डीजे कीदौर में झिझिया, सामा चकेवा जैसे पारंपरिक लोकगीत हो रहे विलुप्त

सीतामढ़ी।बिहारकीविशेषपहचानलोककला,लोकगीत,लोकनृत्यवसांस्कृतिकविकासकेकारणहै।भाषा,पहनावा,रहन-सहन,हावभावआदिकीविविधताकेबावजूदअनेकतामेंएकताकीखूबसूरतमिसालअपनीसंस्कृतिमेंहीदेखनेकोमिलतीहैऔरयहसंभवहोसकाहैलोककलाओंकेमाध्यमसे।दूसरीओरआजविडंबनायहहैकिजहां,बिहारकेलोगझिझियानाच,जाटजटिन,विदेशियानाच,सामाचकेवा,अल्हा-उदल,सोहर,चैती,झूमर,ठुमरी,कजरी,आदिलोकगीतवनृत्यकरकेबिहारकीधरतीकीमिट्टीकीसोंधीमहकबिखेरतेथे।आजआधुनिकताकीदौरवपश्चिमीसभ्यताकेचकाचौंधमेंलोककलावसंस्कृतिदमतोड़रहीहै।डीजे-डिस्कोकेदौरमेंझिझिया,जट-जटिनवसमाचकेवाजैसेपारंपरिकलोकगीतविलुप्तहोरहेहैं।दशहरा-दीपावलीवछठपर्वकेमौकेपरयेलोकगीतसुनाईपड़तेथे।अबगांव-कस्बोंमेंझाल-करताल,ढोल-मजीरेकीतन-मनकोझंकृतकरतीथापऔरउसपरगायाजानेवालालोकगीतकीगूंजविरलेहीसुनाईपड़तेहैं।बिहारखासकरमिथिलांचलमेंलोकगीत,संगीत,जीवनदर्शन,मंगल-अमंगल,प्रेम-करूणा,राग-द्वेषसेउपजीझंझावतोंकीकहानीउन्हींलोकगीतवनृत्यमेंदेखीजासकतीथी।राग,वियोगवमिलनकीअप्रतिमकाव्यकलाकीधाराअविरलबहतीरसधारासुनाईदेतीरहतीथी।लोकगीतहमारीपरंपरावसंस्कृतिकीजीवंतउदाहरणहुआकरतीथी।कीर्तनवभजनतुलसी,कबीर,सूरदास,रहीमआदिकवियोंकेपद,दोहे,चौपाईसेशुरूहोतेथे।शास्त्रीयसंगीतवकत्थकनृत्यजोसंगीतकीआत्माहैउससेहमदिनपरदिनदूरहोतेचलेजारहेहैं।ऐसेखेलाजातासामाचकेवालोकआस्थाकामहापर्वछठकेखरनाकीरातसेहीभाई-बहनकेअटूटप्रेमकेप्रतीकसामाचकेवाशुरूहै।कार्तिकपूर्णिमाकेदिनइसकासमापनहोगा।बहनेंअपनेभाईयोंकोनएधानकेचूड़ाकेसाथदहीखिलाकरसमापनकरतीहैं।शामहोतेहीबहनोंकासमूहसार्वजनिकस्थानपरडालामेंसामाचकेवाकोसजाकरगीतवृदांवनमेंआगलगले.सामाचकेवाखेलगेलीयहेबहिना,चुगलाकरेचुगलपन,बिलाईकरैम्याउ,धकेलाचुगलाकेफांसीदआउआदिप्रमुखहैं।इसकेमाध्यमसेहंसी-ठिठोलीभीकीजातीहै।बहनेंभाईकेदीर्घायुहोनेकीकामनाकरतीहैं।यहपरंपराद्वापरयुगसेचलीआरहीहै।बहनेंसामाचकेवा,सतभइया,खड़रीच,चुगिला,वृंदावन,चौकीदार,झाझीकुकुर,साम्यआदिकीप्रतिमाबनातीहैं।गीतकेबादबनावटीवृंदावनमेंआगलगातीहैं।चुगलासंठीसेनिर्मितकोगालियांदेतेहुएउसकीदाढ़ीमेंआगलगातीहैं।कार्तिकपूर्णिमाकेदिनबेटीकीविदाईजैसीडोलीसजाकरसामाचकेवाकाविसर्जनकियाजाताहै।यहहैपौराणिककथापौराणिकताएवंलौकिकताकेइसलोकपर्वकीकहानीकुछयूंहै।आचार्यपंडितविजयकांतझा,कुटेश्वरझानेबतायाकिभगवानश्रीकृष्णकीपुत्रीश्यामाऔरपुत्रशाम्भकेबीचअपारस्नेहथा।कृष्णकीपुत्रीश्यामा,ऋषिकुमारचारूदत्तसेब्याहीगईथीं।श्यामा,ऋषिमुनियोंकीसेवाकरनेबराबरउनकेआश्रमोंमेंजायाकरतीथीं।भगवानश्रीकृष्णकेमंत्रीचुरककोयहरासनहींआया।श्यामाकेखिलाफसाजिशरची।कुछऐसीशिकायतकीजिससेक्रोधितहोकरभगवानश्रीकृष्णनेश्यामकोपक्षीबनजानेकाश्रापदिया।श्यामाकेपतिचारूदत्तनेभगवानमहादेवकीपूजाकरकेप्रसन्नकरलियाऔरस्वयंभीपक्षीकारूपधारणकरलिया।श्रीकृष्णकेपुत्रशाम्भनेअपनेबहन-बहनोईकीदशादेखकरपिताकीआराधनाप्रारंभकी।मानवरूपमेंपानेकावरदानमांगा।भगवानश्रीकृष्णनेश्रापमुक्तिकेलिएश्यामासामाऔरचारूदत्तरूपीचकेवाकीमूर्तिबनाकरउनकेगीतगाएऔरचुरककीकारगुजारीकोउजागरकरेंतोदोनोंफिरसेअपनेरूपमेंआजाएंगे।उसकेबादसेयहत्योहारमनायाजाताहै।बहनश्यामानेवृंदावनमेंघर-घरजाकरमहिलाओंसेआग्रहकियाकिजोबहनेंमिट्टीसेसमाचकेवाबनाकरचौक-चौराहोंवखलियानपरखरनाकीरातसेकार्तिकपूर्णिमातकखेलेंगीउनकेभाईकीलंबीआयुहोगी।उसीदिनसेबहनोंवमाताओंनेसमाचकेवाकाखेलआरंभकिया।

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