क्या आप जानते हैं गणपति के अदभुत स्वरूप का रहस्य

कैसाहैश्रीगणेशकास्वरूप

गणपतिएकदन्तऔरचतुर्बाहुहैं।उनकेचारोंहाथअलगमुद्रामेंनजरआतेहैं,इनमेंसेएकवरमुद्रामेंहैऔरशेषतीनमेंवेक्रमश:पाश,अंकुश,औरमोदकपात्रधारणकरतेहैं।वेरक्तवर्ण,लम्बोदर,शूर्पकर्णतथापीतवस्त्रधारीहैं।गणपतिकोरक्तचंदनकातिलकलगाहोताहै।श्रीगणेशहिंदूधर्ममेंप्रथमपूजनीयदेवहैं,उन्हेंश्रीविष्णु,शिव,सूर्यतथामांदुर्गाकेसाथनित्यवंदनीयपंचदेवताओंमेंसम्मिलितकियागयाहै।कोईभीपूजायाधार्मिकऔरसामाजिकसंस्कारगणपतिपूजनकेबिनासफलनहींहोताहै।जबवेखुशहोतेहैंतोसमस्तदुखोंकानाशकरदेतेहैंऔररुष्टहोतेहैंतोहरकार्यमेंबाधाउत्पन्नहोजातीहै।परंतुक्याआपनेसोचाहैकिसमस्तदेवीदेवताओंकेपूजनकेपूर्वश्रीगणेशवंदनाक्योंहोतीहैऔरउनकास्वरूपबड़ेकान,छोटेनेत्र,विशालपेटऔरगजमुखजोसूंड़सेयुक्तहै,ऐसाक्योंहै। आजहमआपकोसमस्तअंगोंकाविश्लेषणकरकेबतातेहैंकिउनकायेअदभुतरूपहीउनकेगुणहैं,औरइन्हीअदृश्यगुणोंकेकारणप्रथमपूजनीयगणपतिआदिदेवहैंजिन्होंनेहरयुगमेंअलगअवतारलिया।

ॐकाप्रतीकहैंगणपति

वास्तवमेंशारीरिकविचित्रतामेंहीश्रीगणेशकेसारेगुणविद्यमानहैंतथाइनकेकारणहीशारीरिकआकारकेबावजूदगणेशप्रधान,सर्वप्रथमवंदनीयऔरपूजनीयहैं।उनकीशारीरिकसंरचनामेंविशिष्टवगहराअर्थछिपाहै।शिवमानसपूजामेंश्रीगणेशकोप्रणवअर्थातॐकहागयाहै।इसएकाक्षरब्रह्ममेंऊपरवालाभागगणेशकामस्तक,नीचेकाभागउदर,चंद्रबिंदुलड्डूऔरमात्रासूंडहै।उनकीचारभुजाएंचारोंदिशाओंमेंसर्वव्यापकताकीप्रतीकहैं,औरमनुष्यकोक्रियाशीलरहनेकासंदेशदेतेहुएबतातीहैंकिदोहाथोंकोचारभुजाओंकीतरहप्रयोगकरकार्यकोसमयपरसम्पन्नकरनाचाहिए।समस्तचराचरसृष्टिउनकेउदरमेंविचरतीहैइसीलिएवेलंबोदरहैं।साथहीयेविशालपेटबताताहैकिहरअच्छीऔरबुरीबातकोपेटमेंहीरखकरहजमकरलेंवैमनस्यनाफैलायें।गणेशजीकेबड़ेकानअधिकग्राह्यशक्तिऔरछोटीपैनीआंखेंतीक्ष्णअन्वेषीदृष्टिकीप्रतीकहैं।उनकीलंबीनाकयानिसूंडउनकेअतिबुद्घिशालीहोनेकाप्रमाणहैइसीलिएउन्हेंज्ञानऔरविद्याकादेवताभीकहाजाताहै।साथहीलंबीनाकआशयसम्मानितऔरप्रतिष्ठितहोनेसेभीहै।

मोदकऔरमूषकभीहैंविशेष

गणेशजीकाशरीरहीनहींउनकावाहनऔरप्रियभोजनभीअपनेमेंअलगविशेषतारखतेहैं।जैसेउनकावाहनअपनेआपमेंविलक्षणहै,मूषककहींसेभीउनकीकायाऔरविशिष्टताकेअनुकूलनहींहैलेकिनइसकेपीछेएकविशेषरहस्यछुपाहै।मूषककोचंचलताकाद्योतकमानागयाहै,इसदृष्टिकोणसेगणेशजीचंचलतापरसवारीकरकेउसेअंकुशमेंरखतेहैं।ऐसाहीरहस्यउनकेप्रियभोजनमोदकयानिलड्डूमेंभीनिहितहै।उनकेसंदेशकेअनुसारखाद्यपदार्थसिर्फसुस्वादहीनहींसहजउपलब्धऔरसुपाच्यभीहोनाचाहिए।