कभी रामपुर से मजदूरी करने गए थे कनाडा, अब प्रमुख उद्यमियों में है गिनती

मुरादाबाद(मुस्लेमीन)।सपनोंकीउड़ानसिर्फसोचनेभरसेनहींहोती।मेहनतकेपंखलगाकरखुलेआसमानउडऩेकाहौसलाभीजरूरीहोताहै।खून-पसीनेसेसींचनाहोताहैआगेबढऩेका,कुछकरगुजरनेकाजज्बा।यहकरगुजरेतोयकीनजानिए,यश-वैभवकदमचूमतेहैैं।कामयाबीकाशिखरनसीबहोताहै।साथहीखुशहालहोताहैपरिवारऔरदेश...वोतोखुदबखुदआगेबढ़जाताहै।मिलककेमनप्रीतसिंहढिल्लननेमेहनतकीइन्हींमिसालकोनकेवलअपनायाबल्किहरपलजीया।कनाडामेंट्रकचलाकरकारोबारकीशुरुआतकीऔरआज...तरक्कीकीगाड़ीसरपटदौड़रहीहै।परदेशमेंकामयाबीकीइबारतलिखरहेहैैं,उद्यमीबनकर...।

यहहैप्रखरअप्रवासीकीसफलकहानी...।रामपुरमेंमिलककेबेगमाबादगांवकेमनप्रीतसिंहढिल्लनकापरिवारकरीबतीनदशकपहलेतकबेहदसामान्यथा।किसीतरहगुजाराचलरहाथा,मगरउनकेमनमेंहमेशाहीकुछकरगुजरनेकेख्वाबमचलतेरहे।देशमेंकोईरास्तानहींसूझातो27सालपहलेरोजगारकीतलाशमेंकनाडाकीडगरपकड़ी।परदेशपहुंचेतोमुश्किलोंकापहाड़सामनेखड़ाथामगरहिम्मतनहींहारी।मजदूरीसेशुरुआतकी।ट्रकचलाया।रात-दिनदेखेबिनासड़केंनापतेरहे।20-20घंटेड्राइविंगकी।धीरे-धीरेउनकीमेहनतरंगलाई।दूूसरेकाट्रकचलाते-चलातेट्रांसपोर्टरबनगए।आजउनकेपासएकदोनहीं,बल्कि80ट्रकहैं।फाइवस्टारहोटलकेमालिकहैैं। आठहजारवर्गमीटरसेअधिकमेंआलीशानकोठीबनीहै।

परदेशमेंबसे,अपनोंकासाथनहींछूटा

मनप्रीतसिंह1993मेंकनाडापहुंचे।उम्रतबमहज20बरसथी।कामयाबीकेशिखरपरपहुंचनेकेबादभीउनकादेशसेजुड़ावनहींछूटा।बेगमाबादगांवकेहीउनकेमामासरदारलखविंदरसिंहउनकेपासकनाडाजातेरहतेहैं।वहबतातेहैंकिमनप्रीतनेकड़ासंघर्षकियाहै।ट्रकचलाकरउन्होंनेइतनीरकमजमाकरलीकिअपनापहलाट्रकमहजचारसालमेंखरीदलिया।इसकेबादसिलसिलाबढ़तागया।कनाडाकेटोरंटोशहरमेंउनकाट्रकस्टॉपहै।फाइवस्टारहोटलकेमालिकभीहैं।खुद केचारगैसपंपहैं।लखविंदरसिंहकहतेहैंकिआजवहभलेकनाडाकेहीनागरिकबनगएहैं,मगरअपनेदेशकोनहींभूले।

युवाओंकीकरतेहैंमदद

मनप्रीतअपनेइलाकेकानामरोशनकररहेहैं।साथहीयुवाओंकेलिएप्रेरणाकास्रोतबनेहैं।क्षेत्रकेकईयुवारोजगारकेलिएकनाडागएहैं,जिनकीमनप्रीतसिंहनेबहुतमददकी।वेभीआजखूबपैसाकमारहेहैं।मनप्रीतबेगमाबादभीसालदोसालमेंआतेरहतेहैं।युवाओंकोसंघर्षकरआगेबढऩेकीसीखदेतेहैं।