खुले में न जाएं दीदी-अम्मा, इसलिए छात्र बना राजगीर

संवादसूत्र,गोंडा:समय-अपराहन3.00बजे।स्थान-मनहनागांव।यहांएकगड्ढेकेबाहरमहिलाईंटधुलकरचुनाईकेलिएदेरहीथी।गड्ढेकेपासपहुंचनेपरअंदरएकबालकदिखाई।जबपूछागयाकियेकामक्योंकररहेहो?जवाबमिला-खुलेमेंअम्माकोजानेमेंदिक्कतहोतीहै।बहनेंभीहैंऔरपिताजीकीतबीयतखराबहै।प्रधानजीनेसामग्रीतोदिलवादी,लेकिनमजदूरकेलिएपैसेनहींहैं।इसलिएमैंगांवमेंबनरहेशौचालयकोदेखकरअपनाशौचालयबनारहाहूं।आत्मविश्वाससेभरायहजवाबछठवींमेंपढ़नेवालेकमलेशकेहैं।स्कूलोंमेंछुट्टियांचलरहीहैं,ऐसेमेंएकबेटेकामांकेलिएइतनाप्रेमकिसीबड़ीमिसालसेकमनहींहै।मांगुलेलाखुदईंटवसामग्रीबेटेकोशौचालयनिर्माणकेलिएदेतीहुईंदिखाईपड़ीं।जिलाप्रशासनद्वाराचलाएजारहेमिशन-32अभियानकेतहतशौचालयबनवाएजारहेहैं।तरबगंजकेमनहनागांवमेंरहनेवालेबदलूकेपरिवारमेंपांचबेटेवचारबेटियांहैं।बड़ाबेटासुरेशपत्नीकेसाथदिल्लीमेंमजदूरीकरताहै।जबकिछोटाबेटाअमरेशमजदूरीकरताहै।बदलूस्वयंबीमारीसेपीड़ितहोनेकेबावजूदलकड़ीकीचारपाईबनाकर

आजीविकाचलारहेहैं।बड़ीबेटीराधाकीशादीहोचुकीहै।जबकितीनबेटियोंकीअभीशादीनहींहुईहैं।भाइयोंमेंतीसरेनंबरपरकमलेशहै।वहगांवकेहीस्कूलमेंछठवींकीपढ़ाईकररहाहै।गांवमेंनिरीक्षणकरनेपहुंचेएडीओपंचायतदामोदरशुक्लनेछात्रकेहौसलेकोसलामकरतेहुएबधाईदी।सीडीओदिव्यामित्तलकाकहनाहैकिछात्रकाप्रयाससराहनीयहै।डीपीआरओसेपूरीरिपोर्टमांगीजारहीहै।