दयालु पर ही भगवान करते हैं दया

जागरणसंवाददाता,फरीदकोट

श्रीकल्याणकमलआश्रमहरिद्वारकेअनंतश्रीविभूषित1008महामंडलेश्वरस्वामीकमलानंदगिरिनेकहाकिलोगदोप्रकारकेहोतेहैजिनमेंएकतोस्वाभाविकऔरदूसराप्रभाविकतरहके।जोलोगस्वाभाविकतरहकेहोतेहैं,वहदिखावेयाबनावटीपनमेंयकीननहींकरते।उनकाजैसास्वभावहोताहैवहवैसेहीसभीकोनजरआतेहैं।मगरजोलोगप्रभाविकहोतेहैं,वहज्यादाप्रभावजमानेऔरदिखानेवालेहोतेहैं।ऐसेलोगहमेशाकिसीनकिसीतरहसेसभीपरअपनाप्रभावजमानेकीकोशिशमेंलगेरहतेहैं।उनकेस्वभावमेंहीऐसाहोताहैकिवहदूसरोंपरप्रभावदिखातेफिरतेहैं।जोलोगदिखावाकरतेहैं,वहकामयाबनहींहोपाते।ऐसेलोगआमतौरपरसभीकोनहींभाते।मगरजोलोगदिखावाआदिनहींकरतेवहहमेशाउन्नतिकरतेहैंऔरलंबेसमयतकलोगोंकेबीचहरमनप्रियबनेरहतेहैं।ऐसेलोगोंकोसभीपसंदकरतेहैं।इसलिएस्वाभाविकबननेकीकोशिशकरेंनकिप्रभाविक।महामंडलेश्वरजीमहाराजनेयहविचाररोजएनक्लेवसुखीजाकॉलोनीफरीदकोटस्थितश्रीमहामृत्युंजयमहादेवमंदिरमेंआयोजितश्रीमद्भागवतप्रवचनकार्यक्रमकेदौरानबुधवारकोश्रद्धालुओंकेविशालजनसमूहकेसमक्षप्रवचनकीअमृतवर्षाकरतेहुएव्यक्तकिए।स्वामीजीनेकहाकिजोखुददयालुहोताहै,भगवानउसीपरदयाकरतेहैं।जिसव्यक्तिकामनशुद्धहोताहैउसेहीभगवानकेदर्शनहोतेहैं।जबतकमनुष्यकामनसांसारिकविषय-विकारोंववासनाओंकेप्रतिआसक्तरहेगातबतकव्यक्तिकोसच्चेसुखकीप्राप्तिनहींहोसकती।

स्वामीजीनेश्रद्धालुओंकोसात्विकभोजनकरनेकोप्रेरितकरतेहुएकहाकिमनुष्यकोअच्छाअन्नखानाचाहिए।मनुष्यजैसाअन्नखाताहैउसकामनवैसाहीबनजाताहै।इसलिएअच्छाऔरसात्विकभोजनकरेंताकिमनमेंभीअच्छेविचारआएं।सच्चेशिष्यकीपरिभाषादेतेहुएस्वामीजीनेकहाकिसच्चाशिष्यवहीहैजोगुरुजीकेकार्योपरध्याननहींदेताबल्किवहतोसिर्फगुरुकीआज्ञाकाशीशझुकाकरपालनकरताहै।सेवाकीपरिभाषाबतातेहुएकमलानंदजीमहाराजनेकहाकिसेवामेंबहुतआनंदहै।श्रीहनुमानजीनेसेवाद्वाराहीप्रभुश्रीरामचंद्रकोप्राप्तकिया।जिन्होंनेअपनेमानकोमारलियाहै,वहीसच्चेसेवकहोतेहैं।हनुमानजीसेवामांगतेनहीं,सेवापूछतेनहींबल्किमौकादेखतेहैंकिप्रभुकीसेवाकाकोईअवसरमिलेतोसबसेपहलेआगेबढ़करउसकामकोकरतेथे।इसलिएतोप्रभुश्रीरामचंद्रजीनेखुशहोकरकहाथाकि'तुममनप्रियभरतसमभाई।'अर्थातरामजीनेहनुमानजीकीसेवासेप्रसन्नहोकरउन्हेंभरतसमानभाईबताया।स्वामीजीनेकहाकिमनकोप्रभुभक्तिमेंलगाओगेतोलोकवपरलोकदोनोंहीसुधरजाएंगे।इसलिएभाग-दौड़केइसजीवनमेंकुछसमयप्रभुभक्तिकेलिएभीनिकालो।

इसमौकेमंदिरकमेटीकीप्रवक्ताप्रवेशरेहान,पंकजचानणा,मदनसचदेवा,हरिराममंगला,चौधरीसुरेंद्रपाल,मदनलालकपूर,कीमतीलाल,दर्शनलालचुघ,अर्जुनशर्मा,विक्रमनंदा,अशोकचानना,रविपुरी,चंद्रपाल,राधेश्याम,सतीशमोंगा,सुमनमोंगा,राजेंद्रमित्तल,महेशशर्मा,अनिलशर्मासमेतबड़ीगिनतीमेंश्रद्धालुउपस्थितथे।

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