कुशीनगर का एक युवक, जिसकी राह में आड़े नहीं आता मजहब

गोरखपुर,जागरणसंवाददाता:नगरपालिकापरिषद,कुशीनगरकेवार्डशहीदभगतसिंहनगर(रामनगर)निवासीशाहरुखखाननेभजन-कीर्तनगायकीमेंमहारतहासिलकरयहसिद्धकरदियाहैकिश्रद्धामेंमजहबआड़ेनहींआताहै।खानविगतपांचवर्षोंसेयहकार्यकररहेहैं।खानकेपितास्व.हबीबुल्लाहखानढोलकबजाकरभजन-कीर्तनगातेथेऔरआल्हाभीसुनातेथे।वेइसफनमेंकाफीमाहिरथे।लोगउन्हेंमास्टरकहकरबुलातेथे।पिताकानिधनहुआतोखानलगभगडेढ़वर्षकेथे।घरमेंपिताकावाद्ययंत्रथा।एकभाईकोपितानेसिखायाथा।वहघरपरबजातेथेतोखानगातेथे।मातावभाईसेपिताकीगायकीकेबारेमेंसुनकरखानकोगायनकीप्रेरणामिली।

खानकीप्रतिभाकोपहचानकरकिशो‍रसिंहनेउन्‍हेंसिखाया

22वर्षीयखानकीबगलकेगांवमधवापुरकेकिशोरसिंहसेमुलाकातहुई।सिंहगांवकेहीमंदिरमेंप्रतिमंगलवारकोकार्यक्रमकरतेथे।खानवहांजानेलगे।सिंहनेखानकीप्रतिभाकोपहचानकरअपनेसाथरखाऔरसिखाया।खान,सिंहकोगुरुमानतेहै।बतायाकिगुरुकेस्वर्गवासीहोजानेकेबादवहप्रतिमंगलवारकोमधवापुरमेंकीर्तनकरातेहैं।मातानाजमाखातूनकेचारबेटोंमेंशाहरुखसबसेछोटेहैं।दोभाईसऊदीरहतेहैं,जबकिएकभाईसाथरहकरगृहस्थीसंभालतेहैं।इनकेइसकार्यमेंपरिवारभीपूरासाथदेताहै,जाति-मजहबकीबातनहींकरता।मांभीअपनेबेटेसेनियमितभजनसुनतीहैं।अगल-बगलबेटेकाकार्यक्रमहोताहैतोभीसुननेजरूरजातीहैं।शाहरुखकोमंदिरजानेसेभीकोईगुरेजनहींहै।

देवी-देवताओंकीकरताहैविधि-विधानसेपूजा

हिंदूदेवी-देवताओंकीपूरेविधि-विधानसेपूजाकरताहैंतोइनकेप्रतिअटूटविश्वासभीहै।कहतेहैंकिसभीधर्ममानवताकीसीखदेतेहैं,बांटनेकाकार्यतोइंसानकरतेहैं।