जमुआवां गांव में कभी थे 52 पोखरा, अब खत्‍म होगा भूजल स्रोत, तालाब संरक्षण की दिशा में नहीं हो रहा प्रयास

जागरणसंवाददाता,औरंगाबाद।जलहीजीवनहैऔरपानीकोबर्बादीसेबचाएंजैसेलुभावननारेतोसुननेऔरपढ़नेकोतोबहुतमिलतेहैं,लेकिनकीमतीजलकेसंरक्षणकेप्रतिनतोजनतागंभीरहैऔरनहीप्रशासन।नहाने,धोने,सिंचाईकरने,पूजापाठसेलेकरसभीसंस्कारोंकीआस्थासेजुड़ेताल,पोखरे,झीलोंवनदियोंकेअस्तित्वपरसंकटमंडरानेलगेहैं।चिंताकीबातयहहैकिभूजलस्रोतखत्महोतेजारहेहैंऔरहमेंफिक्रनहींहै।यहहालतबहैजबतालाबबचानेकोसर्वोच्चकाआदेशहै।

इसकेबादभीजलसंरक्षणकेलिएबनेकानूनोंकीसरकारीकारकुनोंकोफिक्रनहींहै।एकसमयथाजबतालाबहीप्राणियोंकेजीवनकाआधारथे।इंसानवबेजुबानोंकेलिएतालाबरोजमर्रामेंउपयोगीमानेजातेथे।वर्षांकेदिनोंमेंलबालबहोनेवालेइनतालाबोंसेपूरासालजलकाप्रयोगकियाजाताथा।येतालाबभूमिगतजलकास्रोतभीमानेगएहैं।प्राचीनकालमेंधार्मिकस्थानोंकेसमीपतालाबकानिर्माणजरूरकियाजाताथा।असलमेंतालाबबनानेकामकसदयहीथाकिलोगोंकोपानीकीमहत्ताकाअहसासहोसके।समयकेकालचक्रमेंलोगोंनेइनतालाबोंकीमहत्ताकोनजरअंदाजकरदिया।दैनिकजागरणद्वारातालाबोंकोसंभालनेकेलिएलोगोंकोजागृतकरनेकेलिएलगातारअभियानचलायाजातारहाहै।

जलहीजीवन,संरक्षणजरूरी

जलहीजीवनहैजीवनकोबचानेकेलिएजलबचानेकीजरूरतहै।लगातारगिरतेजलस्तरसेसभीवाकिफहैं।पानीकीकमीसेआमआदमीकेसाथसाथपशुपक्षीभीपरेशानहैं।वाटररीचार्जिगकेलियेतालाबतोबनाएगएलेकिनउनकाउपयोगनहींहोपारहाहै।अन्यस्त्रोतभीजमीनकोतरनहींकरपारहेहैं।पानीकायहसंकटदिनोंदिनगहराताजारहाहै।यदिइसतरफअतिशीघ्रध्याननहींदियागयातोआनेवालेसमयमेंहालातबदसेबदतरहोतेजाएगें।पानीकेलिएलोगएकदूसरेकीजानलेनेसेभीनहींचूकेंगे।

उल्लेखनीयहैबीतेकईवर्षोसेकमबारिशहोनेकेकारणजलस्तरलगातारगिरताहीजारहाहै।जलस्तरगिरनेसेमनुष्य,पशु,पक्षी,पेड़पौधेसभीआहतहैं।ऊपरहरेभरेदिखनेवालेपेड़अंदरसेसिसकरहेहैं।छोटेछोटेअंधड़ोंमेंपेड़उखड़करजमीनपरगिरजातेहै।क्योंकिपेड़ोंकोजमीनकेअंदरसेनतोनमीमिलरहीहैऔरनहीपोषकतत्व।ग्रामीणअंचलोंमेंजलस्तरगिरनेकेकारणकुएतोपहलेहीसूखगएहैं।गर्मीके मौसममेंगर्मीबढ़नेकेसाथकहींकहीं कईहैंडपम्पोंनेपानीदेनाछोड़देताहै। आसपासकेजिलोंमेंबहनेवालीनदियोंमेभीपानीकमहै।विडंबनायहहैएकतरफतोजलस्तरनीचेगिरताजारहाहैऔरदूसरीतरफलोगपानीकीजमकरबर्बादीकररहेहैं।हालांकिइसवर्षबारिशहुईहै।

पानीकीकीमतकबसमझेंगेलोग

मानवजीवनकीसरंचनापंचतत्वोंसेहुईहै।इनपंचतत्वोंमेंजलकीमहत्ताइतनीहैकिबिनाजलकेजीवनहीअसंभवहै।यहमानवजीवनकेलिएहीनहींबल्किमानवजीवनकेउनमूलतत्वोंकेलिएभीउतनाहीआवश्यकहैजोजीवनकेपोषकहैं।भू-वैज्ञानिककेअनुसारआनेवालेकुछवर्षोमेंबूंद-बूंदपानीकेलिएलोगोंकोतरसनापड़ेगा।बावजूदइसकेधड़ल्लेसेहोरहापानीकादुरुपयोगरुकनेकानामनहींलेरहा।सवालयहहैकिपानीकीकीमतलोगकबसमझेंगे।जोस्थितिहैउसमेंआनेवालासमयपानीकेलिहाजसेबेहदचिंतनीयहै।जलहैतोकलहै'या'जलहीजीवनहै'केनारोंसेबाहरनिकलकरजलकोहकीकतमेंसंरक्षितकरनेकेलिएसार्थकप्रयासकरनेहोंगे।

52सेघटकरबचेहैंआठ

प्रखंडकेजमुआवांगांवमेंकभी 52पोखराथेजोघटकरअबसिर्फ8पोखराहीबचपाएहैं।बाकीसभीकाअस्तित्वखत्महोचुकाहै।कईअतिक्रमणकेशिकारहोगए।पिंडतालाब,कुड़वातालाब,अहरीपोखरतालाब,हथिबोरतालाब,देवीबीघातालाबआदितालाबभीअगरसंरक्षितनहींकियागयातोइसकेअस्तित्वभीधीरेधीरेखत्महोजाएगा।पिंडतालाबगांवकाबड़ातालाबमानाजाताहै,इसकेभीकिनारोंपरअतिक्रमणकियाजारहाहै।ग्रामीणोंकेपहलपरइसेबचानेकेलिएघाटकानिर्माणकरादियागयाहै,ताकिकोईअतिक्रमणनकरसके।स्थानीयलोगोकाकहनाहैकिपहलेइसगांवमेंकईपोखराथापरधीरेधीरेसभीकाअस्तित्वखत्महोगयाजोबचाहुआहैउसकासंरक्षणकीजरूरतहै।

बुजुर्गलोगबतातेहैंअधिकतरगांवोंमें52तालाबमिलजातेथे,इसकाअलगमहत्तारहतीथीपरविकासकेसघनमेंइसकाअस्तित्वहीखत्महोगया।ग्रामीणअंकितकुमार,कंचनकुमार,नीतीशकुमार,अभिषेककुमारसमेतकाकहनाहैकिअधिकतरकर्मकांडवधर्मिकअनुष्ठानवसंस्कारभीउनतालाबवपोखरोंकेकिनारेहींसंपन्नहोतेथे।लेकिन,समयकेसाथतालाबोंपरनिजीस्वार्थवसंकुचितमानसिकताकीनजरलगगई।अबकईतालाबोंकाअस्तित्वसमाप्तहोनेकेकगारपरपहुंचगयाहै।तालाबआहराकभीगांवोंकीआनबानशानहोतेथे।इसकेपानीसेखेतोंकीसिंचाईवअन्यबहुतसेकार्यमेउपयोगहोतेथेपरलोगतालाबकेमहत्वकोसमझनहींपाएवउसकेजमीनपरअतिक्रमणकरतेचलेगए।