हॉस्पिटल फार्मासिस्ट विहीन, पीट रहे बेहतर इलाज का ढिढोरा

अयोध्या:मवेशियोंकेबेहतरइलाजकाढिढोरापशुपालनविभागपीटताहै।परउसकेपासफार्मासिस्टतकनहींहैंजोचिकित्सालयोंमेंदवाओंववैक्सीनकेरखरखाववभंडारणव्यवस्थासंभालतेहैं।जिलेमें29पशुचिकित्सालयहैं।इनमेंसे15पशुचिकित्सालयोंमेंफार्मासिस्टतकनहींहै।सबसेखराबस्थितितोजिलापशुचिकित्सालयकीहै।पशुचिकित्सालयबारुनकेचिकित्सालयकेफार्मासिस्टअनिलकुमारयादवकेपासजिलाचिकित्सालयकेफार्मासिस्टकाप्रभारभीहै।बारुनकीपशुचिकित्साधिकारीडॉ.शशियादवलगभगएकवर्षसेअवकाशपरहैं।ऐसेमेंवहकैसेअपनेवजिलापशुचिकित्सालयमेंतालमेलबिठातेहोंगे,यहसमझनामुश्किलनहीं।उनकीदोहरीजिम्मेदारीकेचलतेसबसेबड़ीदिक्कतउनपशुचिकित्सकोंकेसामनेआतीहैजोजिलापशुचिकित्सालयमेंदवाववैक्सीनलेनेकेलिएदूरदराजक्षेत्रोंसेआतेहैं।पताचलताहैकिअभीवहपशुचिकित्सालयबारुनमेंहैं।दवालेनेकेलिएउन्हेंफार्मासिस्टकाइंतजारकरनापड़ताहै।

मुख्यपशुचिकित्साधिकारीडॉ.एकेश्रीवास्तवकेअनुसारयहनीतिगतमामलाहै।शासनकोबराबररिक्तपदोंकीजानकारीदीजातीहै।एकपशुचिकित्सककेअनुसारचतुर्थश्रेणीकर्मचारीनहोनेसेभीदिक्कतहै,जिनचिकित्सालयोंमेंएकहीचतुर्थश्रेणीकर्मचारीहै,उसकेअवकाशपरहोनेसेपशुचिकित्सकोंकीदिक्कतकोसमझाजासकताहै।