जमाने से बगावत है तो उल्फत क्यों नहीं करते..

संवादसूत्र,लम्भुआ(सुलतानपुर):स्थानीयकस्बेमेंएकशामबाबासाहबकेनामकार्यक्रममेंकविसम्मेलनकाआयोजनकियागया।जिसमेंमौजूदावक्तपरअपनीरचनापेशकरतेहुएसंचालकविक्टरसुल्तानपुरीनेकहाकि'क्योंसोचतेहो,संसदमेंव़फादारबैठेहैं।वहांतोचंबलकेसरदारबैठेहैं..।'सुनायातोपंडालतालियोंकीगड़गड़ाहटसेगूंजउठा।

कविसम्मेलनकोआगेबढ़ातेहुएहास्यकविराजेशप्रतापगढ़ीनेफरमाया-मेरादिलहै,जिओकासिमतोनहीं।जोछ:महीनेतलकफ्रीमेंमिले।फतेहपुरकेशिवशरणबंधुनेकहा-कितनीमुश्किलयारउठानीपड़तीहै।छतपड़नेसेपहलेदीवारउठानीपड़तीहै।कवियित्रीकोमलनाजुकनेपेशकिया-जमानेसेबगावतहैतोउल्फतक्योंनहींकरते।अगरलगताहैडरतोहिम्मतक्योंनहींकरते।हास्यकविशोलागोंडवीनेमौजूदामाहौलकाजिक्रकरतेहुएकहाकि-मेराखौफहै,पुलिसक्याकरेगी,मेराबापमंत्रीजोहै।मिर्जापुरकीकवियित्रीविभा¨सहनेकहाकि-कोईप्यारकरनासीखेंगुलाबकेफूलोंसे।जोटूटकरभीदोदिलोंकोजोड़देतेहैं।नायाबबलियाबीनेबाबासाहबकाजिक्रकरतेहुएकहाकि-जबतक¨जदाहैअंबेडकरकासंविधान।नटूटसकेगा¨हदुस्तान।शायरमकदूमनेमांकीममताकीचर्चाकरतेहुएकहाकि-जबदुलारकरतीहोचिड़ियाअपनेबच्चोंको।ऐसेवक्तमेंतुमउनकाशिकारमतकरना।शोभनाथफैजाबादीनेपेशकिया-मैंसचकहताहूंमुझकोडॉटलेतेहैं।पढ़ातेकुछनहीं,जरूरतपड़ेतोअंगूठाकाटलेतेहैं।प्रमोदपंकजनेजेलमेंबंदबाबागुरमीतकीयादकरतेहुएपैरोडीपेशकी-बाबागुरुमीतने,हांहनीप्रीतकोऐसीघुट्टीपिलाई,मजाआगया..।कविसम्मेलनमेंबतौरमुख्यअतिथिपूर्वविधायकभगेलूरामनेकार्यक्रमकीसराहनाकरतेहुएकहाकिइसतरहकेआयोजनसेसामाजिकभेदभावदूरहोतेहैं।उन्होंनेमौजूदासमयमेइसकीजरूरतबतायी।विशिष्टअतिथिकेरूपमेंशकीलअहमद,राजमणिवर्मा,राजबहादुरवर्मा,डॉ.जयभीमबौद्धमौजूदरहे।जबकिभोरतकचलेकार्यक्रममेंभारीभीड़जुटीरही।जिसमेंरजिस्ट्रारकानूनगोरामखेलावन,दिलीपआदिमौजूदरहे।