घाटमपुर की विरासतों को संवारने की बन रही कार्ययोजना, पर्यटन के नक्शे पर चमकेंगे गुप्तकालीन व जगन्नाथ मंदिर

घाटमपुर,[महेशशर्मा]।कारोबारीशहरकीपहचानरखनेवालाकानपुरप्राचीनकालसेकलावसंस्कृतिकीधरोहरेंभीसहेजेहै।इनविरासतोंकोपर्यटनकेनक्शेपरचमकानेकेलिएअबप्रशासननेफोकसकियाहै।मंडलायुक्तराजशेखरऐसीदोविरासतोंभीतरगांवकेगुप्तकालीनमंदिरऔरमानसूनकापताबतानेवालेजगन्नाथमंदिरकोपर्यटनकेलिहाजसेविकसितकरानेकेलिएकार्ययोजनाकरारहेहैं।विकासकार्यहोनेकेबादयहांपर्यटकोंकाआवागमनआसानहोगातोक्षेत्रकीतस्वीरभीबदलेगी।

गौरवशालीहैभीतरगांवकागुप्तकालीनमंदिर

नर्वलतहसीलकेविकासखंडमुख्यालयभीतरगांवस्थितइष्टिकायानीईंटोंकामंदिरसिंधुघाटीसभ्यताकीविकसितयोजनाकासाकारदर्शनकराताहै।भीतरगांवकोभारतकेसबसेप्राचीनमंदिरोंमेंसेएककोअपनेआंचलमेंसमेटनेकागौरवहासिलहै।जोदेशदुनियामेंउसेपहचानदिलारहाहै। गुप्तकालीनपांचवींसदीकेईंटोंकेमंदिरमेंटेराकोटाकीमूॢतयांमिलीहैंजबकिदेशकेअन्यमंदिरोंमेंपत्थरकीमूर्तियांहैं।सबसेदिलचस्पतथ्यहैकिभारतमेंसुरक्षितमिलनेवालेप्राचीनमंदिरोंमेंदोईंटोंकेमंदिरहै।एकभीतरगांवऔरदूसराछत्तीसगढ़केसिरपुरकालक्ष्मीमंदिर।हालांकिमंदिरमेंमुख्यमूॢतनहींमिलीहै,लेकिनगुप्तराजाओंकेवैष्णवहोनेवमंदिरकीसंरचनासाम्यहोनेसेमानाजाताहैकियेविष्णुमंदिररहाहोगा।मंदिरमेंशिखरहै।मुड़ीईंट,तराशेगएमूर्तिफलकदीवारोंपरहैं।यहांकीईंटोंपरडिजाइनहै,जिन्हेंंपकाकरबनायागयाहै।

मंदिरकाइतिहास

ब्रह्मावर्तसनातनधर्ममहाविद्यालयनवाबगंजकानपुरकेइतिहासविभागाध्यक्षडॉ.अनिलमिश्रबतातेहैंकिसभ्यताकेविकासक्रममेंईंटोंकापहलाप्रयोगसिंधुघाटीसभ्यतामेंमिलताहै,हालांकितबइनईंटोंसेमंदिरनहींबल्किमकान,नालीऔरसड़कोंकानिर्माणहोताथा।मूॢतपूजाशुरूहोनेकेसाक्ष्यगुप्तकालसेमिलतेहैंतभीसेईंटोंसेबनेमंदिरभीमिलतेहैं,यानीगुप्तकालसेहीईंटोंकेमंदिरोंकानिर्माणशुरूहोताहै।इनमंदिरोंमेंपत्थरकाभीइस्तेमालकियाजातारहाहै।गुप्तसाम्राज्यकेपतनकेबादभीयहपरंपराकानपुरपरिक्षेत्रमेंजीवितरहीयानीकेयहांराजाओंनेईंटकलाकेकलाकारोंकोसंरक्षणदिया।सल्तनतकालमेंइनकलाकारोंकासंरक्षणबंदहोगयाऔरईंटोंसेमंदिरबनानाभीबंदहोगया।इसकेबादईंटोंसेकेवलआवास,भवनआदिहीबननेकेसाक्ष्यमिलतेहैं।पश्चिमबंगालमेंआठवीं-नवींशताब्दीसेलेकर16वींसदीतकईंटकेमंदिरबनाएगएहैं।वहांईंटकेमंदिरपरंपराकेरूपमेंबने।बंगालमेंसोनाटोपल,बांकुड़ाकेबहुलरामेंईंटकेमंदिरपुरातात्विकदृष्टिसेबेहदअहमहैं।कानपुरमेंयहकलाविशेषरूपसेबढ़ी।यहांसेफतेहपुरतक,विशेषकरभीतरगांवसेलगेक्षेत्रयानीजहानाबादतकईंटोंकेमंदिरकीपूरीशृंखलाहै।गांवनिबियाखेड़ास्थितमंदिरशृंखलाभीइसीकाअंगहै,जोबतातीहैकिइसपरंपराकाविकासकैसेहुआ।

तबमंदिरबनानेकीपरंपरामेंशिखरबनानेकाप्रचलननहींथा।इसकाविकासबादमेंहुआ।,इसीलिएभीतरगांवमंदिरकाशिखरसपाटदिखताहैऔरआगेकेकालमेंशिखरपतलेहोतेजातेहैं।ईंटोंकेयेमंदिरबिनाकिसीचिनाईकेतैयारकिएगएहैं।बतातेहैंकिपहलेमंदिरकीवास्तुकलातैयारहोतीथी।फिरस्थानपरलगनेकेअनुसारईंटोंकीडिजाइनबनतीथी।उसीअनुसारईंटबनाकरउसेपकायाजाताथा।वास्तुकलाकेहिसाबसेमहीनकारीगरीकेविकासकादौरभीकहसकतेहैं।येईंटबिनाकिसीमसालेकेरखीगईहैं।ईंटोंकास्ट्रक्चररखकरमिïट्टीकालेपलगायागयाहैऔरउसपरईंटेंचिपकाईगईहैं।इसकेअलावाहरमंदिरकीदीवारनालीयुक्तहै।इससेपानीनहींरुकताहैऔरकलापक्षभीमजबूतदिखताहै।

अलेक्जेंडरफ्लेमिंगनेकीथीखोज

बतातेहैंकिवर्ष1875मेंअलेक्जेंडरफ्लेमिंगरेलवेकेसर्वेयरबने।इसदौरानउन्होंनेभीतरगांवकेमंदिरकीखोजकीथीऔरउसकापुरातात्विकमहत्वबतायाथा।