जयंती विशेष: 62 के युद्ध में चीन से हार पर दिनकर ने संसद में सुनाई कविता तो तत्कालीन प्रधानमंत्री ने झुका लिया अपना सिर

पटना.गंगाकिनारेबसेगांवसिमरियाजिलाबेगूसरायकेलालराष्ट्रकविरामधारीसिंहदिनकर(RamdhariSinghDinkar)किसीपरिचयकेमोहताजनहींहैं.हरकोईउनकेविद्धताकाकायलहै,इसलिएकुछऐसीबातोंकेबारेमेंबतातेहैंजोबहुतकमलोगोंकोपताहै.रामधारीसिंहदिनकरस्वभावसेसौम्यऔरमृदुभाषीथेलेकिनजबबातदेशकेहित-अहितकीआतीथीतोवोबेबाकटिप्पणीसेकतरातेनहींथे.तत्कालीनप्रधानमंत्रीजवाहरलालनेहरू (JawaharLalNehru)नेरामधारीसिंहदिनकरकोराज्यसभाकेलिएनामितकियालेकिनबिनालागलपेटकेउन्होंनेदेशहितमेंनेहरूकेखिलाफआवाजबुलंदकरनेमेंहिचकिचाहटनहींदिखाई.

दिनकरकेकवितापाठसेजबसंसदसन्नहोगया

1962मेंचीनसेहारकेबादसंसदमेंदिनकरनेकवितापाठकिया…

“रेरोकयुद्धिष्ठिरकोनयहांजानेदेउनकोस्वर्गधीर

फिरादेहमेंगांडीवगदालौटादेअर्जुनभीमवीर”

इसकवितापाठकोसुनतत्कालीनप्रधानमंत्रीनेहरूकासिरझुकगयाथा…येघटनाआजभीभारतीयराजनीतिकेइतिहासकीचुनिंदाक्रांतिकारीघटनाओंमेंसेएकहै…

नेहरूकोदिनकरकीदोटूक

हिंदीकेराष्ट्रकविनेएकबारराज्यसभामेंनेहरूकीओरइशाराकरतेहएकहाकि,“क्याआपनेहिंदीकोराष्ट्रभाषाइसलिएबनायाहै,ताकिहिंदीभाषियोंकोरोजअपशब्दसुनाएजासकें?”येसुनकरनेहरूसहितसभामेंबैठेसभीलोगहैरानरहगए.20जून1962कावोदिनथा.उसदिनदिनकरराज्यसभामेंखड़ेहुएऔरहिंदीकेअपमानकोलेकरबहुतसख्तस्वरमेंबोले.उन्होंनेकहादेशमेंजबभीहिंदीकोलेकरकोईबातहोतीहै,तोदेशकेनेतागणहीनहींबल्किकथितबुद्धिजीवीभीहिंदीवालोंकोअपशब्दकहेबिनाआगेनहींबढ़ते.पतानहींइसपरिपाटीकाआरम्भकिसनेकियाहै.दिनकरनेकहाकि,उनकाख्यालहैकिइसपरिपाटीकोप्रेरणाप्रधानमंत्रीसेमिलीहैऔरपतानहीं,तेरहभाषाओंकीक्याकिस्मतहैकिप्रधानमंत्रीनेउनकेबारेमेंकभीकुछनहींकहा,किन्तुहिंदीकेबारेमेंउन्होंनेआजतककोईअच्छीबातनहींकही.येसुनकरपूरीसभासन्नरहगई.सभामेंगहरासन्नाटाछागया.दिनकरनेफिरकहा-‘मैंइससभाऔरखासकरप्रधानमंत्रीनेहरूसेकहनाचाहताहूंकिहिंदीकीनिंदाकरनाबंदकीजाए.हिंदीकीनिंदासेइसदेशकीआत्माकोगहरीचोटपहंचतीहै.

परिचयऔरपुरस्कार

दिनकर’जीकाजन्म23सितंबर1908कोबिहारकेबेगूसरायजिलेकेसिमरियागांवमेंहुआथा.उन्होंनेपटनाविश्वविद्यालयसेइतिहासराजनीतिविज्ञानमेंबीएकिया.उन्होंनेसंस्कृत,बांग्ला,अंग्रेजीऔरउर्दूकागहनअध्ययनकियाथा.बीएकीपरीक्षापासकरनेकेबादवोएकविद्यालयमेंअध्यापकहोगये.बिहारसरकारकीसेवामेंसब-रजिस्ट्रारऔरप्रचारविभागकेउपनिदेशककेपदपरकामकिया.मुजफ्फरपुरकेएलएसकॉलेजमेंहिन्दीकेविभागाध्यक्षरहे,भागलपुरविश्वविद्यालयकेउपकुलपतिकेपदपरकार्यकियाऔरउसकेबादभारतसरकारकेहिन्दीसलाहकारबने.उन्हेंपद्मविभूषणकीउपाधिसेअलंकृतकियागया.उनकीपुस्तकसंस्कृतिकेचारअध्यायकेलियेसाहित्यअकादमीपुरस्कारऔरउर्वशीकेलियेभारतीयज्ञानपीठपुरस्कारप्रदानकियागया.24अप्रैल1974कोवोहमसबकोछोड़करबहुतदूरचलेगए.

दिनकरकीचित्रकाडाकटिकट

देशकीआजादीकीलड़ाईमेंभीदिनकरनेअपनायोगदानदियाथा.वोगांधीजीकेबड़ेमुरीदथे.हिंदीसाहित्यकेबड़ेनामदिनकरउर्दू,संस्कृत,मैथिलीऔरअंग्रेजीभाषाकेभीजानकारथे.वर्ष1999मेंउनकेसम्मानमेंभारतसरकारनेडाकटिकटजारीकिया.अपनीलेखनीकेमाध्यमसेदिनकरसदैवआमजनोंकेबीचअमररहेंगे.

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