जीवन धर्म को समझने की जरूरत, सबको पता है कि जीवन का अंतिम स्टेशन श्मशान घाट

रेखाशाहआरबी।जिंदगीकीदौड़मेंसबदौड़रहेहैं।दौड़भीऐसीकिनदाएंदेखनानबाएं।एकअंतहीनदौड़।किसीकेपासफुरसतनहींहैदूसरोंकोउठानेकी।एकपलरुककरउसकेघावपरमरहमलगानेकी,क्योंकिखुदकोभीतोफुरसतनहींहैदूसरोंकोसमझनेऔरसमझानेकी।हरकोईअपनेभीतरएकबड़ाशून्यऔरगहराअंधेरापालेहुएहैंजिसमेंवहनितांतअकेलाऔरअकेलेपनकेसाथरहरहाहै।इसभौतिकवादीदुनियामेंकिसीकोकिसीसेमतलबनहींहै।छोटेशहरोंमेंतोथोड़ाठीक-ठाकहै,लेकिनबड़ेशहरोंमेंबगलकेफ्लैटमेंक्याहोरहाहैकोईनहींजानताऔरनकिसीसेमतलबहै।

आजकललोगअपनेलक्ष्यऔरउद्देश्यकोलेकरइतनेसमर्पितहैंकिबसउसउद्देश्यकेहोकररहगएहैं,जिसकेकभी-कभीबड़ेहीभयावहपरिणामदेखनेकोमिलतेहैं।कुछसमयपहलेकीघटनाहै।तिरुपतिकीएकशिक्षिकाकीगिरकरमौतहोजातीहै।उसकाबच्चासमझनहींपाताहैकिउसकीमांअबइसदुनियामेंनहींहै।जबशरीरसेदुर्गंधआनीशुरूहोतीहै,तोबच्चामामाकोफोनकरताहै।महिलाकेपरिवारमेंमां-बेटेहीथे।सोचनेवालीबातहैकिसारेरिश्तेभरेपड़ेथे,परकिसीकेपासइतनीफुरसतनहींथीकिइनपांचदिनोंमेंकोईउसकेपासफोनकरता।यदिकरतातोउसेजरूरपताचलजाताहै,लेकिनसबअपनीदुनियामेंव्यस्तहैं।

ऐसाक्यापानाहैकिखुदकेअस्तित्वकोहमलोगखोतेजारहेहैं।इंसानकेबजायमशीनबनतेजारहेहैं।एकसंवेदनाशून्यमशीन,जोतबतकचलरहीहैजबतकउसकेअंदरकुछखराबीनआजाए।ईश्वरनेक्याहमलोगोंकोइसीलिएजीवनदियाहै?क्याजीवनकायहीलक्ष्यहै?याइससेइतरभीबहुतकुछपायाजासकताहै?सबकोपताहैकिजीवनकाअंतिमस्टेशनश्मशानघाटहैऔरवहांपरकुछलेकरनहींजायाजासकता।जिसजीवनकेसफरकोआनंददायीबनायाजासकताहै,उसजीवनकोहमलोगोंनेआनंदपर्वकेबजायएकनीरससफरबनादियाहै।हमलोगोंसेअच्छेतोजानवरहैं।कमसेकमवेजितनीहीभावनाएंप्रकटकरसकतेहैंउतनीव्यक्ततोकरतेहैं।हमइंसानअपनेचेहरेपरनकलीचेहरालगाकरअपनामूलअस्तित्वभूलचुकेहैं।

यदिहमअपनेमनकीस्थितिकोथोड़ाबदलें।स्वार्थकेबदलेसबसेप्रेमकरनेलगें।हृदयमेंकरुणाकोस्थानदेनेलगें।लोभकातिरस्कारकरनेलगें।अपनातथादूसरोंकीभावनाओंकाख्यालरखेंतोपरिस्थितियांअपनेआपबदलजाएंगी।दुनियाअच्छीलगनेलगेगी।ईश्वरयदिइसधरतीपरकहींहै,तोवहसजीवरूपसेहमसबइंसानोंकेअंदरहीहै।बसइसभावनाकोसमझनेकीजरूरतहै।फिरजिंदगीनैराश्यपर्वकेबजायहर्षकापर्वबनजाएगी,जिसमेंआत्मिकआनंदहोगा।

(लेखिकास्वतंत्रटिप्पणीकारहैं)