हिंदी के मोती चुगने का अवसर

सूर्यकुमारपांडेय

इसेएकसंयोगहीकहाजाएगाकिआमतौरपरजबपितृपक्षआरंभहोताहैतबउसीकेआसपासहिंदीकामातृपक्षभीआताहै।इसेआमभाषामेंहिंदीपखवाड़ाकहाजाताहै।इसकेशुरूहोतेहीसरकारीकार्यालयोंमेंअचानक‘निजभाषाउन्नतिअहै,सबउन्नतिकोमूल’वालेकोरसकीधुनसुनाईदेनेलगतीहै।इसीकेसाथइसधुनपरपंखफड़फड़ाकरउड़नेवालेहंसोंकीडिमांडबढ़जायाकरतीहै।जबसेहिंदीमेंदूसरीभाषाओं,खासकरअंग्रेजीकेशब्दोंकाकॉकटेलहोनेलगाहै,इनहंसोंमेंनीर-क्षीरविवेककीगुणवत्ताऔरअधिकविकसितहोगईहै।येतथाकथितहंसहिंदीकेलेक्टोमीटरहैं।येसाहित्यकाविशुद्धदूधपीतेहैंऔरपानीकापानीकरदेतेहैं।हिंदीपखवाड़ेमेंइनकीउत्सवधर्मितादेखतेहीबनतीहै।व्यस्तता-दर-व्यस्तता।हिंदीकीशुद्धताकोलेकरइनहंसोंकीचिंतादेखकरहमेंभयलगनेलगताहैकिकहींज्यादासोच-विचारकीमारसेइनकाझकधवलरंगमटमैलानपड़जाए!येहंसवर्षभरभाषाकेमानसरोवरतटपरबगुलोंकेसमानध्यानमग्नबैठेरहतेहैं।सितंबरलगतेहीइनकीसहालगशुरूहोजातीहै।येकमसेकमपंद्रहदिनोंकेलिए‘बुक’होजातेहैंऔर‘बुके’बटोरनेमेंलगजातेहैंअन्यथाअक्टूबरसेअगस्तकेमध्यदो-चारसंगोष्ठियोंऔरसेमिनारोंकीमोटीमछलियांफंसगईंतोउन्हींसेसंतोषकरलिया।सितंबरमेंहिंदीकासरकारीवार्षिकोत्सवआतेहीइनकेपंजेखुजलानेलगतेहैं।व्यस्तताएंइतनीबढ़जातीहैंकिअपनेहीपरखुजलानेकाअवकाशनहींहोता।येहंसदिनमेंसाढ़ेबारहबजेअलांकार्यालयमेंहिंदीदिवसकाउद्घाटनकररहेहोतेहैंतोसवातीनबजेफलांऑफिसमेंहिंदी-वीकसमारोहकोसंबोधितकररहेहोतेहैैं।यहां‘हिंदीवीक’कातात्पर्यहिंदीसप्ताहसेहै,नकिहिंदीकेकमजोरहोनेसे।इसकेबादसायंठीकपौनेपांचबजेकिसीनिदेशालयमेंआयोजितकविगोष्ठीकीअध्यक्षताफरमारहेहोतेहैं।इनकुछदिनोंकेदौरानइनकेकानोंमेंबसहिंदीहीहिंदीघुलतीहै।अंग्र्रेजीमेंसोचनेतककीफुरसतनहींहोतीहैइनको।ज्ञान-सरोवरकेयेहरदिलहंसकहांनहींहैं?कहींपरहिंदीकेसर्वज्ञप्रोफेसरहैं।कहींपरसु-नामीसाहित्यकारहैं।कहींपरसमर्पितहिंदीसेवीहैं।कहींराजभाषाअधिकारियोंकेगुरुप्रवरहैं।कहींराजभाषाकेज्ञाताहैं।अच्छेवक्ताहैं,इसलिएयेऑल-इन-वनहोतेहैं।अपनीप्रतिभाकेचलतेहीयेप्रतिवर्षहिंदीदिवससमारोहोंकीशोभाकेअनिवार्यऔरविशिष्टअंगसमझेजातेहैं।महीनोंपहलेसेबुकिंग्सलेनेलगतेहैं।कहींमुख्यअतिथितोकहींपरविशिष्टअतिथि।कहींपरअतिविशिष्टअतिथितोकहींपरउद्घाटनकर्ता।येएकहीदिनमेंकई-कईरूपोंमेंप्रकटहोतेहैं।हिंदीपखवाड़ेमेंयेजिधरभीनिकललेतेहैं,शामतकतीन-चारशालें,जोइनकोअंगवस्त्रकहकरओढ़ाईजातीहैं,लपेटेबिनाघरनहींलौटते।सौभाग्यवशमुझकोपिछलेहफ्तेऐसेहीएकहंसकेदर्शनहोगए।वहआगामीहिंदीदिवसपरआयोजितएककार्यक्रमकीतैयारीकररहेथे।गलेमेंसूतीमालालटकरहीथी।कंधेपरशॉलसुशोभितथी।मैंनेयूंहीहालचालपूछलिया।शॉलकीप्रशंसाकरदी।वेचहकतेहुएबोले,‘विगतपंद्रह-बीससालोंमेंऐसीहीतीन-चारसौसूती,ऊनीऔरपश्मीनाकीशॉलेंबटोरचुकाहूं।सोचताहूं,अपनीपत्नीकेनामसेएकशॉलभंडारखुलवाकरइनकीबिक्रीआरंभकरादूं।’हिंदीपखवाड़ेकेसिलसिलेमेंएकअधिकारीइनहंससाहबकेपासपहुंचे।वहचाहतेथेकिआदरणीयअपनेव्यस्ततमसमयमेंसेकुछबहुमूल्यक्षणअपनीजेबसेनिकालकरउनकेकार्यालयकेहिंदीदिवससमारोहकोदेंऔरअपनीचरणरजसेभाषाकेमस्तकपरतिलकलगाएं।आदरणीयनेअपनेव्यस्तकार्यक्रमोंकेचलतेअसमर्थताजताई।तबउसअधिकारीनेकिसीऔरनामकीसंस्तुतिकरनेकाकरबद्धनिवेदनकिया।उन्होंनेमेरानामसुझादिया।बोले,‘उन्हेंबुलालीजिए।भाषणभीदेदेंगेऔरबोनसमेंआपलोगोंकोहास्यकविताएंभीसुननेकोमिलजाएंगी।आपकाकामभीहोजाएगाऔरकार्यालयकेलोगोंकामनोरंजनभी।’इसतरहप्रतिस्थानीकेतौरपरहीसही,मुझेभीआदरणीयकीअनुकंपासेएकबारहिंदीकाहंसबननेकासुअवसरउपलब्धहोगयाथा।वहअधिकारीमुझसेमिलनेआए।वहथेतोएकप्रशासनिकअधिकारी,लेकिनउन्हेंराजभाषाविभागकाएडिशनलचार्जभीसंभालनापड़रहाथा।अनौपचारिकवार्ताकेदौरानअपनीपीड़ाकाप्यालाछलकातेहुएमुझसेकहनेलगे,‘सर,क्याकरें?कोल्हूकाबैलहोगएहैं।अपनीहीटेबलकाकामनहींनिपटपाता।अबएकमहीनाइसहिंदीदिवसकेकाममेंनिकलजाएगा।ऑफिसमेंटिप्पणलेखनकराओ।हिंदीटंकणप्रतियोगिताएंकराओ।हिंदी-विंदीकीबातेंसुनताहीकौनहैआजकल?मैंतोकहताहूं,हिंदीअपनेआपलोकप्रियहोरहीहै।उसकेनामपरसेलिब्रेशनकरनामातृभाषाकाअपमानहै।’मैंनेहंसतेहुएशुद्धहिंदीमेंकहा,‘हमजैसेहंसवाहिनीकेवरदपुत्रोंकामूल्यबत्तखबराबरभीनहींरहगयाहै।सालमेंएकबारतोहिंदीकेनामपरमोतीचुगनेकाअवसरमिलताहै।आपक्योंहमारेपेटपरलातमारनेपरलगेहैं?’वहतपाकसेबोले,‘सर,आपनेतोमेरेकहेकोसीरियसलीलेलिया।मैंतोआपकोहास्यकविसमझकरजोककररहाथा।आपतो14सितंबरकोसादरआमंत्रितहैं।’

[हास्य-व्यंग्य ]