Interview: युद्ध की दास्तां के साथ मानवीय पहलू दिखाना जरूरी: अभय देओल

स्मिताश्रीवास्तव,मुंबईlभारतीयसैनिकोंकेसाहसिकऔरहैरतअंगेजकारनामोंकोदर्शानेमेंफिल्ममेकरखासीदिलचस्पीलेरहेहैं।डिज्नीप्लसहॉटस्टारपरआजसेसच्चीघटनाओंसेप्रेरितशो'1966-दवॉरइनदहिल्सस्ट्रीमिंगकेलिएउपलब्धहोगा।लगभग60सालपहलेभारतीयसैनिकोंनेलद्दाखकीरक्षाकेलिएअदम्यसाहसएवंबहादुरीकापरिचयदियाथा।यहउन125सैनिकोंकीकहानीहै,जिन्होंनेहिम्मतकेसाथ3000चीनीसैनिकोंकासामनाकिया।10एपिसोडकीइससीरीजकानिर्देशनमहेशमांजरेकरनेकियाहै। वेबसीरीजमेंअभयदेओलनेसैन्यअधिकारीकीभूमिकानिभाईहै।फिलहालवहलॉसएंजिलिसमेंहैं।उनसेवीडियोकॉलपरबातचीतकीस्मिताश्रीवास्तवने-

आपसत्यघटनासेप्रेरितशोकररहेहैं।ऐसेमेंकिसप्रकारकीजिम्मेदारीउनसैनिकोंऔरउनकेपरिवारकेप्रतिमहसूसकरतेहैं?

यहशोसच्चीघटनापरआधारितहै,लेकिनहमनेकिरदारोंकोफिक्शनलबनायाहै।सैनिकोंकाजीवनतोवहीहै।हमनेउनकेजीवनमेंघटितघटनाओंकेसाथक्रिएटिवलिबर्टीभीलीहै।हमाराशोसिर्फयुद्धपरफोकसनहींकरताहै।

सैनिकोंऔरउनकेपरिवारपरक्याबीतीहै,उनकेघरेलूहालातकैसेरहेहैं,उन्हेंकिनअनुभवोंसेगुजरनापड़ाहै?

शोमेंइनपहलुओंकोगहराईसेदर्शायागयाहै।दोनोंहीओरकेसैनिकोंकीनिजीजिंदगीभीहोतीहै।दोनोंकोएकसमानविभीषिकाकासामनाकरनापड़ताहै।हमनेउनभावनात्मकपहलुओंकोदर्शायाहै।

महेशमांजरेकरकेसाथशोकोलेकरकिसप्रकारकीचर्चाहुईथी?

मुझेशुरुआतमेंहीआइडियाबहुतपसंदआयाथा।यहबॉलीवुडफिल्मनहींहै।हमेंयहांपरजबरनगानायाआइटमसांगडालनेकीजरूरतनहींथी।हरकिरदारइसमेंअहमहै।महेशजीनेइसेकरकेदिखायाहै।उनकानिर्देशनकालंबाअनुभवहै।जबकोईइंडिपेंडेंटसिनेमायानॉनफार्मूलाफिल्मनहींबनारहाथातबभीवहउसमेंकोशिशकररहेथे।उन्होंनेकमर्शियलफिल्मेंभीअलगअंदाजमेंबनाईथीं।मैंतोउनकेसाथकामकरनेकोलेकरएक्साइटेडथा।वहकामपरबहुतफोकस्डरहतेहैं।

पहलेदिनकीशूटिंगकाकैसाअनुभवरहा?

(मुस्कुरातेहुए)पहलेदिनहमलद्दाखमेंशूटकररहेथे।वहांपरमैंजीपचलारहाथा।उसकाब्रेकडाउनहोजाताहै।उसकेबादमैंअपनेसैनिकसाथवॉकपरजाताहूं।लद्दाखजानेपरशूटिंगसेएकदिनपहलेआपकोवहांकेमौसमकेअनुकूलढलनाहोताहै।इसलिएएकदिनमैंभीहोटलकेअंदरकमरेमेंहीरहा।आमतौरपरजबआपदसमिनटवॉककरतेहैंतोइतनीसांसनहींचढ़तीहै,जितनीवहांपरचढ़रहीथी।मौसससेतालमेलबिठानाभीबड़ीचुनौतीथी।

शोकेदरम्यानयुद्धकोलेकरक्यासमझबनीऔरएक्शनकरनेकेअनुभवकैसेरहे?

चीनऔरभारतकेबीच1962केयुद्धसेसबवाकिफहैं।हमनेउसयुद्धमेंजीतकीकहानीकोदिखायाहै।यह125सैनिकोंकीकहानीहै,जिन्होंनेहिम्मतकेसाथ3000चीनीसैनिकोंकासामनाकिया।इसमेंकाफीएक्शनकरनेकोभीमिला।हमारेएक्शनडायरेक्टरकाफीअनुभवीहैं।वहलॉसएंजिलिसमेंहीरहतेहैं।उन्होंनेकहानीकेसाथकिरदारोंकोसमझतेहुएएक्शनडिजाइनकिया।उनकेसाथकामकरनेमेंमजाआया।जहांतककायांतरणकीबातहैतोहमकलाकारहैं।हमेंअपनाफिजिकलरूटीनतोरखनाहीपड़ताहै।फिलहालमैंचोटसेउबररहाहूं।मैंजितनाकरनाचाहताथा,शायदउतनाकरनहींपाया।शोसेसेनाकेबहादुरीकेकिस्सेदुनियातकआसानीसेपहुंचतेहैं...सिनेमाबहुतसशक्तमाध्यमहै।निजीतौरपरमैंयुद्धकेखिलाफहूं।मुझेनहींलगताकियुद्धसेकोईहलनिकलसकताहै।इसलिएमेरेलिएयहजरूरीथाकिलोगोंकोबताएंकिइससेकिसीकाभलानहींहोनेवालाहै।अगरआपचीजोंकोडिप्लोमैटिकतरीकेसेसुलझापाएंतोबेहतरहै।युद्धनेसमस्याएंभीपैदाकीहैं।बहरहालयुद्धसेजुड़ीकहानियोंकोदिखातेसमयदेशभक्तिकेसाथमानवीयएंगलऔरउसके प्रभावकोदिखानाजरूरीहै,क्योंकिकुछभीब्लैकएंडव्हाइटनहींहोताहै।ग्रेएरियाभीहोताहै।

आपनेअपनीहीफिल्म'रांझणा'मेंदिखाएगएकुछदृश्योंपरअबआपत्तिजाहिरकीहै।ऐसाकिसकारणसेकिया?

मैंनेबसमुद्दाहाइलाइटकियाथाकिउसमेंसमस्याक्याथी।बॉलीवुडकीथीमरहीहै,जहांएकलड़का,लड़कीकातबतकपीछाकरताहैजबतकवोहांनकरदे।यहबातमैंनेनिर्देशकआनंदएलरायसेतबभीकीथीजबहमफिल्मबनारहेथे।उन्होंनेकहाथाकिआखिरमेंलड़कीहीलड़केकोमारदेतीहै।मैंनेकहायहअच्छीबातहै।मैंहिंसाकोबढ़ावानहींदेरहाहूं,लेकिनमैंउत्पीडऩकोरोमेंटेसाइजनहींकरनाचाहूंगा।बॉलीवुडफिल्मोंकाफार्मूलाहोताहैकिआपहीरोकोग्लैमराइजकरें।हालांकिआनंदकीमंशायहनहींथी।बादमेंवहदिखरहाथा।मेरेलिएयहसिर्फ'राझंणा'कीबातनहींथी,बल्कियहसोचकहांसेआतीहै,यहमहत्वपूर्णरहा।हमउसमुद्देकोअलगतरहसेउठारहेथे।'रांझणा'बनकररिलीजभीहोगई।मैसेजभीठीकथा।ऐसानहींथाकिहमनेउत्पीडऩकोस्वीकारकिया।