दहेज की कुरीति से दूर बिहार का यह आदिवासी समाज, यहां शादी कर रहे जोड़े को मिलता भगवान का दर्जा

रिश्तालेकरलड़कीकेघरजातेजातेलड़केवाले

पश्चिमचंपारणकेवाल्मीकिटाइगररिजर्व(VTR)सेलेकरभिखनाठोरी(Bhikhnathori)तकजंगल(Forest)केसीमांचलमेंकरीबतीनलाखथारूआदिवासीनिवासकरतेहैं।वेआजभीअपनीसंस्कृति(Culture)बचाएहुएहैं।इससमाजमेंविवाहकेलिएलड़कीवालोंकीजगहलड़केवालेरिश्तालेकरजातेहैं।विवाहतयकरानेमेंगजुआ(अगुआ)कीभूमिकाअहमहोतीहै।वेवरववधूकेजीजायाफूफाहोतेहैं।

केवलएकधोतीवपांचरुपयेमेंहोजातीशादी

शादीकीसंपूर्णतैयारीगजुआ-गजुआइन(BrideandGroom)केद्वाराकीजातीहै।उन्हेंयहसमुदायभगवान(God)कादर्जादेताहै।दहेजकेनामपरवरकीपुजाईकेसमयकन्यापक्षकोसिर्फएकधोतीवपांचरुपयेहीदेनेहोतेहैं।साथहीआसपासकेहरघरकेलोगऔरनाते-रिश्तेदार(Relatives)सामानकीजगहअनाज(FoodGrains)गिफ्ट(Gift)करतेहैं।इससमाजकेबहुतसेलोगपढ़-लिखकरआजडॉक्टर,इंजीनियरवअधिकारीबनचुकेहैं।इसकेबावजूदबिनादहेजकेशादीकरतेहैं।

दहेजकीकुप्रथासेदूरयहआदिवासीसमुदाय

बिनादहेजशादी(DowrylessMarriage)करनेवालेदोनगोबरहियागांवनिवासीडॉ.प्रेमनारायणकाजीकहतेहैंकिवेखुशनसीबहैंकिथारूसमुदायसेआतेहैं,जहांदहेजजैसीकुप्रथानहींहै।डॉ.कृष्णमोहनरायकीपुत्रीडॉ.अरुणाकीशादीबेरईगांवनिवासीडॉ.संजयसेबिनादहेजहुईहै।

अधिकांशआबादीशिक्षित,देशभरमेंदेरहेसेवा

कायमरखीपूर्वजोंकीबनाईसंस्कृति

नारंगियादरदरीकेमुखिया(Mukhiya)बिहारीमहतोवभारतीयथारूकल्याणमहासंघकेअध्यक्षदीपनारायणप्रसादकाकहनाहैकिवेपूर्वजों(Forefathers)कीबनाईसंस्कृति(Culture)कायमरखेहुएहैं।समाजकाअगरकोईव्यक्तिदहेजकीमांगकरतातोउसेदंडितकरनेकानियमबनाहुआहै।हालांकि,अभीतकइसतरहकाकोईमामलासामनेनहींआयाहै।