविश्लेषणकरताहै।येहरमुद्देकोबारीकीसेसमझनाचाहतेहैंऔरबिनागहनअध्ययन,विश्लेषणकेकोईदावेनहींकरते,इनकेतथ्यप्रमाणिकवप्रयोगसिद्धहोतेहैं।मनुष्यएकविवेकशीलप्राणीहैऔरसोचनेकीशक्तिहीउसेएकदूसरेसेअलगकरतीहै।एकहीवस्तुकोलोगअलगअलगनजरिएसेदेखतेहैं।एकछोटाबच्चाखिलौनेसेखेलताहैतोदूसराउसेतोड़करउसकासूक्ष्मअवलोकनकरताहै।देखताहैकिउसमेंक्याक्याहै,वहवस्तुकोबड़ेध्यानसेदेखताहै,कईतरहकेसवालकरता,उसकेसवालतार्किकऔरआश्चर्यचकितकरनेवालेहोतेहैं।कुछबच्चोंमेंयहगुणजन्मजातहोतेहैंतोकुछघरपरयाआसपासकेलोगोंकेसकारात्मककार्यकोदेखकरउधरआकर्षितहोतेहैं,कुछबच्चोंमेंबड़ाहोनेपर'कुछकरनेकाजज्बाजागताहैऔरलोगोंकेकार्य,वक्तव्यऔरतल्लीनताकोदेखकरवेदेश,समाजवसंस्कृतिकेलिएकुछकरनाचाहतेहैं,जिससेवेइधरआकर्षितहोतेहैं।

भारतीयोंकीसोचप्राचीनकालसेहीसकारात्मकऔरवैज्ञानिकरहीहैऔरकईपुरानीधारणाएंवतथ्यआजभीसत्यप्रतीतहोतेहैं।कईप्रथाओंवपरम्पराओंकेवैज्ञानिकआधारहैं।ओटोहननेलिखाहैकिउसेपरमाणुबमबनानेकीप्रेरणावविचारमहाभारतकेब्रह्मास्त्रसेहीमिली।रावणकेपुष्पकविमानऔरगणेशजीकेगजमुखकेविषयमेंखोजेंअभीतकदेशविदेशमेंहोरहीहैं।शब्दभेदीबाणऔरआजकेस्वचालितविमानोंकोजोड़करदेखाजारहाहै,संजीवनीबूटीखोजकाविषयहै।कईप्राचीनऔषधियांआजभीआयुर्वेदमेंपाईजातीहैं।इसकोरोनाकालमेंभीविश्वहमारीतरफआयुर्वेदकेलिएदेखरहाथा,हमनेअपनेआपकोसाबितभीकियाऔरसराहनाभीपाई।दवाओंकेक्षेत्रमेंहमजर्मनीकोपछाड़करपहलेपायदानपरआगए।विश्वकेकईविश्वविद्यालयोंवसंस्थाओंमेंभारतीयोंकादबदबाबढ़ताजारहाहै।इसप्रकारहमारीप्राचीनसोचआजभीचरितार्थहै,अंतरबसइतनाहैकिकलहम''विज्ञानकोधर्मसेजोड़तेथेऔरआजधर्मकोविज्ञानसेजोड़नाचाहतेहैं।मनुष्यकोकिसीभीदिशामेंसकारात्मकसोचरखनाचाहिए।इसमेंसमाज,विज्ञानऔरदेशकाहितहोताहै।