कसौटी पर खरा उतरना के लिए समय की भाषा सीखना जरूरी

कुंदनकुमार,सहरसा:आजकेपरिवेशमेंजबपाश्चात्यसंस्कृतिकेतरफयुवाओंकातेजीसेझुकावहोरहाहै।ऐसेसमयमेंअपनीसंस्कृतिअक्षुण्णरखनाऔरनईपीढ़ीमेंसंस्कारभरनासबसेबड़ीचुनौतीहै।एकलेखक,शिक्षक,चिकित्सकएवंज्योतिषवमार्गदर्शककेरूपमेंडा.अरुणकुमारजायसवाललगभगडेढ़दशकसेइसमहत्तीजिम्मेवारीकोसंभालरहेहैं।वेयुवावर्गकोसंस्कारितकरनेमेंअपनेआपकोपूरीतरहसमर्पितकरचुकेहैं।

गायत्रीशक्तिपीठकेप्रशालमेंउनकेद्वाराहरसप्ताहमुफ्तलगभग250युवा-युवतियोंकाव्यक्तित्वपरिष्कारकक्षालगायाजाताहै।कोरोनाकालमेंभीयू-ट्यूबकेमाध्यमसेरविवारकोसैकड़ोंलोगउनकीकक्षामेंजुड़तेहैं।इसकेअलावाडा.अरूणद्वाराबालसंस्कारशाला,स्वास्थ्यसंव‌र्द्धन,पर्यावरणसंरक्षण,साहित्यसंस्कृतिप्रसारऔरस्वालंबनकार्यक्रमोंकेमाध्यमसेभारतीयसंस्कृतिरक्षाकेलिएयुवाओंकोप्रेरितकररहेहैं।इसकेलिएयुवाओंवआमलोगोंकोअनवरतजागरूकभीकियाजारहाहै।

दिव्यकार्यशालाकेजरिएसिखातेहैंजीवनजीनेकीकला

डा.अरुणकुमारजायसवालवर्ष2015सेलगातारमुफ्तडिवाइनवर्कशाप(दिव्यकार्यशाला)आयोजितकरतेहैं।उनकामाननाहैकिछात्रजीवनमेंऐसेकईमहत्वपूर्णविषयहै,जिनकीपढ़ाई,नित्यपाठ्यक्रमकेअत्यधिकबोझयाकिसीअन्यकारणसेबच्चेपूरानहींकरपातेहैं।डिवाइनवर्कशापइसकमीकोबखूबीपूराकरसकताहै।इसवर्कशापमेंउनकेद्वारास्वास्थ्यप्रबंधन,जीवनप्रबंधन,समयप्रबंधन,जीवनजीनेकीकला,व्यक्तित्वपरिष्कार,छात्रोंमेंमनोबलकाविकास,आदर्शआहार-व्यवहारनैतिकशिक्षाआदिकाज्ञानदियाजाताहै।इससेहजारोंछात्र-छात्रालाभांवितहुएहैं।डा.अरूणकुमारजायसवालकहतेहैंकिसंस्कृतिहै,परिष्कृति।परिष्कृतिकईरूपोंसेहोतीहै।सिर्फपहनावेसेनहीं,मनुष्यकामनुष्यताकासमग्रतामेंपरिष्कारहै।कहाकिसमग्रताखानपानमें,वेशभूषामें,व्यवहारमेंबातचीतमें,आपसीसंबंधोंमेंपारिवारिकतामें,सामाजिकतामें,राष्ट्रीयताववैश्विकतामेंहोसकताहै।इतनेंरूपोंमेंहीमनुष्यकोहमसमग्रतामेंसोचसकतेहैं।वेकहतेहैंकिभारतवैसेविश्वगुरूनहींबना।भारतीयसंस्कृतिपूरेविश्वकोअपनापरिवारमानताहै,जबकिपाश्चात्यसंस्कृतिविश्वकोबाजारमानतीहै।हमारेयहांवसुधैवकुटुंबकमकीसंस्कृतिहै।उनकामाननाहैकिभारतविश्वसंस्कृति,विश्वगुरूफिरसेबने,इसकेलिएएकहीतरीकाहैअनुसंधान।चिरपुरातनकोचिरनवीनबनानेकीएकमात्रकड़ीहैअनुसंधान।अनुसंधान,प्रक्रियामें,विमर्शमें,सेमिनारमें,लेखोंमेंहोनाचाहिए।समयकीकसौटीपरखराउतरनाहैतो,इसकेलिएसमयकीभाषासीखनेकीजरूरतहै।कहाकिइसकेलिएसमाजकेसभीप्रबुद्धलोगोंकोआगेआनाहोगा।